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RSS : संगठित होती सज्जन-शक्ति

अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में बताया गया कि संघ शताब्दी वर्ष पर अंदमान से लेकर लद्दाख तक हो रहे हिंदू सम्मेलनों और कार्यक्रमों से सज्जन-शक्ति हो रही है संगठित। इससे समाज में सद्भाव तथा समरसता प्रगाढ़ हो रही है। पूर्वोत्तर भारत के कई स्थानों पर पहली बार हुए ऐसे कार्यक्रमों ने हिंदुओं के बीच जगाई है आशा की नई किरण

Written byPanchjanyaPanchjanya
Mar 21, 2026, 11:18 pm IST
in भारत, संघ को जानें, पंच परिवर्तन, संघ @100, हरियाणा
भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन कर प्रतिनिधि सभा का शुभारंभ करते सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत और श्री सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले प्रतिनिधि सभा के मंच पर विराजमान

भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन कर प्रतिनिधि सभा का शुभारंभ करते सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत और श्री सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले प्रतिनिधि सभा के मंच पर विराजमान

गत 13-15 मार्च तक माधव सृष्टि, समालखा (हरियाणा) में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा आयोजित हुई। इसका शुभारंभ 13 मार्च को सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत एवं सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले ने भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन कर किया। उद्घाटन सत्र के बाद सह सरकार्यवाह श्री सी. आर. मुकुंद ने पत्रकारों को बताया कि संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित प्रतिनिधि सभा की बैठक में देशभर से 1,400 से अधिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।

बैठक की शुरुआत में दिवंगत हुए विभिन्न प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इनमें प्रमुख रूप से शिव कथाकार सतगुरुदास महाराज, पर्यावरणविद् डॉ. माधव गाडगिल, पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री एवं लोकसभा अध्यक्ष शिवराज पाटिल, पर्यावरण के लिए समर्पित सालुमरदा थिमक्का, पुरातत्वविद् के. एन. दीक्षित, महाराष्ट्र के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, अभिनेता धर्मेंद्र देओल, तमिल फिल्म निर्माता ए.वी.एम. सरवनन, मिजोरम के पूर्व राज्यपाल स्वराज कौशल, शिक्षाविद् विनय हेगड़े, कम्युनिस्ट नेता आर. नल्लकणु, वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक प्रफुल्ल गोविंद बरुआ के नाम सम्मिलित हैं।

स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन

श्री मुकुंद ने बताया कि देशभर में संघ शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम चल रहे हैं, जिनमें समाज की सज्जन-शक्ति के सहयोग और सहभाग ने स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन किया है। उन्होंने बताया कि शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की शुरुआत 02 अक्तूबर, 2025 को नागपुर में पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद एवं सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत के सान्निध्य में हुई। इससे एक दिन पूर्व भारत सरकार ने संघ शताब्दी वर्ष के उपल्क्ष्य पर संघ पर डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी किया था।

प्रतिनिधि सभा के मंच पर विराजमान श्री मोहनराव भागवत और श्री दत्तात्रेय होसबाले

पत्रकार वार्ता में सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले से पूछे गए प्रश्नों के उत्तर

“संघ विश्व में शांति चाहता है”

ईरान के प्रति भारत के रुख पर संघ का क्या दृष्टिकोण है?
यह विश्वास है कि भारत सरकार देश के हित में सही निर्णय ले रही होगी। संघ विश्व में शांति चाहता है।

संघ में मुसलमानों और महिलाओं की सदस्यता को लेकर क्या कहेंगे?
किसी भी धर्म का व्यक्ति यहाँ आ सकता है और भगवा ध्वज को प्रणाम कर सकता है। पहले भी बड़ी संख्या में मुस्लिम कार्यकर्ता संघ में रहे हैं। महिलाएं केवल शाखा के कार्य में ही नहीं, बल्कि संघ की अन्य कार्य-प्रणालियों में भी बड़ी संख्या में सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं।

आवारा पशुओं (विशेषकर गौवंश) के संबंध में संघ क्या कर रहा है?
सरकार और नगर निगम लगातार प्रयास कर रहे हैं। लेकिन लोगों को समझना चाहिए कि गाय केवल दूध के लिए ही नहीं होती, उसका गोमूत्र और गोबर भी अत्यंत उपयोगी है। इसलिए उन्हें सड़कों पर बेसहारा नहीं छोड़ना चाहिए।

भाजपा और संघ के बीच क्या संबंध है?
देश में अनेक विचारधाराएं हैं, लेकिन भरतीय विचार धारा को केवल भाजपा ने अपनाया है। अन्य दलों ने संघ के लिए अपने द्वार बंद रखे। इसलिए संघ के अनेक कार्यकर्ता राजनीति में गए और राष्ट्रीय हित के विचारों को आगे बढ़ा रहे हैं।
यूजीसी विवाद पर आपका क्या कहना है?
यह मामला वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। इसलिए संघ इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं करेगा। न्यायालय के निर्णय के बाद ही संघ कुछ कह सकेगा।

