अमेरिका में जब से डोनाल्ड ट्रंप दूसरी बार राष्ट्रपति बनें हैं, तभी से वो ऐसी नीतियां अपना रहे हैं, जिसके चलते अमेरिका को नुकसान ही हुआ है। वो टैरिफ को हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे अमेरिका में महंगाई बढ़ी है। यहीं नहीं उन्होंने वेनेजुएला जैसे संप्रभु देश पर कब्जा कर लिया और ईरान पर भी हमले कर रहे हैं। इन सब के बीच उनकी लोकप्रियता में तेजी से गिरावट आई है। अब उनकी मनमानियों के खिलाफ अमेरिका और यूरोपीय देशों में ‘नो किंग्स अपराइजिंग’ नाम का एक बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ।
इस प्रदर्शन में हजारों की संख्या लोग सड़कों पर उतरे। इसका आयोजन इंडिविजिबल ग्रुप ने किया था। लोगों ने मुख्य रूप से ईरान में चल रही जंग, सख्त इमिग्रेशन नियमों और ट्रांसजेंडर अधिकारों में कटौती का विरोध किया।
अमेरिका में कहाँ-कहाँ हुए प्रदर्शन
केवल अमेरिका की ही बात करें तो यह प्रदर्शन देशभर के 50 राज्यों में 3,000 से ज्यादा जगहों पर हुए। इनमें मिनेसोटा में सेंट पॉल के कैपिटल लॉन पर फ्लैगशिप इवेंट हुआ। यहां बॉस स्प्रिंगस्टीन ने परफॉर्म किया और आईसीई एजेंट्स द्वारा हुई दो मौतों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मिनेसोटा का रेसिस्टेंस बाकी देश को उम्मीद दे रहा है। इसी तरह सैन डिएगो में पुलिस के मुताबिक करीब 40,000 लोग जमा हुए। वॉशिंगटन डीसी में सैकड़ों लोग लिंकन मेमोरियल से नेशनल मॉल तक पहुंचे। न्यूयॉर्क, लॉस एंजिल्स और कई दूसरे शहरों में भी रैलियां हुईं। लॉस एंजिल्स में फेडरल डिटेंशन सेंटर के पास पुलिस ने टीयर गैस इस्तेमाल किया और कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया।
विदेशों में प्रदर्शन
यूरोप में भी कई जगह प्रदर्शन हुए। रोम में हजारों लोग सड़कों पर निकले। वहां इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के खिलाफ भी नारे लगे। लंदन में “स्टॉप द फार राइट” और “स्टैंड अप टू रेसिज्म” जैसे बैनर दिखे। पेरिस में बस्तील के पास कुछ सौ लोग जमा हुए, ज्यादातर अमेरिकी रहने वाले थे। लेबर यूनियन्स और मानवाधिकार संगठन भी शामिल हुए। इस तरह के प्रदर्शन करीब 12 से ज्यादा देशों में हुए।
प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों ने “पुट डाउन द क्राउन, क्लाउन” और “रेजीम चेंज बिगिन्स एट होम” जैसे नारे लगाए। विदेशों में ईरान पर हमलों के खिलाफ बैनर थे।
वामपंथियों की हरकत
इस प्रदर्शन को लेकर व्हाइट हाउस की ओर से जारी किए गए बयान में उसके प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने इसे “लेफ्टिस्ट फंडिंग नेटवर्क” का हिस्सा बताया और कहा कि इसमें असली पब्लिक सपोर्ट कम है। रिपब्लिकन कमिटी की स्पोक्सपर्सन ने इसे “हेट अमेरिका रैलियां” कहा।











