भारत में हनुमान जी का प्रकटोत्सव हिन्दू समाज के लिए आस्था, ऊर्जा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। किंतु बीते कुछ वर्षों में इस पावन अवसर के साथ जुड़ी अनेक कट्टरपंथी इस्लामी हिंसा से जुड़ी घटनाएं चिंता का विषय बनकर उभरी हैं। अलग-अलग राज्यों और स्थानों से सामने आई घटनाओं, सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट और प्रशासनिक तैयारियों को समग्र रूप से देखने पर एक व्यापक प्रवृत्ति सामने आती है, जिसे गंभीरता से समझने और संबोधित करने की आवश्यकता है। यही शासन-प्रशासन सचेत रहा तो इस बार इन हिंसक घटनाओं को घटने से रोका जा सकता है, अन्यथा आसन्न संकट हमारे सामने खड़ा है।
हाल की सबसे महत्वपूर्ण घटना राजधानी दिल्ली से सामने आई है, जहां हनुमान जयंती के अवसर पर संभावित आतंकी साजिश का खुलासा हुआ। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा पकड़े गए आतंकवादी ‘शब्बीर अहमद लोन’ ने पूछताछ में यह बताया कि धार्मिक स्थलों, मंदिरों और भीड़भाड़ वाले जुलूसों को निशाना बनाने की योजना बनाई गई थी। इसके बाद दिल्ली में हाई अलर्ट घोषित किया गया और मंदिरों, जुलूस मार्गों तथा संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
इसके साथ ही पुलिस ने जुलूसों में शामिल लोगों की संख्या सीमित करने और हथियारों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने जैसे एहतियाती कदम उठाए हैं। यह घटना स्पष्ट संकेत देती है कि हिन्दू त्योहारों के दौरान जिहादी खतरे वास्तविक हैं और उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यदि हम हाल के वर्षों की घटनाओं का विश्लेषण करें, तो 2022 से 2025 के बीच कई स्थानों पर हनुमान जयंती के दौरान हिंसक झड़पें और पथराव की घटनाएँ सामने आई हैं। वर्ष 2025 में मध्य प्रदेश के गुना जिले में हनुमान जयंती शोभायात्रा पर मस्जिद के पास से गुजरते समय पत्थरबाजी हुई। इस घटना में कई श्रद्धालु घायल हुए और कुछ रिपोर्ट्स में फायरिंग की भी बात सामने आई। प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए ताजिया कमेटी के अध्यक्ष सहित कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। इस घटना में हनुमान बना युवा किसी तरह से अपनी जान बचा पाया था।
जहांगीरपुरी में शोभायात्रा के दौरान विवाद
इसी प्रकार वर्ष 2022 में दिल्ली के जहांगीरपुरी क्षेत्र में हनुमान जयंती शोभायात्रा के दौरान विवाद हुआ, जिसमें तलवारें और पिस्तौल लहराने, नारेबाजी और मस्जिद के पास से गुजरने को लेकर तनाव बढ़ा और हिंसा भड़काई गई। इस घटना में इस्लामवादियों ने पुलिसकर्मियों सहित कई लोगों को बुरी तरह से घायल किया था। बाद में अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के दौरान कई ढाँचों को हटाया गया, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप भी किया। यह घटना इस बात का उदाहरण है कि कैसे जिहादी तत्व हिन्दू त्यौहारों के आनंद को कष्ट में बदल रहे हैं।
गाजियाबाद की घटना