उन्होंने बताया कि संघ के शताब्दी वर्ष में दो प्रकार के कार्यक्रमों की योजना बनाई गई, जिनमें एक संगठन विस्तार और दूसरा समाज की सज्जन-शक्ति को सद्भाव, समरसता के लिए संगठित करने का उद्देश्य रखा गया। इस दृष्टि से गृह संपर्क अभियान चल रहा है, जिसके अंतर्गत अभी तक देश के कुछ प्रांतों में ही 10 करोड़ घरों तथा 3,90,000 गांवों तक संपर्क किया जा चुका है और अन्य प्रांतों में यह अभियान जारी है। गृह संपर्क में वर्ग और समुदाय के किसी पूर्वाग्रह के बिना घरों में जाकर परिवारों से मिलकर संघ के विषय में संवाद किया गया। सिर्फ केरल का ही उदाहरण लें तो वहां 55,000 से ज्यादा मुस्लिम घरों में तथा 54,000 से ज्यादा ईसाई परिवारों में संपर्क किया गया और इन सभी परिवारों ने स्वयंसेवकों का स्वागत किया।

उन्होंने बताया कि देशभर में अभी तक 36,000 से अधिक स्थानों पर हिंदू सम्मेलनों का आयोजन हो चुका है, जिनमें शहरी, ग्रामीण, दुर्गम जनजातीय क्षेत्र सहित सभी प्रकार के स्थान सम्मिलित हैं। इसमें अरुणाचल प्रदेश के एक दुर्गम क्षेत्र में आयोजित हिंदू सम्मेलन का उदाहरण उल्लेखनीय है, जहां लोगों ने कहा कि वे पहली बार इस प्रकार की आत्मीयता अनुभव कर रहे हैं। हिंदू सम्मेलनों का आयोजन निरंतर जारी है।

पंच परिवर्तन के प्रयास

श्री मुकंद ने कहा कि समाज-हित के लिए सज्जन-शक्ति को संगठित करने की दृष्टि से प्रमुख नागरिक संगोष्ठियां आयोजित की गईं। दोनों प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के भीतर पंच परिवर्तन के व्यापक लक्ष्य के लिए वातावरण बन रहा है। पंच परिवर्तन में सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण चेतना, स्व एवं स्वदेशी के लिए गर्व, परिवार व्यवस्था के संरक्षण तथा नागरिक कर्तव्यों के लिए जागरूकता शामिल हैं। इन परिवर्तनों के माध्यम से ही देश और समाज को महान बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि संघ के सरसंघचालक जी भी इन विषयों पर समाज के साथ सीधा संवाद स्थापित करने के लिए चारों महानगरों सहित राज्यों की राजधानियों में कार्यक्रमों में सहभाग कर रहे हैं। सरसंघचालक जी ने केवल चार महानगरों में आयोजित कार्यक्रमों में नागरिकों के साथ संवाद करते हुए 1,000 से अधिक प्रश्नों के उत्तर दिए तथा इस प्रश्नोत्तर में 20 घंटे से अधिक का समय लगा।

उन्होंने कहा कि संघ कार्य का निरंतर विस्तार हो रहा है और पिछले एक वर्ष में नए स्थानों पर नई शाखाओं का संचालन प्रारंभ हुआ है। संघ का प्रयास है कि आने वाले समय में गांवों और कस्बों में अधिक से अधिक शाखाएं प्रारंभ हों और समाज जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सके।

प्रतिनिधि सभा में भाग लेते देशभर से आए कार्यकर्ता

सबकी कुशलता की कामना

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का भी संघ ने स्वागत किया। श्री मुकुंद ने कहा कि इसी प्रकार मणिपुर में भी शांति और स्थायित्व की स्थिति बहाल होना संतोषजनक है और इसमें संघ के स्वयंसेवकों की भूमिका भी उल्लेखनीय है। पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने आशा जताई कि वहां हिंदू समाज के साथ परिस्थितियां बेहतर होंगी।

उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य समाज की सज्जन-शक्ति को एकत्रित कर राष्ट्र निर्माण के कार्य में आगे बढ़ना है। संघ का यह शताब्दी वर्ष कार्यक्रम अक्तूबर 2026 तक विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से जारी रहेगा। संघ विश्व में शांति एवं सबकी कुशलता की कामना करता है।

प्रेस वार्ता में अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री सुनील आंबेकर, सह प्रचार प्रमुख द्वय श्री नरेंद्र ठाकुर एवं श्री प्रदीप जोशी सहित अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।

प्रांत के स्थान पर होंगे संभाग

बैठक के अंतिम दिन यानी 15 मार्च को सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि पिछले वर्ष में संगठन कार्य का उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। संघ की शाखाएं लगभग 6,000 की वृद्धि के साथ 88,000 से अधिक हो गई हैं तथा स्थान भी बढ़कर 55,000 से अधिक हो गए हैं। इसके साथ ही साप्ताहिक मिलन और मंडली की संख्या भी बढ़ी है। संगठन कार्य में विस्तार को इस प्रकार देखना भी आवश्यक है कि अंदमान, अरुणाचल प्रदेश, लेह और दुर्गम जनजातीय क्षेत्रों में भी संघ की शाखाएं संचालित हो रही हैं। संघ शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में भी इस सांगठनिक विस्तार को स्पष्टता से देखा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि सांगठनिक विस्तार के साथ संघ समाज में गुणवत्ता संवर्धन के लिए भी निरंतर कार्य कर रहा है। पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज को सकारात्मक परिवर्तन के लिए प्रेरित करना महत्वपूर्ण है। भारतीय अथवा हिंदुत्व केवल एक विचार नहीं, बल्कि जीवन-शैली है और इसके माध्यम से समाज में गुणवत्ता का विस्तार होना चाहिए। इसी उद्देश्य से समाज की सज्जन-शक्ति को एकत्र करना और Power of Good का राष्ट्रहित में प्रवृत्त होना आवश्यक है। सरकार्यवाह जी ने कहा कि समाज में महापुरुषों के कार्यों को जाति, पंथ के भेद से ऊपर उठकर स्वीकार करना चाहिए और उनके माध्यम से समाज को सकारात्मक परिवर्तन के लिए आगे बढ़ना चाहिए। संघ के स्वयंसेवकों ने इसी दिशा में नवम गुरु श्री तेग बहादुर जी के बलिदान के 350वें वर्ष के अवसर पर देशभर में 2,000 से अधिक कार्यक्रम किए, जिनमें 7 लाख से अधिक लोग सम्मिलित हुए। इसी प्रकार राष्ट्रगीत वंदेमातरम् की 150वीं वर्षगांठ भी उत्साहपूर्वक मनाई गई। आगामी वर्ष में संत शिरोमणि रविदास जी महाराज के 650वें प्राकट्य वर्ष पर कार्यक्रमों की योजना बनी है।

