देश में एलपीजी गैस की कीमतों में लगातार हो रहे बदलाव आम उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। इस महीने की शुरुआत में जहां कमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में इजाफा किया गया, वहीं मार्च महीने में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। इसका सीधा असर आम लोगों के बजट पर पड़ रहा है, खासकर उन परिवारों पर जो रसोई गैस पर निर्भर हैं।
एलपीजी कीमतों में अंतर- अगर अलग-अलग शहरों में एलपीजी की मौजूदा कीमतों पर नजर डालें, तो यह साफ होता है कि राज्यों और शहरों के हिसाब से दरों में अंतर देखने को मिलता है। उदाहरण के लिए, लखनऊ में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत ₹950.50 है, जबकि मेरठ और नोएडा में यह ₹910.50 के आसपास है। दिल्ली में सिलेंडर ₹913 में मिल रहा है, वहीं मुंबई में इसकी कीमत ₹912.50 है। दूसरी ओर, पटना (₹1002.5), दरभंगा (₹1010) और श्रीनगर (₹1029) जैसे शहरों में कीमतें 1000 रुपये के पार पहुंच चुकी हैं, जो उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ा आर्थिक बोझ है।
कीमतों पर वैश्विक और स्थानीय कारणों का असर- कीमतों में यह अंतर कई कारणों से होता है, जिनमें परिवहन लागत, स्थानीय टैक्स और सप्लाई चेन से जुड़े पहलू शामिल हैं। छोटे और दूरदराज के शहरों में गैस पहुंचाने की लागत अधिक होने के कारण वहां कीमतें ज्यादा होती हैं। इसी बीच, पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर भी ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा प्रभाव भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ता है। ऐसे में सरकार वैकल्पिक उपायों पर जोर दे रही है ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।
इसी दिशा में केंद्र सरकार ने पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) के विस्तार को तेजी से लागू करने के निर्देश दिए हैं। हाल ही में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में राज्यों और शहरी स्थानीय निकायों से कहा गया है कि वे शहरों में पाइपलाइन बिछाने के काम को प्राथमिकता दें और जल्द से जल्द मंजूरी प्रदान करें। इसके लिए तीन सप्ताह के भीतर एक विस्तृत कार्य योजना तैयार करने को कहा गया है, जिसमें वार्ड स्तर तक के लक्ष्य और समयसीमा तय की जाए। सरकार का मानना है कि पीएनजी के विस्तार से न केवल गैस की उपलब्धता आसान होगी, बल्कि यह एलपीजी सिलेंडर पर निर्भरता भी कम करेगा। खासकर बहुमंजिला आवासीय सोसायटियों और उन क्षेत्रों में जहां पहले से पाइपलाइन का ढांचा मौजूद है, वहां इस योजना को तेजी से लागू करने पर जोर दिया जा रहा है। करीब 30 लाख लंबित घरेलू कनेक्शनों को जल्द चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, राज्यों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे जिला और शहर स्तर पर निगरानी टीमों का गठन करें, ताकि योजना का प्रभाकिया जा सके।

















