भुवनेश्वर: ओडिशा के कंधमाल जिले में सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता मिली है, जहां उन्होंने माओवादियों की एक बड़ी हिंसक साजिश को नाकाम कर दिया। दारिंगबाड़ी थाना क्षेत्र के एक घने जंगल में स्थित गुफा से भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है।
विश्वसनीय खुफिया सूचनाओं के आधार पर स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और डिस्ट्रिक्ट वॉलंटरी फोर्स (DVF) ने संयुक्त रूप से पकारी, बाबुति, जमाबाड़ी और माटाबारी गांवों के आसपास बड़े पैमाने पर एंटी-नक्सल अभियान शुरू किया। 30 मार्च को चलाए गए सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों को माटाबारी गांव के निकट एक गुप्त गुफा का पता चला, जिसका इस्तेमाल माओवादी हथियार और रसद सामग्री छिपाने के लिए कर रहे थे।
बरामद सामग्री में कुल 10 हथियार शामिल हैं, जिनमें एक एसएलआर राइफल, एक .303 राइफल, दो 12-बोर बंदूकें, दो एसबीजीएल राइफल और एक देशी बंदूक शामिल है। इसके अलावा दो मैगजीन और 79 राउंड जिंदा कारतूस भी बरामद किए गए हैं। सुरक्षा बलों ने 10 एसबीजीएल ग्रेनेड, 30 इलेक्ट्रिक डेटोनेटर और ‘कोडेक्स’ नामक विस्फोटक सामग्री भी जब्त की है, जिससे संकेत मिलता है कि माओवादी बड़े पैमाने पर हिंसक गतिविधि की तैयारी में थे।

इसके अतिरिक्त, मौके से पांच वॉकी-टॉकी, तीन सोलर पैनल, दो टॉर्चलाइट, खाद्य सामग्री (चावल और दाल), दवाइयां, बर्तन और माओवादी साहित्य भी बरामद किया गया है। पुलिस का मानना है कि इस हथियारों के जखीरे का उपयोग क्षेत्र में विध्वंसक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया जाना था। इस बड़ी बरामदगी के बाद सुरक्षा बलों ने आसपास के जंगलों में सर्च ऑपरेशन को और तेज कर दिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस क्षेत्र में अभी भी करीब नौ माओवादी सक्रिय हैं, जिनमें दो पुरुष और सात महिलाएं शामिल हैं। माओवादी नेता शीला पर 27 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया है, और उसके इस क्षेत्र में सक्रिय होने की आशंका है।
कंधमाल के पुलिस अधीक्षक हरीश बिशी ने पुष्टि की कि राइकिया और दारिंगबाड़ी थाना क्षेत्रों के जंगलों में व्यापक एंटी-माओवादी अभियान जारी है। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन में 28 टीमों को तैनात किया गया है। “हमें सूचना मिली थी कि माओवादियों ने जंगल में हथियारों का बड़ा जखीरा छिपा रखा है। इसी आधार पर SOG और DVF की संयुक्त टीमों ने तलाशी अभियान चलाया और माटाबारी के पास यह बड़ी सफलता हासिल की,” उन्होंने कहा। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ओडिशा अब माओवादी प्रभाव से लगभग मुक्त होने की कगार पर है। एंटी-नक्सल ऑपरेशन के प्रभारी अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक संजीब पांडा ने बताया कि लगातार चल रहे अभियानों के कारण राज्य में माओवादी गतिविधियों में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने जानकारी दी कि राज्य के आठ जिलों को पहले ही माओवादी मुक्त घोषित किया जा चुका है, जबकि 2025 में नौ जिले प्रभावित थे।
आंकड़ों के अनुसार, 2025 से 2026 के बीच सुरक्षा बलों ने 27 माओवादियों को मार गिराया, 120 ने आत्मसमर्पण किया और नौ को गिरफ्तार किया गया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस लंबे संघर्ष की कीमत काफी भारी रही है। अब तक 239 सुरक्षाकर्मी मुठभेड़ों में शहीद हुए हैं, जबकि माओवादी हिंसा में 359 नागरिकों की जान गई है। संजीब पांडा ने कहा कि यह सफलता सुरक्षा बलों के निरंतर प्रयास और उनके बलिदान का परिणाम है। “हमारा लक्ष्य काफी हद तक हासिल हो चुका है और अब केवल कुछ ही माओवादी सक्रिय बचे हैं,” उन्होंने कहा। उन्होंने माओवादियों से आत्मसमर्पण करने की अपील भी की है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि यदि शेष माओवादी आत्मसमर्पण नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, घने जंगलों में सघन सर्च ऑपरेशन जारी है, जो ओडिशा में माओवादी उग्रवाद के खिलाफ अंतिम चरण की लड़ाई को दर्शाता है और राज्य को स्थायी शांति एवं स्थिरता की ओर अग्रसर कर रहा है।