विश्व संघ शिविर

संघ शताब्दी वर्ष में विदेशों में रहने वाले संघ स्वयंसेवकों के प्रयास से विश्व संघ शिविर भी संपन्न हुआ। भाग्यनगर (तेलंगाना) के कान्हा शांतिवनम् के विशाल परिसर में 25-28 दिसंबर, 2025 तक आयोजित इस शिविर में विश्व के 71 देशों से 1026 बंधु, 585 भगिनी ऐसे कुल 1611 स्वयंसेवक और परिवार जन उपस्थित रहे। ‘धर्मे सर्व प्रतिष्ठितम्’ यह शिविर का ध्येय वाक्य था। 25 दिसंबर को उद्घाटन कार्यक्रम में पूज्य संत गोविंद देव गिरि जी का उद्बोधन हुआ। विविध सत्रों में भारत के बाहर के देशों में हिंदू समाज के संगठन के प्रयास, हिंदू विचार एवं संस्कृति का प्रचार व प्रबोधन, परिवारों में अपने जीवन मूल्यों का पालन, युवाओं में कार्य आदि विषयों पर चर्चा, संघ की यात्रा, संत एवं लोक साहित्य में धर्म ऐसे विषयों पर बौद्धिक की योजना बनी थी। 28 दिसंबर को संपन्न समापन समारोह में सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत का मार्गदर्शन मिला।

पत्रकार वार्ता को संबोधित करते श्री सी. आर. मुकुंद। साथ में हैं श्री सुनील आंबेकर

96 प्रशिक्षण वर्ग

उन्होंने संघ के आगामी वर्ष के नियमित प्रशिक्षण वर्गों की जानकारी दी और बताया कि 11 क्षेत्र के वर्ग तथा एक नागपुर के वर्ग को मिलाकर कुल 96 प्रशिक्षण वर्ग संचालित किए जाएंगे। प्रतिनिधि सभा में गोसेवा और ग्राम विकास की योजनाओं पर भी विचार किया गया। नागरिकों को प्रेरित किया जाएगा कि वे घर की छत पर सब्जी उगाएं, उसमें देसी गोबर और गोमूत्र की खाद का उपयोग करें, जिससे गोसंवर्धन में सभी सहयोग कर सकते हैं। इसी तरह हरित घर बनाने का भी संकल्प नागरिक ले सकते हैं, जिससे घर में पॉलीथीन का न्यूनतम उपयोग, जल संरक्षण आदि प्रयास किए जा सकते हैं।

संघ की संगठनात्मक संरचना में परिवर्तन संबंधित प्रश्न पर उन्होंने कहा कि संरचना में विकेंद्रीकरण पर विचार हुआ है, जिसमें प्रांत के स्थान पर छोटी इकाई संभाग बनाने का प्रस्ताव है। इसके लागू होने पर 46 प्रांतों के स्थान पर 80 से अधिक संभाग होंगे। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में सरकार्यवाह जी ने कहा कि समाज में जातिगत आधार पर विभेद को समाप्त करने के लिए मीडिया को भी आगे आना चाहिए और किसी भी चुनाव में मतदाताओं की संख्या का जाति आधारित आकलन बंद करना चाहिए। उन्होंने वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में देश की सरकार द्वारा राष्ट्रहित में किए जा रहे कूटनीतिक प्रयासों की सराहना की और कहा कि संघ विश्व में शांति और विकास का पक्षधर है।

झलक हरियाणवी गौरव की

प्रदर्शनी का उद्घाटन करते डॉ. कृष्ण गोपाल

प्रतिनिधि सभा में एक विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित हुई। इसका उद्घाटन सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने किया। प्रदर्शनी में नौवें सिख गुरु महान बलिदानी श्री गुरु तेगबहादुर जी के जीवन की झलकियां तथा हरियाणा प्रदेश के ऐतिहासिक, पौराणिक स्थलों के साथ विभिन्न महान विभूतियों के जीवन, विचारों और समाज के प्रति उनके योगदान को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी के चार प्रमुख भाग रहे। एक हिस्से में हरियाणा के महान स्वतंत्रता-सेनानी, वीर योद्धा, महान खिलाड़ियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धि प्राप्त व्यक्तित्वों के विवरण और चित्र थे। दूसरे भाग में सिखों के नवम गुरु श्री गुरु तेगबहादुर जी के जीवन के अनेक महत्वपूर्ण प्रसंगों को चित्रों के माध्यम से दिखाया गया। देश और समाज के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने वाले श्री गुरु तेगबहादुर जी के बलिदान का यह 350 वां वर्ष है और इस अवसर पर यह प्रदर्शनी आगंतुकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इसके अतिरिक्त प्रदर्शनी में सरस्वती नदी तथा भगवद्गीता से हरियाणा की भूमि के सनातन संबंध को दर्शाने वाली सामग्री भी प्रदर्शित की गई। प्रदर्शनी में हरियाणा में संघ कार्य के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले दिवंगत स्वयंसेवकों के भी चित्र शामिल थे। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिवंगत प्रचारकों के चित्र व जीवन परिचय भी प्रदर्शनी में दिखाए गए।

