यूरोपीय देशों में इस्लामवादियों की जनसंख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसी के तहत फ्रांस की इमैनुएल मैक्रों की सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पेरिस में मुसलमानों के बड़ी संख्या में इकट्ठा होने पर रोक लगा दी है। सुरक्षा के हालातों को ध्यान में रखते सरकार ने ये फैसला किया है।
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट्स के अनुसार, पेरिस पुलिस प्रमुख पैट्रिस फॉरे ने एक्स पर पोस्ट करके यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गृह मंत्री लॉरेंट नूनेज़ के अनुरोध पर पेरिस-ले बॉर्गेट प्रदर्शनी केंद्र में 3 अप्रैल से 6 अप्रैल 2026 तक होने वाली “फ्रांस के मुसलमानों की वार्षिक बैठक” के 40वें संस्करण पर रोक लगा दी गई है। यह बैठक मुस्लिम संगठन द्वारा हर साल आयोजित की जाती है। इसमें हजारों लोग इकट्ठा होते हैं। फ्रांस में मुस्लिम समुदाय की आबादी लगभग 5 से 6 मिलियन बताई जाती है, जो देश की कुल आबादी का करीब 9-10 प्रतिशत है।
रोक क्यों लगाई गई?
अधिकारियों ने कहा कि देश और दुनिया में तनाव का माहौल है। आतंकवादी हमलों का अलर्ट जारी है और सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने का खतरा है। हाल ही में फ्रांस में बैंक ऑफ अमेरिका के दफ्तर पर बम हमले की कोशिश नाकाम हुई थी, जिसके बाद संवेदनशील जगहों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई।
पुलिस प्रमुख ने आगे कहा, “यह फैसला ऐसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय माहौल को देखते हुए लिया गया है, जिसमें तनाव काफी बढ़ा हुआ है। आने वाले दिनों में सड़कों पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहेगा।” कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि छोटे-मोटे दक्षिणपंथी समूह घटना को बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं।
मुस्लिम संगठन की प्रतिक्रिया
संगठन के नेता मखलूफ मामेचे ने रोक की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि संगठन इस फैसले के खिलाफ कानूनी अपील करेगा। फ्रांस लंबे समय से सख्त धर्मनिरपेक्ष नीति (सेकुलरिज्म) अपनाए हुए है। यहां सार्वजनिक जगहों पर हिजाब, बुर्का और निकाब पर पहले से ही पाबंदियां हैं। सरकार का मानना है कि ऐसे बड़े जमावड़े सुरक्षा जोखिम बढ़ा सकते हैं, खासकर जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव हो।
पेरिस पुलिस ने साफ किया कि यह रोक सिर्फ इस खास कार्यक्रम पर है, जो ले बॉर्गेट केंद्र में होनी थी। पूरे पेरिस क्षेत्र में मुसलमानों के हर तरह के इकट्ठे होने पर सामान्य रोक नहीं लगाई गई है। यह घटना फ्रांस में मुस्लिम समुदाय और सरकार के बीच चल रही संवेदनशील स्थिति को दिखाती है। एक तरफ सुरक्षा की चिंता है, दूसरी तरफ समुदाय बड़े आयोजन के जरिए एकजुटता दिखाना चाहता है।

















