फ्रांस में आखिरकार यूरोपीय संसद सदस्य रीमा हसन को ‘आतंकवाद का समर्थन’ करने के आरोप में हिरासत में ले लिया गया। फ्रांस की प्रमुख फिलिस्तीन समर्थक कार्यकर्ता और ला फ्रांस इंसुमिसे (LFI) पार्टी की यूरोपीय संसद सदस्य रीमा हसन को पेरिस में पुलिस हिरासत में लिया गया है। फ्रांसीसी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उससे उसकी ‘आतंकवाद की प्रशंसा’ को लकर पूछताछ की जा रही है। LFI पार्टी के कार्यकर्ताओं ने इसे फिलिस्तीन समर्थकों को ‘चुप कराने की साजिश’ करार दिया है, जबकि दक्षिणपंथी नेता इसे उचित कानूनी कार्रवाई बता रहे हैं।
हिरासत की वजह सोशल मीडिया पोस्ट
‘ले पैरिसियन’ अखबार और एएफपी न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट बताती हैं कि हसन की हिरासत के पीछे मुख्य वजह उसकी एक सोशल मीडिया पोस्ट है, जिसमें उसने 1972 में इस्राएल के बेन गुरियन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए घातक हमले के आरोपी जापानी आतंकी कोजो ओकामोतो का जिक्र किया था। ओकामोतो ने जापानी रेड आर्मी के सदस्य के रूप में उस हमले को अंजाम दिया था, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। LFI का गठन करने वाले जीन-लुक मेलेंचॉन ने एक्स पर इस बारे में लिखा है, “यह रीट्वीट पिछले महीने का था। फ्रांस में अब संसदीय ‘इम्युनिटी’ समाप्त हो गई। असहनीय!”
रीमा हसन ने हाल ही में एक पोस्ट में ओकामोतो के प्रति समर्थन व्यक्त किया था, जिसकी दक्षिणपंथी राष्ट्रीय रैली (रासेंबलमें नेशनल) पार्टी के सांसद मैथियास रेनॉल्ट ने अदालत में शिकायत की थी। रेनॉल्ट ने कल एक्स पर पोस्ट लिखी, “आखिरकार LFI सांसद के लिए दंड से मुक्त होने की प्रक्रिया शुरू हो गई है!”

ड्रग्स का भी लगा आरोप
रिपोर्ट में कहा गया है कि हिरासत के दौरान हसन के पास थोड़ी मात्रा में ‘सिंथेटिक ड्रग्स’ भी बरामद हुई। हालांकि, हसन और उनके वकील ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। यूरोपीय संसद के एक प्रवक्ता ने ‘चल रही कार्यवाही पर टिप्पणी से इनकार’ करते हुए कहा कि ईयू संसद फ्रांस के अधिकारियों, सदस्यों और उनके राजनीतिक दलों से संपर्क में है।
हसन की पृष्ठभूमि
33 वर्षीय रीमा हसन फ्रेंच-फिलिस्तीनी वकील और कार्यकर्ता है, जो सीरिया के एक फिलिस्तीनी शरणार्थी शिविर में जन्मी थी। 2024 में वह LFI से यूरोपीय संसद के लिए चुनी गई। वह गाजा पट्टी में इस्राएल के ‘नरसंहार मचाने वाले युद्ध’ की कड़ी आलोचक रही है। वह अक्तूबर 2025 में गाजा जाने वाले ‘ग्लोबल फ्लोटिला’ का भी हिस्सा रही थी, जिसे इस्राएल ने अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में रोक दिया था। फ्लोटिला में 20 जहाज और 300 से अधिक कार्यकर्ता थे, इनमें स्वीडिश एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग और आयरिश अभिनेता लियाम कनिंघम भी थे।
हसन की फिलिस्तीन के पक्ष में पैरोकारी ने फ्रांस और अन्य देशों में इस्राएल समर्थक समूहों को आक्रोशित किया था। पिछले सप्ताह रीमा को कनाडा में प्रवेश करने से रोका गया था, जहां वह बैठकों में भाग लेने और व्याख्यान देने जाने वाली थी। उसने इसे सेंसरशिप बताया था। गत सितंबर में, ब्रुसेल्स फ्री यूनिवर्सिटी (ULB) के विधि संकाय के छात्रों ने अपनी पासिंग क्लास का नाम उसके नाम पर रखा था, इसका भी बेल्जियम और फ्रांस में विरोध हुआ था। फ्रांस के गृहमंत्री के अनुरोध पर पेरिस के सरकारी वकील ने हसन द्वारा ‘आतंकवाद का महिमामंडन’ करने के आरोप की जांच शुरू की थी।

वामियों का विरोध
जैसा पहले बताया, LFI पार्टी के नेताओं ने हसन को हिरासत में लेने की कड़ी निंदा की है। नेशनल असेंबली में LFI सांसद सोफिया चिकिरौ ने कहा है कि फ्रांसीसी पुलिस और न्याय व्यवस्था का इस्तेमाल फिलिस्तीनी समर्थकों को डराने के लिए हो रहा है। LFI नेता मैथिल्ड पैनोट ने एक्स पर लिखा, “मैक्रां के फ्रांस में राजनीतिक विरोधियों को अपराधी ठहराने की हरकत नए स्तर पर पहुंच गई है। यह मौलिक अधिकारों का हनन है, इसे तुरंत रोका जाए।”
फ्रांस की राजनीति में दक्षिणपंथी और वामपंथी धड़ों में टकराव बढ़ता दिख रहा है, वहां एक ओर फिलिस्तीन समर्थक आवाजें हैं, तो दूसरी ओर इस्राएल समर्थक हैं जो हसन जैसों को आतंकवाद का समर्थक मानते हैं।

















