यूं तो बीबीसी और विवादों का बहुत पुराना नाता है। भारत और हिंदुओं को लेकर उसकी जो भी रिपोर्टिंग होती है, वह भी प्राय: नकारात्मक ही होती है। अभी उसकी जिस हरकत पर सोशल मीडिया में हंगामा मचा है और उसे स्पष्टीकरण देना पड़ा है, वह अवैध शरणार्थियों से जुड़ा मामला है।
क्या है मामला?
बीबीसी के एक ड्रामा सीरीज The Capture को लेकर यह विवाद है। इस बार सीजन 3 आ रहा है और इसको लेकर आरोप है कि वह प्रोपोगेंडा फैला रहा है। यह उन (Undocumented Migrants) शरणार्थियों को लेकर है जिनके पैस दस्तावेज नहीं है। कहा जा रहा है कि इनके प्रति दक्षिणपंथी एजेंडा चलाते हैं।
दरअसल, इंग्लैंड में जो भी ऐसे अवैध शरणार्थी आ रहे हैं (समुद्र के रास्ते से) उनमें अधिकतर 40 साल तक के पुरुष होते हैं। बच्चे और महिलाएं बहुत ही कम होती हैं। इसलिए कई वर्षों से ऐसे लोगों के अपने देश आने का विरोध करने वाले लोगों की शिकायत इसी बात को लेकर होती है कि आखिर देश में शरण लेने के लिए मध्य आयु वाले पुरुष ही क्यों आ रहे हैं? इन नावों में बच्चे क्यों नहीं होते हैं?
ये प्रश्न सोशल मीडिया पर लोग लगातार उठाते हैं। इस सीरीज में भी राइट विंग वाले लोगों के यही प्रश्न हूबहू चरित्रों से बुलवाए हैं। gb न्यूज के अनुसार वीडियो में जेम्स नामक चरित्र अपने फॉलोअर्स से कह रहा है कि इतिहास की किताबें बताती हैं कि इंग्लैंड पर जमीन के रास्ते आखिरी हमला 1066 में हुआ था। एक व्यक्ति का कहना है कि “असल में, इंग्लैंड पर जमीन के रास्ते आखिरी हमला कल सुबह 9:45 बजे हुआ था, जब 40 बिना दस्तावेज वाले पुरुष प्रवासियों को लेकर एक नाव केंट के डंगेनेस में उतरी थी।”
गौरतलब है कि ऐसे ही तर्क सोशल मीडिया पर वे लोग देते रहते हैं, जो इन प्रवासियों का विरोध करते हैं। उस क्लिप मे आगे कहा गया है कि तो, ये 40-चार-शून्य-लड़ने की उम्र वाले, अवैध, पुरुष प्रवासी हैं। जमीन पर किया गया आक्रमण युद्ध का ही एक कार्य है। और युद्ध में, नागरिकों को भी पलटवार करने की अनुमति होती है।“ फिर उसमें कहा गया है कि “हमें लड़ने की जरूरत है और अगली बार जब युद्ध लड़ने वाले युवाओं की नाव इस देश की जमीन पर आएगी तो हम तैयार रहेंगे।“ इसके साथ ही एक वीडियो एक्स पर वायरल है, जिसमें यह दिखाया गया है कि एक अंग्रेज व्यक्ति नाव पर आ रहे लोगों पर निशाना साध रहा है और उसमें वह एक बच्चे पर निशाना साध रहा है।
🚨BBC DROPS NEW ADOLESCENCE
This time the illegal migrants raping little girls are not the bad guys
But an Englishman who is angry about migration turns out to be a child murderer
This is from 'The Capture'
Defund the BBC
They're awful pic.twitter.com/1PnSEe95y0— Basil the Great (@BasilTheGreat) March 23, 2026
इस वीडियो को लेकर लोगों के दिलों में गुस्सा है। लोग कह रहे हैं कि बीबीसी यह तो नहीं दिखा रहा है कि कैसे नाव में बैठकर आने वाले ये लोग श्वेत लड़कियों और बच्चियों के साथ यौन हिंसा कर रहे हैं, और लड़कियों की हत्याएं कर रहे हैं, बल्कि उसके स्थान पर यह दिखा रहा है कि नाव पर बैठे बच्चों पर श्वेत व्यक्ति गोली चला रहा है।
रिफॉर्म यूके के नेताओं सहित राजनेताओं ने की आलोचना
इस सीरीज के इन दृश्यों को लेकर बीबीसी की आलोचना हो रही है। इनमें राजनेताओं से लेकर पत्रकार तक शामिल हैं। रिफॉर्म यूके के चेयरमैन जिया यूसुफ ने जहां इसकी आलोचना की है तो वहीं जिहादी मानसिकता का सामना करने वाले तमाम स्वतंत्र पत्रकारों ने इस सीरीज की निंदा की है। लोग कह रहे हैं कि बीबीसी को अपनी गलती माननी चाहिए। नाव से जो भी लोग आते हैं, उनमें बच्चे और महिलाएं नहीं होती हैं और आज तक किसी भी ऐसी नाव पर हमला किसी ने किया ही नहीं है, जिसमें अवैध प्रवासी इंग्लैंड की भूमि पर शरण लेने आ रहे हैं।
लोग प्रश्न कर रहे हैं कि सत्यता से विपरीत कैसे कोई सीरीज बन सकती है? इस शो की कहानी यह है कि इसमें सूचना की स्वतंत्रता को चरमपंथ के संकेत के रूप में दिखाया गया है। एक अधिकारी प्रवासियों के आंकड़े लेकर दस्तावेज लेता है और वह ऐसा नौ अलग-अलग सूचना अनुरोधों के माध्यम से करता है।
परंतु बीबीसी ने खलनायक बना दिया
लोग कह रहे हैं कि जहां बीबीसी को यह दिखाना चाहिए था कि कैसे सरकार ये आंकड़े छिपा रही है कि कितने लोगों ने अवैध रूप से शरण ली और कैसे ये लोग आकर अपराध बढ़ा रहे है, परंतु बीबीसी ने सूचना के अधिकार को ही ऐसा खलनायक बनाकर प्रस्तुत कर दिया है, जिसका सहारा आम लोग इंग्लैंड के इस्लामीकरण को साबित करने के लिए कर रहे हैं।
हालांकि बीबीसी ने अपने एक बयान में कहा है कि इस सीरीज पर विवाद नहीं होना चाहिए क्योंकि यह एक काल्पनिक कार्य है, इसका वास्तविकता से लेना-देना नहीं है। बीबीसी के प्रवक्ता के अनुसार “यह एक काल्पनिक नाटक है और जेम्स व्हिटलॉक का किरदार किसी भी वास्तविक व्यक्ति पर आधारित नहीं है।“ परंतु यह बहुत खतरनाक तथ्य है कि जो अधिकार आम लोगों को सशक्त कर रहा है, उसे ही खलनायक बना दिया जाए।