प्रदर्शनी में प्रथम खालसा राज्य की राजधानी लोहागढ़ किला, श्री गुरु तेगबहादुर जी के जीवन से संबंधित विभिन्न घटनाओं के चित्र, उत्तर भारत के प्रथम महिला विश्वविद्यालय के संस्थापक तथा नारी शिक्षा के पुरोधा भक्त फूलसिंह, हरियाणवी रागनी विधा के शिखर पुरुष व महान सूर्य कवि दादा लख्मीचंद, महान किसान नेता दीनबंधु सर छोटू राम, स्वतंत्रता सेनानी और महान योद्धा राव तुलाराम, 1857 की क्रांति के बलिदानी सेठ हुकुमचंद जैन, अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष छेड़ने वाले बल्लभगढ़ के राजा नाहर सिंह, श्री गुरु तेगबहादुर जी के शीश के सम्मान की रक्षा के लिए अपना शीश देने वाले सोनीपत के बढ़खालसा गांव के कुशाल सिंह दहिया, औरंगजेब से लड़ने वाले महान वीर गोकुला जाट, मेवात में कन्वर्जन रोकने वाले दादा कान्हा, बाजे भगत, कवि फौजी मेहर सिंह, प्रसिद्ध संगीतकार पंडित जसराज, परमवीर चक्र विजेता होशियार सिंह, जनरल वी.के. सिंह, जनरल दलबीर सिंह सुहाग, निर्धन बालकों को शिक्षा देने वाले सेठ छज्जूराम, गोरक्षक हरफूल जाट, हसन खान मेवाती, क्रिकेटर कपिल देव, ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा, साइना नेहवाल, बाबा रामदेव, दिल्ली की गद्दी पर अंतिम हिंदू सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य, आर्य समाजी स्वामी उमानंद सरस्वती, बॉलीवुड कलाकार रणदीप हुड्डा, संगीतकार जोड़ी जतिन—ललित जैसे हरियाणा की विभूतियों के चित्र प्रदर्शित किए गए।

प्रदर्शनी का उद्देश्य समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना तथा महान व्यक्तित्वों के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना था।

सबके पूर्वज एक

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार ने किसी समुदाय और पंथ-पूजा पद्धति के विरोध के लिए संघ की स्थापना नहीं की। संघ के दूसरे सरसंघचालक श्रीगुरुजी ने भी कहा था कि हम सबके पूर्वज एक हैं और पूजा-पाठ की पद्धति की भिन्नता से कोई अंतर नहीं आता। इसमें डीएनए शब्द नहीं था, किंतु अभिप्राय यही था। तीसरे सरसंघचालक श्री बालासाहब देवरस ने भी कहा था, ”भारत को अपनी मातृभूमि व अपना राष्ट्र मानने वाले और भारतीयता को जीने वाले सभी हिंदू हैं।

संघ में सबका स्वागत है, जो भी समाज के लिए अच्छा कार्य कर रहा है, हम उसको संघ का स्वयंसेवक ही मानते हैं।” उन्होंने बताया कि अंदमान में प्रमुख 9 द्वीपों में से 13 हजार से अधिक लोग सरसंघचालक जी की उपस्थिति में हुए हिंदू सम्मेलन में सम्मिलित हुए। इसी प्रकार अरुणाचल प्रदेश जैसे कम जनसंख्या घनत्व वाले प्रदेश में भी 21 स्वधर्म सम्मेलनों में 37 हजार से अधिक लोगों ने सहभागिता की।

‘संत रविदास ने जगाई नई चेतना’

प्रतिनिधि सभा में संत शिरोमणि श्री रविदास जी के 650वें प्राकट्य वर्ष के अवसर पर सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले द्वारा जारी वक्तव्य

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संत शिरोमणि सद्गुरु रविदास जी के 650वें प्राकट्य वर्ष के अवसर पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करता है। हमारी श्रेष्ठ संत परंपरा ईश्वर की भारत को एक विशिष्ट देन है। हमारे प्रदीर्घ इतिहास के प्रवाह में इस महान संत परंपरा ने जहां समाज में ईश्वर की उपासना और भक्ति भाव का जागरण किया, वहीं सामाजिक कुरीतियां और भेदभाव का उन्मूलन करते हुए समरस समाज के दृढ़ीकरण के प्रयास किए। साथ ही उन्होंने विदेशी शासकों के अत्याचारों के विरुद्ध संघर्ष के लिए समाज को जागृत और सिद्ध भी किया है। इस महान संत परंपरा में संत श्री रविदास जी का विशिष्ट स्थान है। उनका कर्मशील जीवन और कार्य हम सबके लिए प्रेरणास्रोत है। गृहस्थ होते हुए भी सांसारिक बातों से अलिप्त रहकर साधु-संतों के प्रति श्रद्धा और दीन-हीनों के प्रति सेवा उनका सहज स्वभाव था, जो आध्यात्मिक दृष्टि से परिपूर्ण था। उन्होंने अपने जीवन से समाज में श्रम की प्रतिष्ठा और शुद्ध, सात्विक एवं पारदर्शी आचरण की महत्ता पुनस्स्थापित की।