मार्च 2026 में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में हनुमान चालीसा बजाने को लेकर विवाद के बाद एक हिंदू परिवार के साथ मारपीट की घटना सामने आई, जिसमें पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया। वहीं अप्रैल 2025 में मध्य प्रदेश के पन्ना में शोभायात्रा के दौरान मांस के टुकड़े फेंके जाने की घटना ने भी तनाव को जन्म दिया। ये सिर्फ भारत में ही नहीं हुआ है, पड़ोसी देशों में भी ऐसी घटनाएँ देखने को मिली हैं। नेपाल के बीरगंज में 12 अप्रैल को पिछले साल हनुमान जयंती जुलूस पर हमला हुआ, जिसमें पत्थरबाजी और आगजनी की घटनाएँ सामने आईं। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि प्रशासन को कर्फ्यू लगाना पड़ा और पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा।
झारखंड में शोभायात्रा पर पथराव
झारखंड के हजारीबाग में भी हनुमान जयंती शोभायात्रा पर मस्जिद के पास से गुजरते समय पथराव और वाहनों में आग लगाने की घटना को अंजाम देने इस्लामवादी बड़ी संख्या में आए। इसी प्रकार मध्य प्रदेश के गुना में 12 अप्रैल 2025 को रात के समय जुलूस पर हमला हुआ, जिसमें एक जनप्रतिनिधि के परिवार के सदस्य सहित कई लोग घायल हुए।
हिंदू त्योहार बन रहे निशाना
यदि व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखें, तो यह जिहादी हिंसा सिर्फ हनुमान जयंती तक सीमित नहीं है। अन्य हिंदू त्योहारों जैसे होली, रामनवमी, जन्माष्टमी, सरस्वती पूजा और दुर्गा पूजा के दौरान भी विभिन्न स्थानों पर झड़पों और विवादों की घटनाएँ सामने आई हैं। उदाहरण के लिए, फरवरी 2026 में उत्तराखंड के जसपुर में शिवरात्रि के दौरान कांवड़ यात्रा पर कूड़ा फेंके जाने की घटना हुई, जबकि अमरोहा में कांवड़ियों पर पत्थरबाजी की खबर आई। इसी तरह 2025 में केरल के कोझिकोड और तेलंगाना के भाग्यनगर (हैदराबाद) में जन्माष्टमी के जुलूसों पर हमले की घटनाएँ सामने आईं।
सरस्वती पूजा के दौरान पथराव
जनवरी 2026 में बिहार के वैशाली जिले में सरस्वती पूजा विसर्जन जुलूस के दौरान रास्ते को लेकर विवाद हुआ और पथराव की घटना हुई। वहीं 2024 में दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में दीपावली मनाने के दौरान छात्रों के बीच टकराव की घटना सामने आई। इसके अतिरिक्त महाराष्ट्र के बुलढाणा, उत्तर प्रदेश के रायबरेली और पश्चिम बंगाल के बीरभूम जैसे स्थानों पर भी विभिन्न त्योहारों के दौरान इस्लामवादियों की हिंसक घटनाएँ दर्ज की गई हैं।
इन सभी घटनाओं का समग्र विश्लेषण यह बताता है कि जिहादी तत्व धार्मिक शोभायात्रा एवं हिंदुओं के आनन्द को सहन नहीं कर पा रहे हैं। अक्सर यह देखा गया है कि जब जुलूस किसी अन्य समुदाय (मुसलमान) के मजहबी स्थल के पास से गुजरता है, तो छोटी-सी बात को भी विवाद का रूप दे दिया जाता है। अब समाधान के रूप में प्रशासन द्वारा उठाए जा रहे कदम महत्वपूर्ण हैं, जैसे कि संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, जुलूस मार्गों का पूर्व निर्धारण, पुलिस बल की तैनाती और सीसीटीवी निगरानी। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर दोनों समुदायों के बीच संवाद और समन्वय भी अत्यंत आवश्यक है।
अब एक बार फिर हनुमान जयन्ती आ गई है, यही समय है जब प्रशासनिक सतर्कता, सामाजिक जिम्मेदारी और नागरिक जागरूकता मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य में ऐसे पावन अवसर केवल उत्सव और उल्लास के प्रतीक बनें, न कि विवाद और हिंसा के, इसलिए शासन-प्रशासन से बहुत अलर्ट रहने की अपेक्षा है।

















