उत्तराखंड : ...ताकि न बदले पहाड़ की पहचान
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उत्तराखंड : …ताकि न बदले पहाड़ की पहचान

उत्तराखंड की जनसांख्यिकीय परिवर्तन की समस्या पर भाजपा विधायक शिव अरोरा ने जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की मांग सरकार से की। नीति निर्धारकों ने इस मांग का स्वागत किया। लेकिन विपक्ष ने इसे संकीर्ण मानसिकता बताया। जबकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पर और वैचारिक मंथन करने की आवश्यकता बताई

Written byदिनेश मानसेरादिनेश मानसेरा
Mar 25, 2026, 12:05 pm IST
in विश्लेषण, उत्तराखंड

पिछले दिनों उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में विधानसभा का बजट सत्र चल रहा था। इस सत्र के दौरान रुद्रपुर के भाजपा विधायक शिव अरोरा ने राज्य में जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाए जाने की मांग की। इससे राज्य में एक नई बहस छिड़ गई है।

ज्वलंत मुद्दा-जनसांख्यिकीय परिवर्तन

विधायक शिव अरोरा की इस मांग के पीछे यह संकेत माना जा रहा है कि राज्य की पुष्कर सिंह धामी सरकार, समान नागरिक संहिता या मदरसा बोर्ड खत्म करने की तर्ज पर एक नया प्रयोग उत्तराखंड की राजनीति में करने जा रही है। जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर न सिर्फ उत्तराखंड की राजनीति में, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी बहस शुरू हो गई है। जानकारों का मानना है कि ‘जनसंख्या नियंत्रण कानून’ का विषय केंद्र सरकार के कार्यक्षेत्र में आता है। फिलहाल तो राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार के विशेषज्ञ समूह में इस पर अभी मंथन चल रहा है। लेकिन उत्तराखंड की विधानसभा में विधायक शिव अरोरा ने जब यह विषय उठाया तो राजनीतिक एवं सामाजिक गलियारों में देवभूमि उत्तराखंड की जनसंख्या परिवर्तन राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।

जनसांख्यिकी में जबरदस्त बदलाव

विधायक शिव अरोरा ने विधानसभा में चर्चा के दौरान सदन का ध्यान राज्य में वर्ग विशेष (मुसलमान) की बढ़ती हुई आबादी की ओर दिलाया। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि 2011 में उत्तराखंड में मुसलमानों की आबादी 14 प्रतिशत थी, जो अब बढ़ कर 18 फीसदी हो गई है।

विधायक शिव अरोरा ने विशेष समुदाय के ‘हम पांच, लाएंगे पच्चीस’ के अभियान को देवभूमि उत्तराखंड के लिए खतरनाक बताया। उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश से लगे तराई के जिलों के साथ-साथ पहाड़ के कुछ क्षेत्रों में मुसलमान आबादी तेजी से बढ़ रही है। गैस, मकान, राशन जैसी सब्सिडी वाली सुविधाएं वर्ग विशेष को मिलने से अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है। इसका सीधा प्रभाव उत्तराखंड की बजट पर पड़ रहा है। इसलिए यहां जनसंख्या नियंत्रण कानून लाया जाना चाहिए। इसके अलावा, जिन दंपतियों के तीन से अधिक बच्चे हों, उन्हें सरकारी योजनाओं से वंचित किया जाए। 1971 में जब हिमाचल राज्य बना तब वहां मुस्लिम आबादी 2 प्रतिशत थी। आज भी वहां इतनी ही आबादी है, क्योंकि वहां पहले से सशक्त भू कानून लागू था। लेकिन देवभूमि उत्तराखंड की जनसांख्यिकी में जबरदस्त बदलाव हुआ है। भविष्य की दृष्टि से इस पर विचार करने की जरूरत है।