संत श्री रविदास जी भक्ति की भाव-धारा के महान संत थे, जिन्होंने समाज में एक नई चेतना प्रवाहित की। उन्होंने जन्म के आधार पर ऊंच-नीच के भेद को नकारते हुए आचरण को ही श्रेष्ठता की कसौटी माना। रूढ़ियों और कुरीतियों से समाज की मुक्ति तथा कालबाह्य परंपराओं को त्यागने और काल—सुसंगत सामाजिक परिवर्तनों को अंगीकार करने हेतु समाज का मानस बनाने में उनकी ऐतिहासिक भूमिका रही है। उनके विचारों का महत्व समझकर श्री गुरुग्रंथ साहिब में उनकी 41 वाणियों को ‘शबद’ रूप में समाहित किया गया है।

सामान्य पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने वाले संत श्री रविदास जी का ईश्वर-भक्ति, सेवा भाव तथा समाज के प्रति निश्छल प्रेम के कारण काशी के विद्वत्-जन सहित समाज के सभी वर्गों ने उनकी महानता को स्वीकृत किया। काशी नरेश, झाली रानी तथा मीराबाई जैसे राजपरिवारों के सदस्यों ने भी उनको अपना गुरु माना। गुरु और शिष्य के रूप में संत श्री रविदास जी और मीराबाई का नाता निर्गुण और सगुण भक्ति धाराओं का मिलन है तथा जातिभेद मानने वालों के लिए अनुकरणीय सीख भी है। मुस्लिम आक्रमणकारियों के आतंक के उस कठिन काल में भक्ति की निर्मल धारा को प्रवाहित करते हुए संत श्री रविदास जी ने धर्म की श्रेष्ठता की उद्घोषणा की और लोगों से धर्मपालन का आग्रह किया।सद्गुरु संत श्री रविदास जी को मतांतरित कर मुस्लिम बनाने के अनेक प्रयास हुए, किन्तु उनकी भक्ति और आध्यात्मिक साधना से प्रभावित होकर उन्हें मतांतरित करने वाले ही उनके अनुयायी बन गए। वर्तमान समय में जब विविध विभाजनकारी शक्तियां जन-मानस को वर्ग और जाति के आधार पर बांटने का प्रयास कर रही हैं, तब पूज्य संत श्री रविदास जी के जीवन-संदेश के मर्म को समझकर हम सभी को देश और समाज की एकात्मता के लिए कार्य करने का संकल्प लेने की आवश्यकता है।

  1. व्यापक गृह एवं ग्राम संपर्क
    स्वरूप : प्रांतों में 3-4 सप्ताह में स्वयंसेवकों की छोटी छोटी टोली द्वारा अधिकाधिक ग्राम एवं गृह संपर्क करना।
    उद्देश्य : संघ के 100 वर्ष की यात्रा व संघ कार्य के परिचय देना, वर्तमान परिस्थिति में अपनी भूमिका और पंच परिवर्तन के विषय पहुँचाना।
    सामाजिक सद्भाव बैठक
    स्वरूप : खंड / नगर स्तर पर सकल समाज के प्रमुखों व संतों की बैठक, चिंतन-मंथन ।
    उद्देश्य: सामाजिक व धार्मिक नेतृत्व में सामंजस्य एवं परस्पर सहयोग, दुर्बल समूहों के अभाव का निराकरण, सामूहिक चिंतन व प्रयास का अभ्यास एवं सामाजिक शक्ति वर्धन। पंच परिवर्तन के क्रियान्वयन हेतु चर्चा।
  2. प्रमुख नागरिक गोष्ठी
    स्वरूप : जिला स्तर पर समाज के विविध श्रेणी के चयनित प्रमुख व्यक्तियों के 2-4 घंटों की चिंतन सभा।
    उद्देश्य : संघ कार्य, हिंदुत्व, वर्तमान राष्ट्रीय परिस्थिति में अपनी भूमिका, पंच परिवर्तन आदि विषयों पर विषय प्रस्तुति, संवाद, जिज्ञासा समाधान के द्वारा वैचारिक तथा दायित्व जागरण।
  3. हिन्दू सम्मेलन
    स्वरूप : मंडल एवं बस्ती के स्तर पर (अथवा उनके प्रतिनिधित्व) हिन्दू समाज के 3-4 घंटों का सम्मेलन।
    आयोजक : स्थानीय प्रमुख व्यक्तियों की समिति
    उद्देश्य : हिन्दू समाज की सांस्कृतिक एकता व संगठित शक्ति, हिंदुत्व/धर्म जागरण और पंच परिवर्तन का आचरण।
  4. युवा कार्यक्रम
    स्वरूप : स्थानीय योजनानुसार विविध स्तरों पर तरुण विद्यार्थी/युवाओं का एकत्रीकरण, सभा, संवाद।
    उद्देश्य : युवा पीढ़ी में राष्ट्र बोध, संगठन स्वभाव एवं समाज परिवर्तन के प्रयत्न की वृद्धि, युवकों में कार्य बढ़ाना।

