गत 13-15 मार्च तक माधव सृष्टि, समालखा (हरियाणा) में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा आयोजित हुई। इसका शुभारंभ 13 मार्च को सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत एवं सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले ने भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन कर किया। उद्घाटन सत्र के बाद सह सरकार्यवाह श्री सी. आर. मुकुंद ने पत्रकारों को बताया कि संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित प्रतिनिधि सभा की बैठक में देशभर से 1,400 से अधिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।

बैठक की शुरुआत में दिवंगत हुए विभिन्न प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इनमें प्रमुख रूप से शिव कथाकार सतगुरुदास महाराज, पर्यावरणविद् डॉ. माधव गाडगिल, पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री एवं लोकसभा अध्यक्ष शिवराज पाटिल, पर्यावरण के लिए समर्पित सालुमरदा थिमक्का, पुरातत्वविद् के. एन. दीक्षित, महाराष्ट्र के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, अभिनेता धर्मेंद्र देओल, तमिल फिल्म निर्माता ए.वी.एम. सरवनन, मिजोरम के पूर्व राज्यपाल स्वराज कौशल, शिक्षाविद् विनय हेगड़े, कम्युनिस्ट नेता आर. नल्लकणु, वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक प्रफुल्ल गोविंद बरुआ के नाम सम्मिलित हैं।
स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन
श्री मुकुंद ने बताया कि देशभर में संघ शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम चल रहे हैं, जिनमें समाज की सज्जन-शक्ति के सहयोग और सहभाग ने स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन किया है। उन्होंने बताया कि शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की शुरुआत 02 अक्तूबर, 2025 को नागपुर में पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद एवं सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत के सान्निध्य में हुई। इससे एक दिन पूर्व भारत सरकार ने संघ शताब्दी वर्ष के उपल्क्ष्य पर संघ पर डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी किया था।

पत्रकार वार्ता में सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले से पूछे गए प्रश्नों के उत्तर
“संघ विश्व में शांति चाहता है”
ईरान के प्रति भारत के रुख पर संघ का क्या दृष्टिकोण है?
यह विश्वास है कि भारत सरकार देश के हित में सही निर्णय ले रही होगी। संघ विश्व में शांति चाहता है।
संघ में मुसलमानों और महिलाओं की सदस्यता को लेकर क्या कहेंगे?
किसी भी धर्म का व्यक्ति यहाँ आ सकता है और भगवा ध्वज को प्रणाम कर सकता है। पहले भी बड़ी संख्या में मुस्लिम कार्यकर्ता संघ में रहे हैं। महिलाएं केवल शाखा के कार्य में ही नहीं, बल्कि संघ की अन्य कार्य-प्रणालियों में भी बड़ी संख्या में सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं।
आवारा पशुओं (विशेषकर गौवंश) के संबंध में संघ क्या कर रहा है?
सरकार और नगर निगम लगातार प्रयास कर रहे हैं। लेकिन लोगों को समझना चाहिए कि गाय केवल दूध के लिए ही नहीं होती, उसका गोमूत्र और गोबर भी अत्यंत उपयोगी है। इसलिए उन्हें सड़कों पर बेसहारा नहीं छोड़ना चाहिए।
भाजपा और संघ के बीच क्या संबंध है?
देश में अनेक विचारधाराएं हैं, लेकिन भरतीय विचार धारा को केवल भाजपा ने अपनाया है। अन्य दलों ने संघ के लिए अपने द्वार बंद रखे। इसलिए संघ के अनेक कार्यकर्ता राजनीति में गए और राष्ट्रीय हित के विचारों को आगे बढ़ा रहे हैं।
यूजीसी विवाद पर आपका क्या कहना है?
