नक्सलवाद मुक्त भारत: 59 साल से बना था चुनौती, कांग्रेस रही असफल- मोदी सरकार 'लाल आतंक' को खत्म करने में हुई सफल
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नक्सलवाद मुक्त भारत: 59 साल से बना था चुनौती, कांग्रेस रही असफल- मोदी सरकार ‘लाल आतंक’ को खत्म करने में हुई सफल

संसद में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि राहुल गांधी अपने लंबे करियर में नक्सलों और नक्सल समर्थकों के साथ देखे गए हैं। भारत जोड़ो यात्रा में कई नक्सल फ्रंट जुड़े थे।

Written byLalit FularaLalit Fulara
Mar 30, 2026, 09:17 pm IST
in भारत
प्रतीकात्मक चित्र

प्रतीकात्मक चित्र

नई दिल्ली: लोकसभा में नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश में नक्सलवाद अब लगभग समाप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि अब आदिवासी इलाकों में असली न्याय पहुंचा है। यह बदलाव अचानक नहीं आया बल्कि 2014 के बाद केंद्र सरकार की सख्त नीति, सुरक्षा अभियान और विकास योजनाओं के कारण संभव हुआ है। यूपीए सरकार के समय नक्सलवाद को बढ़ावा मिला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को देश को जवाब देना होगा कि नक्सलवाद के दौर में क्या हुआ?नक्सलवाद गरीबी से नहीं, बल्कि विचारधारा से पैदा हुआ। यह विचारधारा लोकतंत्र में विश्वास नहीं करती और बंदूक के जरिए सत्ता चाहती है। आदिवासियों को बरगलाकर उनके हाथ में हथियार दिए गए और विकास को रोका गया।

राहुल गांधी नक्सलों और नक्सल समर्थकों के साथ देखे गए…
उन्होंने कहा कि अब देश बंदूक से नहीं, संविधान से चलेगा और यही असली जीत है। संसद में शाह ने कहा कि राहुल गांधी अपने लंबे करियर में नक्सलों और नक्सल समर्थकों के साथ देखे गए हैं। भारत जोड़ो यात्रा में कई नक्सल फ्रंट जुड़े थे। इसके रिकॉर्ड मौजूद हैं। 2018 में हैदराबाद में घुमांडी विट्ठल राव, राहुल ने उस गद्दार से मुलाकात की। 2025 कॉर्डिनेशन कमेटी ऑफ पीस के साथ मुलाकात की। हिडमा जब मारा गया, तब इंडिया गेट पर कितने हिडमा मारोगे, हर घर से हिडमा निकलेगा के नारे लगे। इन नारों के वीडियो को राहुल गांधी ने खुद पोस्ट किया है। नक्सलों का समर्थन करते-करते एक पार्टी और उसके नेता खुद नक्सलवादी बन गए हैं।

वामपंथियों ने सींचा और कांग्रेस ने ‘लाल आतंक’ को वैचारिक समर्थन दिया
नक्सलवाद पिछले छह दशक से देश के लिए बड़ी आंतरिक चुनौती बना हुआ था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2024 के मध्य में छत्तीसगढ़ में हुई कुछ बैठकों में 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के अंतिम दिन के तौर पर तय करने का प्रण लिया था। इसके बाद से ओडिशा से लेकर छत्तीसगढ़ और झारखंड से लेकर आंध्र प्रदेश तक न सिर्फ नक्सली नेतृत्व को ध्वस्त किया गया, बल्कि कैडर के कैडर का सफाया कर दिया गया। 1967 में क्रांति के नाम पर शुरु हुआ लाल आतंक का अब देश से सफाया हो गया है। इस लाल आतंक ने हजारों-लाखों लोगों का रक्त बहाया। वामपंथियों ने इसे अपने विचार से सींचा और कांग्रेस ने इसे वैचारिक समर्थन दिया। 2010 के दंतेवाड़ा नक्सल हमले में 76 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। यूपीए सरकार इस लाल आतंक पर लगान लगाने में असफल रही लेकिन बीजेपी सरकार ने इसे जड़ से खत्म करने का प्रण लिया था और आखिर में सुरक्षाबलों ने नक्सलियों को या तो मार गिराया या फिर सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया। एक समय नक्सलवाद बड़े-छोटे स्तर पर 10 राज्यों तक फैला था। उस दौर में इस लाल आतंक ने भारत में कम से कम 180 जिलों को प्रभावित किया था।

