ममता फंस गईं भाजपा के जाल में! बंगाल चुनाव में टीएमसी कमजोर
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ममता फंस गईं भाजपा के जाल में! बंगाल चुनाव में टीएमसी कमजोर

भाजपा की चालाकी से ममता बनर्जी सिर्फ एक सीट पर सीमित, पूरे राज्य में घूमना मुश्किल। नवीन पटनायक, KCR जैसे उदाहरणों से सबक लेकर ममता ने दो सीट छोड़ी, लेकिन भबानीपुर में भाजपा मजबूत।

Written byअभय कुमारअभय कुमार — edited by कुलदीप सिंह
Mar 22, 2026, 11:59 am IST
inविश्लेषण, पश्चिम बंगाल
भाजपा

भाजपा

भारतीय  जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी को अपने जाल में उलझा लिया है। सवाल है कैसे ? भाजपा का प्रयास था कि ममता बनर्जी को अपनी ही सीट पर मोर्चाबंदी कर दी जाए, जिससे कि वो पूरे राज्य में चुनाव प्रचार नहीं कर सकें, जिसमे पार्टी सफल होती दिख रही है। भाजपा ने इस रणनीति के तहत तृणमूल कांग्रेस से पहले अपनी पार्टी के उम्मीदवारों की सूची जारी करके मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए विधानसभा में विपक्षी दल के नेता सुवेंदु अधिकारी को ममता बनर्जी की सीट भबानीपुर से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया।

कैसे उलझीं ममता

तृणमूल कांग्रेस पार्टी की ओर से इस घोषणा के दो तात्कालिक राजनीतिक परिणाम देखने को मिले। पहला कि ममता बनर्जी का भबानीपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की मजबूरी हो गयी। अगर ममता बनर्जी इस सीट को छोड़कर किसी अन्य सीट से चुनाव लड़ती तो जनता में यह सन्देश जाता कि वह सुवेंदु अधिकारी के डर से सीट छोड़कर अन्य सीट पर चली गई हैं और इससे पार्टी के कार्यकर्तायों को मानसिक तौर पर काफी क्षति पहुँचती। दूसरा कि ममता बनर्जी सिर्फ एक सीट से ही लड़ने को मजबूर हुई हैं। खबरों के मुताबिक ममता बनर्जी इस बार दो सीटों से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही थीं। इसका कारण 2024 के लोकसभा के चुनाव में ममता बनर्जी की भबानीपुर विधानसभा सीट पर तृणमूल कांग्रेस का कमतर प्रदर्शन था। 2024 के लोकसभा चुनाव में भबानीपुर सीट पर तृणमूल कांग्रेस पार्टी भाजपा से केवल 8269 मतों से आगे थी तब जबकि माकपा को इस सीट पर 14006 मत मिला था।

भाजपा भबानीपुर विधानसभा सीट पर 2014 के लोकसभा चुनाव से ही काफी मजबूत हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव कोलकाता दक्षिण लोकसभा सीट के अंतर्गत भबानीपुर विधानसभा सीट पर भाजपा को तृणमूल कांग्रेस पार्टी से अधिक मत मिला था।

वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में दक्षिण कोलकाता लोकसभा सीट के चुनाव में इस विधानसभा सीट पर तृणमूल कांग्रेस भाजपा से केवल 3168 मतों से आगे रही थी।

ममता बनर्जी 2021 में नंदीग्राम विधानसभा सीट से चुनाव हार गई थीं और फिर भबानीपुर विधानसभा सीट से उपचुनाव जीतकर सदन की सदस्यता ग्रहण किया था। मगर ममता बनर्जी के राजनीति को इस हार से गहरा झटका लगा था। 2026 में ममता बनर्जी किसी भी कीमत पर हार नहीं स्वीकार कर सकती हैं।

दो सीटों पर चुनाव लड़ने से क्यों बच रहीं ममता

ममता बनर्जी का दो सीटों से चुनाव लड़ने से बचना भी उनकी रणनीति का हिस्सा हैं। ममता बनर्जी के सामने अनेकों मुख्यमंत्रियों के उदाहरण हैं, जिन्होंने दो सीटों से चुनाव लड़ा मगर वो मुख्यमंत्री अपनी सीट से भी हारे और उनकी पार्टी भी चुनाव हार गई। 2024 में पश्चिम बंगाल के पड़ोसी राज्य ओडिशा में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक दो सीटों से चुनाव लड़े और उनकी पार्टी विधानसभा का चुनाव हार गई साथ ही वो भी एक सीट से चुनाव हार गए। 2023 में तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव दो सीटों से चुनाव लड़े और एक सीट से चुनाव हारने के साथ ही उनकी पार्टी भी सत्ता से बेदखल हो गई।

2022 में पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी दो सीटों से चुनाव लड़े और दोनों सीटों से चुनाव हार गए और उनकी कांग्रेस पार्टी भी बुरी तरह चुनाव हार गई। एक सीट पर चन्नी मुश्किल से जमानत बचा सके। 2017 में उत्तराखंड में कांग्रेस पार्टी के मुख्यमंत्री हरीश रावत दो सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों सीटों से चुनाव हार गए साथ ही कांग्रेस पार्टी भी विधानसभा का चुनाव हार गई थी। 2005 में हरियाणा में तात्कालिक मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला दो सीटों नरवाना और रोरी से चुनाव लड़े। चौटाला नरवाना से रणदीप सिंह सुरजेवाला से चुनाव हार गए और चौटाला की इंडियन नेशनल लोकदल भी चुनाव हार गई।

अतएव ममता बनर्जी ने इन्हीं उदाहरणों के देखते हुए एक सीट से ही चुनाव लड़ने का फैसला किया है और अपने परम्परागत सीट भबानीपुर से ही चुनाव लड़ रही हैं। मगर इस सीट पर ममता की राह काफी मुश्किलों से भरी हुई है। ममता बनर्जी को अब पूरे राज्य में चुनाव प्रचार करने का कम समय मिलेगा, क्योंकि उनको अपने सीट पर चुनाव प्रचार का एक बड़ा हिस्सा देना पड़ेगा। भबानीपुर विधानसभा सीट पर चुनाव दूसरे चरण में हैं, अतएव ममता पूरे चुनाव प्रचार के क्रम में अपने सीट पर ही सीमित रहेंगी। ऐसे में भाजपा अपने मंसूबे में सफल होती दिख रही है।

 

 

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अभय कुमार
अभय कुमार
अभय कुमार, सीएसडीएस (CSDS ), इप्सोस (IPSOS) सहित कई रिसर्च और मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। भारतीय राजनीति सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय मामलो से जुड़े मुद्दों पर खास दिलचस्पी है और इसके लिए लिखते रहते हैं। [Read more]
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