यह मामला वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। इसलिए संघ इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं करेगा। न्यायालय के निर्णय के बाद ही संघ कुछ कह सकेगा।
उन्होंने बताया कि संघ के शताब्दी वर्ष में दो प्रकार के कार्यक्रमों की योजना बनाई गई, जिनमें एक संगठन विस्तार और दूसरा समाज की सज्जन-शक्ति को सद्भाव, समरसता के लिए संगठित करने का उद्देश्य रखा गया। इस दृष्टि से गृह संपर्क अभियान चल रहा है, जिसके अंतर्गत अभी तक देश के कुछ प्रांतों में ही 10 करोड़ घरों तथा 3,90,000 गांवों तक संपर्क किया जा चुका है और अन्य प्रांतों में यह अभियान जारी है। गृह संपर्क में वर्ग और समुदाय के किसी पूर्वाग्रह के बिना घरों में जाकर परिवारों से मिलकर संघ के विषय में संवाद किया गया। सिर्फ केरल का ही उदाहरण लें तो वहां 55,000 से ज्यादा मुस्लिम घरों में तथा 54,000 से ज्यादा ईसाई परिवारों में संपर्क किया गया और इन सभी परिवारों ने स्वयंसेवकों का स्वागत किया।
उन्होंने बताया कि देशभर में अभी तक 36,000 से अधिक स्थानों पर हिंदू सम्मेलनों का आयोजन हो चुका है, जिनमें शहरी, ग्रामीण, दुर्गम जनजातीय क्षेत्र सहित सभी प्रकार के स्थान सम्मिलित हैं। इसमें अरुणाचल प्रदेश के एक दुर्गम क्षेत्र में आयोजित हिंदू सम्मेलन का उदाहरण उल्लेखनीय है, जहां लोगों ने कहा कि वे पहली बार इस प्रकार की आत्मीयता अनुभव कर रहे हैं। हिंदू सम्मेलनों का आयोजन निरंतर जारी है।

पंच परिवर्तन के प्रयास
श्री मुकंद ने कहा कि समाज-हित के लिए सज्जन-शक्ति को संगठित करने की दृष्टि से प्रमुख नागरिक संगोष्ठियां आयोजित की गईं। दोनों प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के भीतर पंच परिवर्तन के व्यापक लक्ष्य के लिए वातावरण बन रहा है। पंच परिवर्तन में सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण चेतना, स्व एवं स्वदेशी के लिए गर्व, परिवार व्यवस्था के संरक्षण तथा नागरिक कर्तव्यों के लिए जागरूकता शामिल हैं। इन परिवर्तनों के माध्यम से ही देश और समाज को महान बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि संघ के सरसंघचालक जी भी इन विषयों पर समाज के साथ सीधा संवाद स्थापित करने के लिए चारों महानगरों सहित राज्यों की राजधानियों में कार्यक्रमों में सहभाग कर रहे हैं। सरसंघचालक जी ने केवल चार महानगरों में आयोजित कार्यक्रमों में नागरिकों के साथ संवाद करते हुए 1,000 से अधिक प्रश्नों के उत्तर दिए तथा इस प्रश्नोत्तर में 20 घंटे से अधिक का समय लगा।
उन्होंने कहा कि संघ कार्य का निरंतर विस्तार हो रहा है और पिछले एक वर्ष में नए स्थानों पर नई शाखाओं का संचालन प्रारंभ हुआ है। संघ का प्रयास है कि आने वाले समय में गांवों और कस्बों में अधिक से अधिक शाखाएं प्रारंभ हों और समाज जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सके।

सबकी कुशलता की कामना
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का भी संघ ने स्वागत किया। श्री मुकुंद ने कहा कि इसी प्रकार मणिपुर में भी शांति और स्थायित्व की स्थिति बहाल होना संतोषजनक है और इसमें संघ के स्वयंसेवकों की भूमिका भी उल्लेखनीय है। पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने आशा जताई कि वहां हिंदू समाज के साथ परिस्थितियां बेहतर होंगी।
उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य समाज की सज्जन-शक्ति को एकत्रित कर राष्ट्र निर्माण के कार्य में आगे बढ़ना है। संघ का यह शताब्दी वर्ष कार्यक्रम अक्तूबर 2026 तक विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से जारी रहेगा। संघ विश्व में शांति एवं सबकी कुशलता की कामना करता है।
प्रेस वार्ता में अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री सुनील आंबेकर, सह प्रचार प्रमुख द्वय श्री नरेंद्र ठाकुर एवं श्री प्रदीप जोशी सहित अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।
प्रांत के स्थान पर होंगे संभाग
बैठक के अंतिम दिन यानी 15 मार्च को सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि पिछले वर्ष में संगठन कार्य का उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। संघ की शाखाएं लगभग 6,000 की वृद्धि के साथ 88,000 से अधिक हो गई हैं तथा स्थान भी बढ़कर 55,000 से अधिक हो गए हैं। इसके साथ ही साप्ताहिक मिलन और मंडली की संख्या भी बढ़ी है। संगठन कार्य में विस्तार को इस प्रकार देखना भी आवश्यक है कि अंदमान, अरुणाचल प्रदेश, लेह और दुर्गम जनजातीय क्षेत्रों में भी संघ की शाखाएं संचालित हो रही हैं। संघ शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में भी इस सांगठनिक विस्तार को स्पष्टता से देखा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सांगठनिक विस्तार के साथ संघ समाज में गुणवत्ता संवर्धन के लिए भी निरंतर कार्य कर रहा है। पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज को सकारात्मक परिवर्तन के लिए प्रेरित करना महत्वपूर्ण है। भारतीय अथवा हिंदुत्व केवल एक विचार नहीं, बल्कि जीवन-शैली है और इसके माध्यम से समाज में गुणवत्ता का विस्तार होना चाहिए। इसी उद्देश्य से समाज की सज्जन-शक्ति को एकत्र करना और Power of Good का राष्ट्रहित में प्रवृत्त होना आवश्यक है। सरकार्यवाह जी ने कहा कि समाज में महापुरुषों के कार्यों को जाति, पंथ के भेद से ऊपर उठकर स्वीकार करना चाहिए और उनके माध्यम से समाज को सकारात्मक परिवर्तन के लिए आगे बढ़ना चाहिए। संघ के स्वयंसेवकों ने इसी दिशा में नवम गुरु श्री तेग बहादुर जी के बलिदान के 350वें वर्ष के अवसर पर देशभर में 2,000 से अधिक कार्यक्रम किए, जिनमें 7 लाख से अधिक लोग सम्मिलित हुए। इसी प्रकार राष्ट्रगीत वंदेमातरम् की 150वीं वर्षगांठ भी उत्साहपूर्वक मनाई गई। आगामी वर्ष में संत शिरोमणि रविदास जी महाराज के 650वें प्राकट्य वर्ष पर कार्यक्रमों की योजना बनी है।
विश्व संघ शिविर

संघ शताब्दी वर्ष में विदेशों में रहने वाले संघ स्वयंसेवकों के प्रयास से विश्व संघ शिविर भी संपन्न हुआ। भाग्यनगर (तेलंगाना) के कान्हा शांतिवनम् के विशाल परिसर में 25-28 दिसंबर, 2025 तक आयोजित इस शिविर में विश्व के 71 देशों से 1026 बंधु, 585 भगिनी ऐसे कुल 1611 स्वयंसेवक और परिवार जन उपस्थित रहे। ‘धर्मे सर्व प्रतिष्ठितम्’ यह शिविर का ध्येय वाक्य था। 25 दिसंबर को उद्घाटन कार्यक्रम में पूज्य संत गोविंद देव गिरि जी का उद्बोधन हुआ। विविध सत्रों में भारत के बाहर के देशों में हिंदू समाज के संगठन के प्रयास, हिंदू विचार एवं संस्कृति का प्रचार व प्रबोधन, परिवारों में अपने जीवन मूल्यों का पालन, युवाओं में कार्य आदि विषयों पर चर्चा, संघ की यात्रा, संत एवं लोक साहित्य में धर्म ऐसे विषयों पर बौद्धिक की योजना बनी थी। 28 दिसंबर को संपन्न समापन समारोह में सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत का मार्गदर्शन मिला।

