ईसाई समुदाय का एक प्रमुख त्योहार ईस्टर आने वाला है। यह गुड फ्राइडे के तीसरे दिन रविवार को जीसस के पुनर्जीवित (Resurrection) होने की खुशी में मनाया जाता है। यह इस बात को प्रदर्शित करता है कि जीत अंतत: सत्य की होती है और जीवन कष्टों के आगे हार मानने का काम नहीं है। इस दिन ईसाई समुदाय के लोग प्रार्थना करते हैं और उनके नेता उन्हें संदेश भेजते हैं। और वे लोग इस पर्व की महत्ता बताते हुए अपने समुदाय के लोगों को संबोधित करते हैं।
क्या हो जब उनके नेता ही संदेश न दें तो?
यह एक प्रश्न उठता है कि क्या हो जब उनके नेता ही उनके पर्व पर संदेश न दें? क्या ऐसा कभी हो सकता है और यदि होता है तो क्यों होता है? ये प्रश्न और विवाद इसलिए खड़ा हुआ है क्योंकि यूके के राजा किंग चार्ल्स ने इस वर्ष ईस्टर के पर्व पर शुभकामनाएं देने से इंकार कर दिया है। इस बार बकिंघम पैलेस से यह औपचारिक रूप से घोषणा कर दी गई है कि किंग चार्ल्स इस वर्ष ईस्टर पर संदेश नहीं देंगे।
इस कदम के बाद ब्रिटेन में खलबली है। लोग तरह तरह की बातें कर रहे हैं। लोग प्रश्न कर रहे है कि आखिर किंग ने यह निर्णय क्यों लिया? आखिर क्या कारण है कि किंग को ईस्टर को भी अनदेखा करना पड़ा है? लोगों का कहना है कि जब इस समय नाइजीरिया में ईसाई बहुसंख्यक समाज पर हमले हो रहे हैं और रिपोर्ट्स यह भी कहती हैं कि उनके घरों पर गोलीबारी हो रही है और उन्हें घरों से बाहर निकाला जा रहा है, उस समय किंग का ईस्टर का संदेश जारी न करना क्या इंगित करता है?
वॉक का आयोजन निरस्त किया
यूके की UKIP पार्टी के एक्स हैंडल पर लिखा कि यह ब्रिटेन में ही कई बार देखा जा चुका है कि लोगों को ब्रिटेन की सड़कों पर केवल इसलिए हिरासत में लिया गया कि वे ईसाई मत का प्रचार कर रहे थे। यूकेआईपी वॉक विद जीसस के नाम से व्हाइटचैपल में एक वॉक का आयोजन किया था, मगर जिसे केवल इसलिए प्रतिबंधित कर दिया क्योंकि इस्लामिस्ट हिंसक रूप से प्रतिक्रिया कर सकते थे। हम ऐसे समय में रहते हुए जहां ब्रिटेन को एक मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है और यह केवल पुरुषत्व वाली ईसाइयत के माध्यम से ही हासिल हो सकता है। इसमें आगे लिखा है कि ऐसा नहीं है कि किंग ने केवल इसलिए संदेश नहीं दिया क्योंकि उनके पास उनके बिजी शेड्यूल के कारण समय नहीं था, बल्कि उन्होनें क्वीन कमीला के साथ समय बिताया है और दूसरे मतों के लिए संदेश दिए हैं।
रमजान पर दिया संदेश
पिछले वर्ष किंग ने ईस्टर का संदेश दिया था। मगर इस बार ऐसा नहीं किया है। वहीं लोगों का कहना है कि अभी फरवरी में ही किंग ने ब्लेस्ड और शांतिपूर्ण रमजान का संदेश मुस्लिमों को दिया था। इस संदेश में “रमादान मुबारक” के नाम से चित्र भी था। सोशल मीडिया पर लोग उनके रमजान मुबारक के संदेश का वीडियो भी साझा कर रहे हैं। टॉमी रॉबिन्सन ने वह वीडियो साझा करते हुए लिखा कि बकिंघम पैलेस ने यह घोषणा की है कि चार्ल्स ईस्टर मैसेज नहीं देंगे। और वहीं रमजान में:
Buckingham Palace announce that Charles won't be issuing an Easter message this year.
Meanwhile for Ramadan…. pic.twitter.com/7KNpMqp1QF
— Tommy Robinson 🇬🇧 (@TRobinsonNewEra) April 2, 2026
लोग रमजान के दौरान किंग के खजूर खाते हुए भी वीडियो पोस्ट कर रहे हैं। और कह रहे हैं कि ईस्टर संदेश के लिए समय नहीं है, मगर इसके लिए है। किंग चार्ल्स पर पहले भी मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोप लगते रहे हैं और लोगों का कहना है कि किंग चार्ल्स मुस्लिमों को खुश करने के लिए ये सब करते हैं। पिछले वर्ष के अपने ईस्टर के संदेश में उन्होनें यहूदी और इस्लाम का भी उल्लेख किया था।
हैपी ईस्टर नहीं कहेंगे किंग
सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि इंग्लैंड के किंग और डिफेंडर ऑफ द फेथ इस बार ईसाई कैलेंडर के सबसे पवित्र दिनों में से एक ईस्टर पर “हैपी ईस्टर” नहीं कहेंगे और यह बहुत खतरनाक है। किंग चार्ल्स ने विंडसर कैसल में रमजान की दावत का आयोजन किया था, मगर वे अब अपने देश के ईसाई नागरिकों के लिए ईस्टर का संदेश नहीं देंगे। ईसाई देश के किंग होने के नाते किंग को डिफ़ेंडर ऑफ फेथ कहा जाता है, फिर भी बकिंघम पैलेस ने यह पुष्टि की है कि वे ब्रिटिश ईसाई लोगों को इस साल ईस्टर का संदेश नहीं देंगे। ऐसा लगता है कि वे मुस्लिमों के साथ व्यवहार निभाने में अधिक व्यस्त हैं।











