प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान से जुड़े हालात पर देश को संबोधित किया। उनका संदेश साफ और सरल था- सरकार पूरी तरह सतर्क है और हर भारतीय की सुरक्षा उसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत हमेशा से शांति का समर्थक रहा है और आज भी उसी रास्ते पर चल रहा है। उनका मानना है कि युद्ध कभी भी किसी समस्या का सही समाधान नहीं होता। इससे केवल नुकसान बढ़ता है और आम लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। इसलिए भारत लगातार दूसरे देशों से बातचीत कर रहा है ताकि हालात जल्द सामान्य हो सकें। उन्होंने लोगों को यह भी समझाया कि ऐसे समय में अफवाहें बहुत तेजी से फैलती हैं। सोशल मीडिया पर कई बार गलत खबरें भी वायरल हो जाती हैं, जिससे डर और भ्रम बढ़ता है। इसलिए उन्होंने सभी से अपील की कि केवल भरोसेमंद स्रोतों से मिली जानकारी पर ही विश्वास करें और किसी भी गलत खबर को आगे न बढ़ाएं।
भारतीयों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति पर सरकार सतर्क- प्रधानमंत्री ने खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की भी बात की। उन्होंने बताया कि वहां लाखों भारतीय काम करते हैं और उनकी सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। सरकार लगातार उनकी मदद कर रही है और अब तक कई लोगों को सुरक्षित भारत वापस लाया जा चुका है। खासकर छात्रों और कामगारों को पहले सुरक्षित निकालने की कोशिश की जा रही है। ऊर्जा के मुद्दे पर उन्होंने बताया कि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जो होर्मुज स्ट्रेट जैसे रास्तों से होकर आता है। मौजूदा तनाव के कारण इस रास्ते पर खतरा बढ़ गया है, लेकिन सरकार पूरी कोशिश कर रही है कि देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कमी न हो।
तेल भंडार मजबूत- उन्होंने यह भी बताया कि सरकार पहले से तैयार है। देश में तेल का पर्याप्त भंडार रखा गया है और इसे और बढ़ाने की योजना भी चल रही है। साथ ही, सरकार दूसरे देशों से भी आयात बढ़ा रही है ताकि किसी एक जगह पर निर्भरता कम हो सके। इसके अलावा, एथेनॉल और बिजली जैसे विकल्पों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे भविष्य में तेल पर निर्भरता कम हो सके। किसानों और आम लोगों को भरोसा दिलाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी जरूरतों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। गर्मियों में बिजली की बढ़ती मांग को लेकर भी सरकार पूरी तरह तैयार है। अंत में उन्होंने कहा कि भारत हमेशा शांति और मानवता के रास्ते पर चलता रहेगा। बातचीत और कूटनीति ही इस समस्या का असली समाधान है, और भारत इसी दिशा में लगातार प्रयास करता रहेगा।
