96 प्रशिक्षण वर्ग
उन्होंने संघ के आगामी वर्ष के नियमित प्रशिक्षण वर्गों की जानकारी दी और बताया कि 11 क्षेत्र के वर्ग तथा एक नागपुर के वर्ग को मिलाकर कुल 96 प्रशिक्षण वर्ग संचालित किए जाएंगे। प्रतिनिधि सभा में गोसेवा और ग्राम विकास की योजनाओं पर भी विचार किया गया। नागरिकों को प्रेरित किया जाएगा कि वे घर की छत पर सब्जी उगाएं, उसमें देसी गोबर और गोमूत्र की खाद का उपयोग करें, जिससे गोसंवर्धन में सभी सहयोग कर सकते हैं। इसी तरह हरित घर बनाने का भी संकल्प नागरिक ले सकते हैं, जिससे घर में पॉलीथीन का न्यूनतम उपयोग, जल संरक्षण आदि प्रयास किए जा सकते हैं।
संघ की संगठनात्मक संरचना में परिवर्तन संबंधित प्रश्न पर उन्होंने कहा कि संरचना में विकेंद्रीकरण पर विचार हुआ है, जिसमें प्रांत के स्थान पर छोटी इकाई संभाग बनाने का प्रस्ताव है। इसके लागू होने पर 46 प्रांतों के स्थान पर 80 से अधिक संभाग होंगे। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में सरकार्यवाह जी ने कहा कि समाज में जातिगत आधार पर विभेद को समाप्त करने के लिए मीडिया को भी आगे आना चाहिए और किसी भी चुनाव में मतदाताओं की संख्या का जाति आधारित आकलन बंद करना चाहिए। उन्होंने वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में देश की सरकार द्वारा राष्ट्रहित में किए जा रहे कूटनीतिक प्रयासों की सराहना की और कहा कि संघ विश्व में शांति और विकास का पक्षधर है।

झलक हरियाणवी गौरव की

प्रतिनिधि सभा में एक विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित हुई। इसका उद्घाटन सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने किया। प्रदर्शनी में नौवें सिख गुरु महान बलिदानी श्री गुरु तेगबहादुर जी के जीवन की झलकियां तथा हरियाणा प्रदेश के ऐतिहासिक, पौराणिक स्थलों के साथ विभिन्न महान विभूतियों के जीवन, विचारों और समाज के प्रति उनके योगदान को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी के चार प्रमुख भाग रहे। एक हिस्से में हरियाणा के महान स्वतंत्रता-सेनानी, वीर योद्धा, महान खिलाड़ियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धि प्राप्त व्यक्तित्वों के विवरण और चित्र थे। दूसरे भाग में सिखों के नवम गुरु श्री गुरु तेगबहादुर जी के जीवन के अनेक महत्वपूर्ण प्रसंगों को चित्रों के माध्यम से दिखाया गया। देश और समाज के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने वाले श्री गुरु तेगबहादुर जी के बलिदान का यह 350 वां वर्ष है और इस अवसर पर यह प्रदर्शनी आगंतुकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इसके अतिरिक्त प्रदर्शनी में सरस्वती नदी तथा भगवद्गीता से हरियाणा की भूमि के सनातन संबंध को दर्शाने वाली सामग्री भी प्रदर्शित की गई। प्रदर्शनी में हरियाणा में संघ कार्य के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले दिवंगत स्वयंसेवकों के भी चित्र शामिल थे। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिवंगत प्रचारकों के चित्र व जीवन परिचय भी प्रदर्शनी में दिखाए गए।
