नई दिल्ली। दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने टेरर फंडिंग मामले में जम्मू- कश्मीर के आतंकवादी संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत की मुखिया आसिया अंद्राबी को उम्रकैद और उसके दो सहयोगियों को 30 वर्षों की सजा सुनाई है। स्पेशल जज चंदर जीत सिंह ने ये फैसला सुनाया।
कोर्ट ने 14 जनवरी को इन तीनों को राजद्रोह और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए साजिश रचने की धाराओं के तहत दोषी करार दिया था। कोर्ट ने आसिया अंद्राबी के अलावा उसके दो सहयोगियों सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी, 121, 121ए, 124ए, 153ए. 153बी और 505 के अलावा यूएपीए की धारा 18, 20 और 39 के तहत दोषी करार दिया था।
देशद्रोह और कश्मीर में घृणा फैलाई
इन पर देशद्रोह और जम्मू-कश्मीर में घृणा फैलाने वाले भाषण देने के लिए अप्रैल, 2020 में एक मामला दर्ज किया गया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अप्रैल, 2018 में इनके साथ-साथ इनके संगठन के खिलाफ मामला दर्ज किया था। दुख्तरान-ए-मिल्लत गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम , 1967 के तहत एक प्रतिबंधित संगठन है। यह संगठन जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने की मांग करता रहा है। कोर्ट ने 6 दिसंबर, 2018 को तीनों आरोपितों के खिलाफ दायर चार्जशीट पर संज्ञान लिया था।
देश की एकता और संप्रभुता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश
एनआईए का आरोप है कि तीनों विदेशों से मदद के लिए अभियान चलाकर देश की संप्रभुता और एकता को नुकसान पहुंचाना चाहते थे। दुख्तरान-ए-मिल्लत ने 23 मार्च, 2018 को पाकिस्तान दिवस के रुप में मनाया था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आसिया अंद्राबी ने कहा था कि धर्म, विश्वास और पैगंबर से प्रेम के आधार पर भारतीय उपमहाद्वीप के सभी मुसलमान पाकिस्तानी हैं। इस दौरान पाकिस्तान का राष्ट्रगान भी गाया गया था।

















