वॉशिंगटन, (हि.स.)। अमेरिका और ईरान में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख एक बार फिर बदलता नजर आया है। जहां कुछ दिन पहले उन्होंने युद्ध खत्म करने के लिए समझौते की संभावना जताई थी, वहीं अब उन्होंने इस पर अनिश्चितता जाहिर की है।
कैबिनेट बैठक के दौरान ट्रम्प ने गुरुवार को कहा, “मुझे नहीं पता कि हम समझौता कर पाएंगे या नहीं। वे (ईरान) लड़ाई में कमजोर हैं, लेकिन बातचीत में बहुत मजबूत हैं।” उनके इस बयान को दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक गतिरोध के संदर्भ में अहम माना जा रहा है।
मिशन के लिए चार से छह हफ्ते का समय तय किया
ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि अमेरिका ने युद्ध की शुरुआत में अपने मिशन के लिए चार से छह हफ्तों का समय तय किया था, लेकिन महज 26 दिनों में ही वह लक्ष्य से आगे निकल चुका है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान “सही समझौता” करता है, तो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सकता है।
इससे पहले ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ईरान के वार्ताकारों पर तंज कसते हुए उन्हें “अजीब” बताया था और चेतावनी दी थी कि उन्हें जल्द गंभीर होना होगा अन्यथा हालात और बिगड़ सकते हैं।
परमाणु हथियारों की वजह से किया हमला
राष्ट्रपति ने यह भी दोहराया कि अमेरिका ने पिछले वर्ष ईरान के परमाणु ठिकानों पर कार्रवाई इसलिए की थी क्योंकि ईरान कथित तौर पर कुछ ही हफ्तों में परमाणु हथियार हासिल करने के करीब था। उनके अनुसार, यदि ऐसा होता तो क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता था।
तनाव कम होने के संकेत नहीं
इससे पहले व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रम्प ने कहा था कि युद्ध रोकने के लिए “ईरान ही समझौते की गुहार लगा रहा है”, न कि अमेरिका। इन बयानों से साफ है कि दोनों देशों के बीच तनाव अभी कम होने के संकेत नहीं दिख रहे हैं और कूटनीतिक समाधान फिलहाल अनिश्चित बना हुआ है।

