प्रदर्शनी में प्रथम खालसा राज्य की राजधानी लोहागढ़ किला, श्री गुरु तेगबहादुर जी के जीवन से संबंधित विभिन्न घटनाओं के चित्र, उत्तर भारत के प्रथम महिला विश्वविद्यालय के संस्थापक तथा नारी शिक्षा के पुरोधा भक्त फूलसिंह, हरियाणवी रागनी विधा के शिखर पुरुष व महान सूर्य कवि दादा लख्मीचंद, महान किसान नेता दीनबंधु सर छोटू राम, स्वतंत्रता सेनानी और महान योद्धा राव तुलाराम, 1857 की क्रांति के बलिदानी सेठ हुकुमचंद जैन, अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष छेड़ने वाले बल्लभगढ़ के राजा नाहर सिंह, श्री गुरु तेगबहादुर जी के शीश के सम्मान की रक्षा के लिए अपना शीश देने वाले सोनीपत के बढ़खालसा गांव के कुशाल सिंह दहिया, औरंगजेब से लड़ने वाले महान वीर गोकुला जाट, मेवात में कन्वर्जन रोकने वाले दादा कान्हा, बाजे भगत, कवि फौजी मेहर सिंह, प्रसिद्ध संगीतकार पंडित जसराज, परमवीर चक्र विजेता होशियार सिंह, जनरल वी.के. सिंह, जनरल दलबीर सिंह सुहाग, निर्धन बालकों को शिक्षा देने वाले सेठ छज्जूराम, गोरक्षक हरफूल जाट, हसन खान मेवाती, क्रिकेटर कपिल देव, ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा, साइना नेहवाल, बाबा रामदेव, दिल्ली की गद्दी पर अंतिम हिंदू सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य, आर्य समाजी स्वामी उमानंद सरस्वती, बॉलीवुड कलाकार रणदीप हुड्डा, संगीतकार जोड़ी जतिन—ललित जैसे हरियाणा की विभूतियों के चित्र प्रदर्शित किए गए।
प्रदर्शनी का उद्देश्य समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना तथा महान व्यक्तित्वों के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना था।
सबके पूर्वज एक
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार ने किसी समुदाय और पंथ-पूजा पद्धति के विरोध के लिए संघ की स्थापना नहीं की। संघ के दूसरे सरसंघचालक श्रीगुरुजी ने भी कहा था कि हम सबके पूर्वज एक हैं और पूजा-पाठ की पद्धति की भिन्नता से कोई अंतर नहीं आता। इसमें डीएनए शब्द नहीं था, किंतु अभिप्राय यही था। तीसरे सरसंघचालक श्री बालासाहब देवरस ने भी कहा था, ”भारत को अपनी मातृभूमि व अपना राष्ट्र मानने वाले और भारतीयता को जीने वाले सभी हिंदू हैं।
संघ में सबका स्वागत है, जो भी समाज के लिए अच्छा कार्य कर रहा है, हम उसको संघ का स्वयंसेवक ही मानते हैं।” उन्होंने बताया कि अंदमान में प्रमुख 9 द्वीपों में से 13 हजार से अधिक लोग सरसंघचालक जी की उपस्थिति में हुए हिंदू सम्मेलन में सम्मिलित हुए। इसी प्रकार अरुणाचल प्रदेश जैसे कम जनसंख्या घनत्व वाले प्रदेश में भी 21 स्वधर्म सम्मेलनों में 37 हजार से अधिक लोगों ने सहभागिता की।
‘संत रविदास ने जगाई नई चेतना’
प्रतिनिधि सभा में संत शिरोमणि श्री रविदास जी के 650वें प्राकट्य वर्ष के अवसर पर सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले द्वारा जारी वक्तव्य