अतिक्रमण का कुचक्र

ज्ञातव्य है कि उत्तर प्रदेश से लगे हरिद्वार में 38 प्रतिशत, उधम सिंह नगर में 34 प्रतिशत, देहरादून में 33 प्रतिशत और नैनीताल में 32 प्रतिशत के करीब मुसलमानों की आबादी पहुंच गई है। जनसांख्यिकी परिवर्तन की यह समस्या उत्तराखंड में एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली कांग्रेस अल्पसंख्यक के नाम पर मुसलमानों को संरक्षण देती रही है। इसलिए कांग्रेस के शासनकाल में सरकारी भूमि, नदी व नालों के किनारों पर मलीन बस्तियों में मुसलमान आबादी की बसावट तेजी से हुई। इससे यहां जनसांख्यिकी में बदलाव देखने में आ रहा है। जनसांख्यिकी असंतुलन से धामी सरकार चिंतित है और इसीलिए सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू किया गया है। एक सर्वेक्षण के अनुसार सरकारी भूमि पर ज्यादातर कब्जा उन मुसलामानों का है जो उत्तरप्रदेश, बिहार, बंगाल आदि राज्यों से आकर बस गए हैं। जसपुर, किच्छा, गदरपुर, खटीमा, रुद्रपुर, काशीपुर आदि विधानसभा क्षेत्र में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण एक बड़ी समस्या बन चुकी है।

बजट पर दूरगामी प्रभाव

जनसंख्या नियंत्रण कानून पर विधायक शिव अरोरा कहते है कि हमने भारत के विभाजन का दर्द झेला है, जिस तरह से उत्तराखंड में मुसलमानों की आबादी बढ़ रही है, वह देवभूमि के लिए चिंता का विषय है। हमारी सरकारी सुविधाएं विशेष वर्ग एवं समुदाय के लोग उठा रहे हैं, जिससे सरकार के बजट पर भी अनावश्यक बोझ बढ़ गया है। यदि इसे नहीं रोका गया तो यह देवभूमि उत्तराखंड के भविष्य के लिए घातक होगा। ये लोग मजहबी कार्यसूची पर अपनी आबादी बढ़ा रहे हैं।

संकीर्ण मानसिकता

विधानसभा में जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग पर कांग्रेस विधायक काजी मोहम्मद निजामुद्दीन ने कहा कि भाजपा हमेशा एक वर्ग विशेष को लक्ष्य करती है। भाजपा विधायक संकीर्ण मानसिकता के हैं। देश में शायद ही कोई मुसलमान होगा जिसके पच्चीस बच्चे होंगे।

राष्ट्रहित में जनसंख्या नियंत्रण कानून

उत्तराखंड में रणनीतिकार परिषद के सदस्य और जनसंख्या नियंत्रण के विषय में लंबे समय से शोध करने वाले मनु गौड़ कहते हैं कि उत्तराखंड ही नहीं पूरे देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून की जरूरत है। उत्तराखंड विधानसभा में यह मांग उठी है इस पर आगे बहस और चर्चा तेज होनी चाहिए। इस पर राष्ट्रहित में जनमत बनाया जाना चाहिए।

जनसांख्यिकी परिवर्तन गंभीर समस्या

शिव अरोरा की मांग पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि यह उनका निजी विचार और मांग है। अभी इस पर और वैचारिक मंथन की जरूरत है। जनसांख्यिकी परिवर्तन उत्तराखंड की समस्या है। हमारी सरकार इस पर सजग होकर काम कर रही है। हम उत्तराखंड के देव स्वरूप सांस्कृतिक वातावरण को बनाए रखने के लिए वचनबद्ध हैं। हम अपने बच्चों को सांस्कृतिक रूप से एक मजबूत उत्तराखंड देने के लिए संकल्पित हैं।

Topics: भू-कानूनपहाड़ी संस्कृतिपलायनजनसांख्यिकीय परिवर्तनअतिक्रमणसशक्त कानूनपर्यावरण संरक्षणकानूनी प्रावधानदेवभूमिस्थानीय स्वरोजगारपाञ्चजन्य विशेषउत्तराखंडी अस्मितासरकारी जमीनरिवर्स माइग्रेशनपहाड़ की पहचानमूल निवाससांस्कृतिक एवं पर्यावरण
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