सेवा है यज्ञ कुंड, समिधा सम हम जलें
आरोग्य भारती

आरोग्य भारती देश के 44 प्रांतों में कार्य कर रही है। इसका संगठनात्मक ढांचा 977 जिलों तक फैला है तो वहीं वर्तमान में 900 जिलों में संगठन सक्रिय रूप से काम कर रहा है। अपनी चल रही गतिविधियों के अंतर्गत 10,485 आरोग्य मित्र (6,975 पुरुष और 3,562 महिलाएँ) 30 प्रांतों के 199 जिलों में 436 स्थानों पर सक्रिय हैं। 37 प्रांतों के 277 जिलों में 747 योग केंद्रों पर 20,507 लोग नियमित रूप से योग का अभ्यास करते हैं। संगठन के 4,640 सक्रिय कार्यकर्ता 42 प्रांतों के 841 जिलों में 905 स्थानों पर कार्य कर रहे हैं। विद्यालय स्वास्थ्य कार्यक्रम 40 प्रांतों के 543 जिलों में 1,292 स्थानों पर संचालित किए जा रहे हैं, जबकि महिलाओं से जुड़ी गतिविधियां 33 प्रांतों के 203 जिलों में 283 स्थानों पर संचालित हो रही हैं, जिनमें 6,047 महिलाएँ शामिल हैं।
भारत विकास परिषद
भारत विकास परिषद एक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है, जो समाज के विभिन्न वर्गों को एक साथ लाते हुए उन्हें सेवा, संस्कार आदि के माध्यम से सामाजिक उत्थान के कार्य करने के लिए प्रेरित करता है। यह संगठन शिक्षा, स्वावलंबन, स्वास्थ्य, पर्यावरण आदि क्षेत्रों में कार्य करता है। 2025-26 के दौरान संस्कार गतिविधियों के अंतर्गत, राष्ट्रीय समूह गान प्रतियोगिता (NGSC) 1,008 शाखाओं में आयोजित की गई, जिसमें 5,288 विद्यालय शामिल थे और 3,98,563 प्रतिभागियों ने भाग लिया। एक अन्य कार्यक्रम, “भारत को जानो”, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय मूल्य, संस्कृति और परंपराओं का ज्ञान बढ़ाना है को 1,112 शाखाओं में 15,851 विद्यालयों में आयोजित की गई, जिसमें 19,59,211 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
सेवा गतिविधियों के अंतर्गत विभिन्न स्वास्थ्य और सेवा शिविर आयोजित किए गए। इनमें 544 रक्तदान शिविर, जिनसे 59,036 लोग लाभान्वित हुए। 162 दिव्यांग शिविर हुए, जिनसे 15,610 लोग लाभान्वित हुए। 860 स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए गए, जिनसे 1,36,749 लोग लाभान्वित हुए। 292 नशामुक्ति शिविर, जिनसे 53,946 लोग लाभान्वित हुए और 717 नेत्र जांच शिविर, जिनसे 93,942 लोग लाभान्वित हुए हैं। इसके अतिरिक्त, 2,698 एनीमिया परीक्षण शिविरों से 4,08,923 लोग लाभान्वित हुए। 873 योग कार्यक्रमों से 50,028 लोग लाभान्वित हुए, जबकि स्वास्थ्य केंद्रों ने 13,88,103 लोगों को सेवा प्रदान की। कुल मिलाकर, 6,350 सेवा शिविरों से 22,06,541 लोग लाभान्वित हुए।
दीनदयाल शोध संस्थान
यह संगठन मुख्य रूप से कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, संस्कार, सामाजिक समरसता के क्षेत्रों में कार्य करता है। संगठन का कार्य मुख्यत: छह प्रांतों-चित्रकूट, गोंडा, बलरामपुर, बीड, नागपुर और दिल्ली में संचालित होता है। कृषि के क्षेत्र में संगठन चित्रकूट, सतना, गोंडा और बीड में चार कृषि विज्ञान केंद्र संचालित करता है, जो बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों और घटती भूमि जोत के बीच किसानों की आय बढ़ाने में सहायता कर रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से 1,071 गांवों के 2,19,476 किसानों को परामर्श सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। शिक्षा क्षेत्र में संस्थान आठ शैक्षिक परियोजनाएं संचालित करता है, जिनमें तीन उच्च माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं, जिनमें 2,276 छात्र हैं। मझगवां (सतना), चित्रकूट और इमिलिया कोडर (बलरामपुर) स्थित आवासीय विद्यालय में 518 वनवासी बालक-बालिकाओं को शिक्षा प्रदान की जा रही है। 31 अक्टूबर से 2 नवंबर 2025 तक, “Innovations and Beyond” विषय पर एक इंडो-यूके अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन चित्रकूट में सेवा यूके और इंडो यूके के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें भारत और यूके के वरिष्ठ दंत विशेषज्ञों ने भाग लिया।
नेशनल मेडिकोज ऑर्गनाइजेशन (NMO)
नेशनल मेडिकोज़ ऑर्गनाइजेशन 1977 से “स्वास्थ्य सेवा से राष्ट्र सेवा” की भावना को लेकर देशभर में कार्य कर रहा है। वर्तमान में संगठन के 20,000 से अधिक सदस्य हैं और कार्यकर्ता तथा सदस्य देश के सभी प्रांतों में कार्य कर रहे हैं। NMO ने 2027-28 के स्वर्ण जयंती वर्ष तक अपनी सदस्यता को 50,000 तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