संत श्री रविदास जी भक्ति की भाव-धारा के महान संत थे, जिन्होंने समाज में एक नई चेतना प्रवाहित की। उन्होंने जन्म के आधार पर ऊंच-नीच के भेद को नकारते हुए आचरण को ही श्रेष्ठता की कसौटी माना। रूढ़ियों और कुरीतियों से समाज की मुक्ति तथा कालबाह्य परंपराओं को त्यागने और काल—सुसंगत सामाजिक परिवर्तनों को अंगीकार करने हेतु समाज का मानस बनाने में उनकी ऐतिहासिक भूमिका रही है। उनके विचारों का महत्व समझकर श्री गुरुग्रंथ साहिब में उनकी 41 वाणियों को ‘शबद’ रूप में समाहित किया गया है।
सामान्य पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने वाले संत श्री रविदास जी का ईश्वर-भक्ति, सेवा भाव तथा समाज के प्रति निश्छल प्रेम के कारण काशी के विद्वत्-जन सहित समाज के सभी वर्गों ने उनकी महानता को स्वीकृत किया। काशी नरेश, झाली रानी तथा मीराबाई जैसे राजपरिवारों के सदस्यों ने भी उनको अपना गुरु माना। गुरु और शिष्य के रूप में संत श्री रविदास जी और मीराबाई का नाता निर्गुण और सगुण भक्ति धाराओं का मिलन है तथा जातिभेद मानने वालों के लिए अनुकरणीय सीख भी है। मुस्लिम आक्रमणकारियों के आतंक के उस कठिन काल में भक्ति की निर्मल धारा को प्रवाहित करते हुए संत श्री रविदास जी ने धर्म की श्रेष्ठता की उद्घोषणा की और लोगों से धर्मपालन का आग्रह किया।सद्गुरु संत श्री रविदास जी को मतांतरित कर मुस्लिम बनाने के अनेक प्रयास हुए, किन्तु उनकी भक्ति और आध्यात्मिक साधना से प्रभावित होकर उन्हें मतांतरित करने वाले ही उनके अनुयायी बन गए। वर्तमान समय में जब विविध विभाजनकारी शक्तियां जन-मानस को वर्ग और जाति के आधार पर बांटने का प्रयास कर रही हैं, तब पूज्य संत श्री रविदास जी के जीवन-संदेश के मर्म को समझकर हम सभी को देश और समाज की एकात्मता के लिए कार्य करने का संकल्प लेने की आवश्यकता है।

- व्यापक गृह एवं ग्राम संपर्क
स्वरूप : प्रांतों में 3-4 सप्ताह में स्वयंसेवकों की छोटी छोटी टोली द्वारा अधिकाधिक ग्राम एवं गृह संपर्क करना।
उद्देश्य : संघ के 100 वर्ष की यात्रा व संघ कार्य के परिचय देना, वर्तमान परिस्थिति में अपनी भूमिका और पंच परिवर्तन के विषय पहुँचाना।
सामाजिक सद्भाव बैठक
स्वरूप : खंड / नगर स्तर पर सकल समाज के प्रमुखों व संतों की बैठक, चिंतन-मंथन ।
उद्देश्य: सामाजिक व धार्मिक नेतृत्व में सामंजस्य एवं परस्पर सहयोग, दुर्बल समूहों के अभाव का निराकरण, सामूहिक चिंतन व प्रयास का अभ्यास एवं सामाजिक शक्ति वर्धन। पंच परिवर्तन के क्रियान्वयन हेतु चर्चा। - प्रमुख नागरिक गोष्ठी
स्वरूप : जिला स्तर पर समाज के विविध श्रेणी के चयनित प्रमुख व्यक्तियों के 2-4 घंटों की चिंतन सभा।
उद्देश्य : संघ कार्य, हिंदुत्व, वर्तमान राष्ट्रीय परिस्थिति में अपनी भूमिका, पंच परिवर्तन आदि विषयों पर विषय प्रस्तुति, संवाद, जिज्ञासा समाधान के द्वारा वैचारिक तथा दायित्व जागरण। - हिन्दू सम्मेलन
स्वरूप : मंडल एवं बस्ती के स्तर पर (अथवा उनके प्रतिनिधित्व) हिन्दू समाज के 3-4 घंटों का सम्मेलन।
आयोजक : स्थानीय प्रमुख व्यक्तियों की समिति
उद्देश्य : हिन्दू समाज की सांस्कृतिक एकता व संगठित शक्ति, हिंदुत्व/धर्म जागरण और पंच परिवर्तन का आचरण। - युवा कार्यक्रम
स्वरूप : स्थानीय योजनानुसार विविध स्तरों पर तरुण विद्यार्थी/युवाओं का एकत्रीकरण, सभा, संवाद।