सरकारी रिकॉर्ड्स के मुताबिक, 2004 से 2014 के बीच नक्सली हिंसा की 16,463 घटनाएं दर्ज की गईं। इस दौरान नक्सल हमलों में 1,851 सुरक्षाकर्मियों की जान जाने का भी रिकॉर्ड है। इसी समय में 4,766 आम लोगों की भी जान गई। 2014 में जब मोदी सरकार बनी तो केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ मिलकर एक एकीकृत, बहुआयामी और निर्णायक रणनीति तैयार की। जिसमें नक्सलियों को बड़े पैमाने पर चुन-चुनकर मारा गया और जो बचे थे उन्होंने सरेंडर कर दिया। बताया जाता है कि गृह मंत्री अमित शाह ने खुद  केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और राज्य की पुलिस इकाइयों के बीच बेहतरीन तालमेल की निगरानी की।
नक्सली कमांड को खत्म करने के लिए  केंद्र-राज्य टास्क फोर्स ने मिलकर काम किया और अभी भी कर रही हैं। ड्रोन तथा सैटेलाइट मैपिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर बड़े नक्सली कमांडरों को चुन-चुनकर मारा गया।

गृहमंत्री अमित शाह बोले- नक्सलवाद के दौर में कांग्रेस ने जो किया उसका देश को देना होगा जवाब
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि देश अब नक्सलमुक्त होने की स्थिति में पहुंच चुका है। कई बड़े ऑपरेशन जैसे बुढ़ा, थंडरस्टॉर्म और ब्लैक फॉरेस्ट चलाए गए जिनमें भारी मात्रा में हथियार, आईईडी फैक्ट्री और अनाज बरामद हुआ।  छत्तीसगढ़, तेलंगाना और ओडिशा के बड़े इलाके अब नक्सल प्रभाव से बाहर आ चुके हैं।  आजादी के समय देश संसाधनों की कमी और विकास की चुनौतियों से जूझ रहा था। कई दूर-दराज के इलाकों तक सरकार की पहुंच नहीं थी, सड़कों और सुविधाओं का अभाव था। ऐसे हालात में कुछ संगठनों ने इन कमजोरियों का फायदा उठाया। जहां राज्य की पकड़ कम थी, उन्हीं इलाकों को रेड कॉरिडोर बनाया गया। भोले-भाले आदिवासियों को भेदभाव और शोषण के नाम पर भड़काया गया और उनके हाथों में हथियार थमा दिए गए। हकीकत यह है कि इन क्षेत्रों में योजनाबद्ध भेदभाव नहीं, बल्कि विकास की कमी थी, जिसका इस्तेमाल कर हिंसा को बढ़ावा दिया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को देश को जवाब देना होगा कि नक्सलवाद के दौर में उन्होंने क्या किया और क्या हुआ?

Topics: Home Minister Amit ShahLeftist IdeologyNaxalism free IndiaNaxalite movementBJP government successful in eliminating NaxalismCongress promoted Naxalism
Lalit Fulara
Lalit Fulara
उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले के सुदूर स्थित छोटे से गाँव 'पटास' में पैदाइश. कला-साहित्य में विशेष रुचि. पहला नॉवेल 'घासी: लाल कैंपस का भगवाधारी' प्रकाशित. विगत 12 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय. करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से हुई और उसके बाद ज़ी न्यूज़, न्यूज़18, राजस्थान पत्रिका, अमर उजाला और इंडियाडॉटकॉम होते हुए वर्तमान में पांचजन्य डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. पत्रकारिता में एम.ए माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के नोएडा कैंपस से किया है. [Read more]
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