अमेरिका और इजरायल ने जब 28 फरवरी 2026 को ईरान पर हमला किया था, उसी दिन एक बात स्पष्ट हो गई थी कि ट्रंप जैसा स्वार्थी इंसान बिना किसी स्वार्थ के तो अपने संसाधनों को खर्च नहीं करेगा। अब खुद ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि वो ईरान के तेल पर कब्जा करना चाहते हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने कहा है कि अमेरिका खार्ग द्वीप को भी ले सकता है, जो ईरान का मुख्य तेल निर्यात केंद्र है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव बढ़ रहा है और तेल की कीमतें तेजी से ऊपर जा रही हैं।
क्या है ट्रंप का बयान
डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा, “मैं ईमानदारी से कहूं तो ईरान का तेल लेना मेरी सबसे पसंदीदा बात है।” उन्होंने खार्ग द्वीप के बारे में बताया कि शायद हम इसे ले लें, शायद नहीं। हमारे पास कई विकल्प हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर द्वीप पर कब्जा करना पड़ा तो वहां कुछ समय तक अमेरिकी ताकतों को रहना पड़ेगा। उनका कहना है कि उन्होंने ईरान की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर बताया और कहा कि इसे आसानी से लिया जा सकता है।
ट्रंप ने वेनेजुएला का उदाहरण दिया, जहां अमेरिका ने नेता को पकड़ने के बाद तेल उद्योग पर अनिश्चितकाल के लिए नियंत्रण रखने की योजना बनाई थी। घरेलू आलोचना पर उन्होंने कहा कि यह “बेवकूफ लोग” कर रहे हैं। ट्रंप ने साथ ही यह भी बताया कि कोई सौदा जल्दी हो सकता है।
खार्ग द्वीप का महत्व
खार्ग द्वीप ईरान का सबसे बड़ा तेल निर्यात हब है। इसके जरिए ईरान का ज्यादातर कच्चा तेल बाहर जाता है। दुनिया के ऊर्जा संसाधनों के लिहाज से यह जगह बहुत अहम है। अगर यहां कोई कार्रवाई होती है तो पूरा इलाका और ज्यादा उलझ सकता है।
मिडिल ईस्ट में तेजी से सैन्य तैनाती कर रहा अमेरिका
अमेरिका इस समय मध्य पूर्व में सैनिक बढ़ा रहा है। पेंटागन ने करीब 10,000 सैनिकों को भेजने का आदेश दिया है, जिनमें मरीन्स और 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के जवान शामिल हैं। कई हजार सैनिक वहां पहुंच भी चुके हैं। ये जवान जमीनी कार्रवाई के लिए तैयार हैं। पिछले एक महीने में तेल की कीमतें 50 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गई हैं। सोमवार को एशियाई बाजार में ब्रेंट क्रूड 116 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया था। यह उस स्तर के करीब है जो संघर्ष शुरू होने के बाद देखा गया था।
विश्लेषकों की चेतावनी
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर खार्ग द्वीप पर कब्जे की कोशिश की गई तो संघर्ष बहुत बढ़ सकता है। इसमें अमेरिकी सैनिकों के नुकसान की आशंका ज्यादा होगी और युद्ध लंबा व महंगा हो जाएगा। खार्ग द्वीप पर लंबे समय तक अमेरिकी मौजूदगी की जरूरत पड़ सकती है। कुल मिलाकर ये सारा कुछ तेल का खेल है।

