उद्देश्य : युवा पीढ़ी में राष्ट्र बोध, संगठन स्वभाव एवं समाज परिवर्तन के प्रयत्न की वृद्धि, युवकों में कार्य बढ़ाना।
सेवा है यज्ञ कुंड, समिधा सम हम जलें
आरोग्य भारती

सेवा गतिविधियों के अंतर्गत विभिन्न स्वास्थ्य और सेवा शिविर आयोजित किए गए। इनमें 544 रक्तदान शिविर, जिनसे 59,036 लोग लाभान्वित हुए। 162 दिव्यांग शिविर हुए, जिनसे 15,610 लोग लाभान्वित हुए। 860 स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए गए, जिनसे 1,36,749 लोग लाभान्वित हुए। 292 नशामुक्ति शिविर, जिनसे 53,946 लोग लाभान्वित हुए और 717 नेत्र जांच शिविर, जिनसे 93,942 लोग लाभान्वित हुए हैं। इसके अतिरिक्त, 2,698 एनीमिया परीक्षण शिविरों से 4,08,923 लोग लाभान्वित हुए। 873 योग कार्यक्रमों से 50,028 लोग लाभान्वित हुए, जबकि स्वास्थ्य केंद्रों ने 13,88,103 लोगों को सेवा प्रदान की। कुल मिलाकर, 6,350 सेवा शिविरों से 22,06,541 लोग लाभान्वित हुए।
यह संगठन नियमित रूप से आंबेडकर जयंती और बिरसा मुंडा जयंती जैसे अवसरों पर स्वास्थ्य सेवा शिविर आयोजित करता है। ये शिविर मुख्यतः वनवासी क्षेत्रों और शहरी झुग्गी बस्तियों में आयोजित किए जाते हैं। पिछले वर्ष झाबुआ (मध्य प्रदेश), झारखंड, राजस्थान और गुजरात में प्रमुख स्वास्थ्य सेवा गतिविधियाँ संचालित की गईं, जहाँ लगभग 50,000 मरीजों को चिकित्सा सेवाएँ प्राप्त हुईं।
सेवा भारती देशभर में आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेती है। पिछले एक वर्ष के दौरान प्राकृतिक आपदाओं में सेवा भारती के स्वयंसेवक तुरंत प्रभावित क्षेत्रों में पहुँचे और राहत एवं पुनर्वास सहायता प्रदान की। जम्मू-कश्मीर के रामबन में प्राकृतिक आपदा के दौरान स्वयंसेवकों ने अनेक तरह से प्रभावितों की सेवा की और निःशुल्क चिकित्सा शिविर आयोजित किए। हिमाचल प्रदेश में भीषण बाढ़ के दौरान सेवा भारती के कार्यकर्ताओं ने प्रभावित परिवारों को भोजन, कपड़े, दवाइयाँ और आवश्यक राहत सामग्री प्रदान की। केरल में सेवा भारती ने घरों का निर्माण कर आपदा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास में सहायता की, जिससे उन्हें अपने जीवन को पुनः स्थापित करने में मदद मिली।
भारतीय मजदूर संघ
भारतीय मजदूर संघ की 70वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें जिला मुख्यालयों पर “पंच परिवर्तन” विषय पर मासिक व्याख्यान श्रृंखला, श्रमिक संपर्क अभियान, युवा और महिला सम्मेलन तथा राज्यवार और उद्योगवार अभ्यास वर्ग शामिल थे। साथ ही नए क्षेत्रों में विस्तार भी किया गया। संगठन ने कई अंतरराष्ट्रीय श्रम मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया, जिनमें ILO अंतरराष्ट्रीय श्रम सम्मेलन (जून 2025) और काठमांडू, श्रीलंका, जापान, चीन और बैंकॉक में आयोजित बैठकों में भागीदारी शामिल है।


राष्ट्र सेविका समिति
भारतीय शिक्षण मंडल

अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद
परिषद कई प्रकंल्प संचालित करती है, जिनमें वीर सैनिक ग्राम गौरव योजना और सैन्य मातृशक्ति शामिल हैं। यह मोइरांग यात्रा (मणिपुर), कारगिल यात्रा और वालोंग यात्रा जैसी देशभक्ति यात्राएं भी आयोजित करती है, जो भारत के सैन्य इतिहास के महत्वपूर्ण पड़ावों का स्मरण कराती हैं।
विज्ञान भारती



















