असम और पश्चिम बंगाल में बदलती जनसंख्यिकी आने वाले समय में बहुत बड़ी समस्या खड़ी करती दिख रही हैं। निचले असम का इलाका जो बांग्लादेश से सटा हैं वहां की जनसांख्यिकी परिवर्तन ना सिर्फ असम के लिए बल्कि पूरे देश के लिए चिंता का सबब है। इस समस्या का आभास 1979 में ही होना शुरू हो गया था। यह नेहरू और कांग्रेस पार्टी की गलत नीतियों का प्रतिफल है जो आज देश एक सामने समस्या बनकर खड़ा है।
1979 में असम के मंगलदोई संसदीय सीट पर पुनर्मतदान के समय मात्र एक वर्ष में ही लगभग 47,000 मुस्लिम मतदाताओं की बढ़ोतरी ने बांग्लादेश से हो रही इस घुसपैठ के प्रति देश का ध्यान खींचा था। मुस्लिम घुसपैठ के कारण असम में चले आंदोलन और फिर केंद्र सरकार एवं असम आंदोलनकारियों के बीच 1985 में हुए समझौते के बाद यह मुद्दा न केवल असम के लिए बल्कि बांग्लादेश सीमा से सटी अन्य राज्यों सहित पूरे देश के लिए यह अहम सवाल बनकर सामने आया।
घुसपैठ को नजरअंदाज करती कांग्रेस
कांग्रेस पार्टी इस समस्या के प्रति जानबूझ कर अपने वोटबैंक की लालच में नज़रअंदाज करती रही। मगर असम आंदोलन और असम गण परिषद के उभार ने असम में इस समस्या को लम्बे समय तक संतुलित करके रखा था। मगर 2001 में तरुण गगोई की सरकार राज्य में बनने के साथ ही यह समस्या फिर से शुरू हो गई। अब भाजपा, अगप सहित स्थानीय दल जैसे बोडोलैंड पुपिल्स फ्रंट सहित कई दल अब इसके प्रति सजग होकर जनता को जागरूक करने के साथ ही सरकार के स्तर पर कार्रवाई कर रहे हैं, जिससे यह समस्या समाधान की ओर बढ़ता दिख रहा है।
देश की बदलती डेमोग्राफी
घुसपैठ के कारण सिर्फ असम ही नहीं बल्कि देश की जनसांख्यिकी का स्वरूप बदलता जा रहा है। 1961 से 2011 यानी इन पांच दशकों में देश में हिंदू जनसंख्या की वृद्धि दर 125.78 प्रतिशत तथा मुस्लिम जनसंख्या की वृद्धि दर 194.38 प्रतिशत रही। इस अवधि में देश की कुल जनसंख्या में औसतन मुस्लिम आबादी 3.54 प्रतिशत बढ़ी। वहीं इस दौरान असम में मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि दर 286.16 प्रतिशत रही तथा मुस्लिम आबादी 10.93 प्रतिशत बढ़ी। बंगाल में मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि दर 252.95 प्रतिशत रही और मुस्लिम आबादी 7.01 प्रतिशत बढ़ी। ओडिशा में हिंदू जनसंख्या वृद्धि दर 129.51 प्रतिशत तो मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि दर 323.40 प्रतिशत रही। झारखंड में भी हिंदू जनसंख्या वृद्धि दर 142.21 तो मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि दर 340.35 प्रतिशत रही।
बांग्लादेश से सटे जिलों में जनसंख्या विस्फोट
असम में मुस्लिम जनसंख्या विस्फोट से निचला असम इलाका के जिले जो बांग्लादेश की सीमा के समीप और उससे सटे हैं वहां अत्यधिक है। ये जिले बरपेटा, दर्रांग, बोंगईगांव, नगाँव, धुबरी, गोवालपारा हैं। इन जिलों के जनसंख्या वृद्धि का आकलन करे तो पाते हैं कि 2001 से 2011 कालखंड में जब तरुण गोगोई मुख्यमंत्री थे तब मुस्लिमों की संख्या में बेहताशा वृद्धि हुई थी। इसके पहले 1991 से 2001 के कालखंड में भी वृद्धि देखी गई थी, क्योंकि 1991 से 1996 तक असम में कांग्रेस पार्टी नीत सरकार थी।
1991 जनगणना में निचले असम की जिलावार हिन्दू और मुस्लिम जनसंख्या

2001 जनगणना में निचले असम की जिलावार हिन्दू और मुस्लिम जनसंख्या

2011 जनगणना में निचले असम की जिलावार हिन्दू और मुस्लिम जनसंख्या

असम के जनसांख्यिकी का असर पूरे राज्य के बदले निचले असम, जिसकी सीमा बांग्लादेश से लगती हैं और उसके समीप के इलाकों में ज्यादा दिख रहा है। असम में 2001 से 2011 के बीच 2438734 मुस्लिमों की संख्या में वृद्धि हुई। जिसमें इन इलाकों में 1297007 मुस्लिमों की संख्या में इजाफा हुआ था। यह कुल मुस्लिम जनसंख्या में वृद्धि का 53.18 प्रतिशत हैं। अगर 1991 से 2001 के बीच असम में जनसंख्या वृद्धि का आकलन करते हैं तो पाते हैं कि इस अवधि में असम में मुस्लिम आबादी में 1867407 लोगों की बढ़ोतरी हुई। इस अवधि में निचला असम और उसके सटे इलाको में 1154890 लोगों की बढ़ोतरी हुई जो राज्य के कुल मुस्लिमों की वृद्धि का 61.84 प्रतिशत इसी इलाके में था।

