यह संगठन नियमित रूप से आंबेडकर जयंती और बिरसा मुंडा जयंती जैसे अवसरों पर स्वास्थ्य सेवा शिविर आयोजित करता है। ये शिविर मुख्यतः वनवासी क्षेत्रों और शहरी झुग्गी बस्तियों में आयोजित किए जाते हैं। पिछले वर्ष झाबुआ (मध्य प्रदेश), झारखंड, राजस्थान और गुजरात में प्रमुख स्वास्थ्य सेवा गतिविधियाँ संचालित की गईं, जहाँ लगभग 50,000 मरीजों को चिकित्सा सेवाएँ प्राप्त हुईं।
सक्षम
समदृष्टि, क्षमता विकास एवं अनुसंधान मंडल (सक्षम) दिव्यांग व्यक्तियों के सशक्तिकरण और एकीकरण के लिए समर्पित है। संगठन सेवा, जागरूकता और पुनर्वास पहलों के माध्यम से दिव्यांग समुदाय के बीच समान अवसर, सुगमता और स्वावलंबन को बढ़ावा देने का कार्य करता है। वर्तमान में, सक्षम की गतिविधियां 410 जिलों में संचालित हो रही हैं। संगठन 221 दिव्यांग सेवा केंद्र संचालित करता है। अपनी विभिन्न पहलों के माध्यम से, सक्षम ने 4,65,659 व्यक्तियों तक पहुँच बनाकर उन्हें लाभान्वित किया है।
सेवा भारती
सेवा भारती “नर सेवा नारायण सेवा” के ध्येय को लेकर कार्य करती है। यह समाज के वंचित, उपेक्षित और पिछड़े वर्गों के उत्थान पर केंद्रित है। विभिन्न स्वैच्छिक सेवा संस्थाओं के समन्वय मंच के रूप में कार्य करते हुए, सेवा भारती शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में कार्य करती है। वर्तमान में कुल 53,892 सेवा प्रकल्प चार प्रमुख क्षेत्रों में संचालित किए जा रहे हैं। इनमें 24,593 शिक्षा में, 9,098 स्वास्थ्य में, 9,720 स्वावलंबन में और 10,481 सामाजिक गतिविधियों में। इसके अतिरिक्त, देशभर में 55,958 सेवा पहलें आयोजित की गई हैं, जिनमें 14,298 शिक्षा में, 17,485 स्वास्थ्य में, 4,429 स्वावलंबन में, और 19,746 सामाजिक क्षेत्रों में हैं।
सेवा भारती देशभर में आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेती है। पिछले एक वर्ष के दौरान प्राकृतिक आपदाओं में सेवा भारती के स्वयंसेवक तुरंत प्रभावित क्षेत्रों में पहुँचे और राहत एवं पुनर्वास सहायता प्रदान की। जम्मू-कश्मीर के रामबन में प्राकृतिक आपदा के दौरान स्वयंसेवकों ने अनेक तरह से प्रभावितों की सेवा की और निःशुल्क चिकित्सा शिविर आयोजित किए। हिमाचल प्रदेश में भीषण बाढ़ के दौरान सेवा भारती के कार्यकर्ताओं ने प्रभावित परिवारों को भोजन, कपड़े, दवाइयाँ और आवश्यक राहत सामग्री प्रदान की। केरल में सेवा भारती ने घरों का निर्माण कर आपदा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास में सहायता की, जिससे उन्हें अपने जीवन को पुनः स्थापित करने में मदद मिली।
आर्थिक
भारतीय मजदूर संघ
भारतीय मजदूर संघ 31 प्रांतों के 710 जिलों में सक्रिय है और लगभग 603 जिलों में उसकी समितियां स्थापित हैं। वर्ष 2025 में संगठन ने ओडिशा स्थित पुरी में अपना 21वां अखिल भारतीय त्रैवार्षिक सम्मेलन आयोजित किया, जिसमें लगभग 2,300 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें 350 महिलाएं शामिल थीं। रूस, ब्राज़ील, इटली, बेलारूस, तुर्की, मिस्र, मॉरीशस और नेपाल सहित आठ देशों के प्रतिनिधियों ने इसमें भाग लिया। सम्मेलन के दौरान “ट्रेड यूनियन आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना: चुनौतियां और अवसर” विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी भी आयोजित की गई।
भारतीय मजदूर संघ की 70वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें जिला मुख्यालयों पर “पंच परिवर्तन” विषय पर मासिक व्याख्यान श्रृंखला, श्रमिक संपर्क अभियान, युवा और महिला सम्मेलन तथा राज्यवार और उद्योगवार अभ्यास वर्ग शामिल थे। साथ ही नए क्षेत्रों में विस्तार भी किया गया। संगठन ने कई अंतरराष्ट्रीय श्रम मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया, जिनमें ILO अंतरराष्ट्रीय श्रम सम्मेलन (जून 2025) और काठमांडू, श्रीलंका, जापान, चीन और बैंकॉक में आयोजित बैठकों में भागीदारी शामिल है।
अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत
अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा करने और नागरिकों में निष्पक्ष व्यापार प्रथाओं के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए कार्य कर रह रहा है। वर्तमान में संगठन का कार्य 11 क्षेत्रों में फैला हुआ है और यह 38 प्रांतों के 354 जिलों और 700 तहसीलों में सक्रिय है। जनवरी, 2025 से दिसंबर 2025 के बीच, संगठन ने 33,683 सदस्य जोड़े, जिनमें 32,058 ऑनलाइन सदस्यता और 1,625 ऑफलाइन सदस्यता शामिल है। पिछले तीन वर्ष में ग्राहक पंचायत विभिन्न मंचों के माध्यम से ऑनलाइन गेमिंग गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने के लिए सक्रिय रूप से अभियान चला रही है, जो आर्थिक शोषण का कारण बनती हैं। इन सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप सरकार ने नवंबर 2025 में “The Promotion and Regulation of Online Gaming Bill, 2025” पारित किया, जिसमें ऑनलाइन गेमिंग से संबंधित विज्ञापनों पर प्रतिबंध और बैंकों के माध्यम से ऐसे खेलों से जुड़े वित्तीय लेन-देन को निषिद्ध किया गया।
भारतीय किसान संघ
भारतीय किसान संघ पालमपुर अधिवेशन में बनाए गए योजना के अंतर्गत देशभर में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। इस पहल के तहत, विभिन्न प्रांतों में ग्राम समिति पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि जमीनी स्तर पर संगठनात्मक कार्य को मजबूत किया जा सके। अब तक प्राप्त जानकारी के अनुसार, 22 प्रांतों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिनमें 13,000 से अधिक ग्राम समितियाँ शामिल हुई हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से देशभर में लगभग 1.5 लाख लोगों को प्रशिक्षित किया गया है। प्रतिभागियों में 4,000 से अधिक महिला कार्यकर्ता भी शामिल थीं, जो संगठनात्मक गतिविधियों में बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। संगठन ने यह भी सुझाव दिया है कि सरकार किसानों के समर्थन और कृषि स्थिरता को मजबूत करने के लिए बिना जीएम सामग्री के अधिक गैरजीएम हाइब्रिड कपास बीजों के विकास, उत्पादन और वितरण को प्रोत्साहित करे।
सहकार भारती
सहकार भारती राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आदर्शों से प्रेरित होकर सहकार क्षेत्र में कार्य करती है। संगठन का उद्देश्य उत्पादकों, वितरकों और उपभोक्ताओं के बीच समन्वय को बढ़ावा देकर भारत में सहकारी आंदोलन को मजबूत करना है। सहकार भारती ने अपने संगठनात्मक ढांचे का व्यापक विस्तार किया है और देशभर में कार्य कर रही है। 753 जिलों में से संगठन ने 536 जिलों में कार्यकारिणी समितियाँ स्थापित की हैं और 652 जिलों में संपर्क बनाए रखा है। अपने संगठनात्मक ढांचे के अंतर्गत, 824 संरचनात्मक जिले बनाए गए हैं, जिनमें से 710 जिलों में सक्रिय रूप से गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं।
स्वदेशी जागरण मंच
स्वदेशी जागरण मंच पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानव दर्शन से प्रेरित भारतीय विकास मॉडल को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रहा है। वर्तमान में संगठन 45 प्रांतों और 578 जिला इकाइयों में कार्य कर रहा है। इसके संगठनात्मक ढांचे में 22 केंद्रीय पदाधिकारी, 11 क्षेत्रीय संयोजक, 7 क्षेत्रीय संगठन मंत्री और अन्य वरिष्ठ कार्यकर्ता शामिल हैं। गत वर्ष देशभर में 42 स्वदेशी मेलों का आयोजन किया गया, जिनमें लगभग 80 लाख लोगों ने भाग लिया, जबकि 6,512 छोटे व्यापारियों को स्टॉल के माध्यम से बाजार तक पहुँच मिली। “वंदे मातरम्” की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में NCUI ऑडिटोरियम, सीरी फोर्ट में एसजेएम और सहयोगी संगठनों की भागीदारी से एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। 12 जनवरी (स्वामी विवेकानंद जयंती) से 23 जनवरी 2026 (सुभाष चंद्र बोस जयंती) तक, 45 प्रांतों के 564 जिलों में 52,635 स्वदेशी संकल्प रन आयोजित की गईं, जिनमें 68,29,360 युवाओं ने भाग लिया।
लघु उद्योग भारती
लघु उद्योग भारती भारत में सूक्ष्म और लघु उद्योगों के संरक्षण, संवर्धन और कल्याण के लिए समर्पित है। पिछले 32 वर्षों से अधिक समय से, संगठन छोटे उद्यमियों को मजबूत करने और आत्मनिर्भर आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रहा है। संगठन ने 27 प्रांतों में अपनी उपस्थिति स्थापित की है, जिसमें 605 जिलों और 1,300 औद्योगिक क्षेत्रों में गतिविधियाँ संचालित हैं। यह 1,075 इकाइयों के माध्यम से कार्य करती है, जिनमें 664 पुरुष इकाइयाँ, 60 महिला इकाइयाँ और 351 समन्वय इकाइयाँ शामिल हैं। संगठन का मजबूत सदस्य आधार है, जिसमें कुल 64,439 सदस्य हैं, जिनमें 59,262 पुरुष सदस्य और 5,435 महिला सदस्य शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, लघु उद्योग भारती 25 उत्पाद समूहों और 33 गतिविधि क्षेत्रों के माध्यम से कार्य करते हुए उद्यमियों का समर्थन कर रही है और भारत के लघु उद्योग पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बना रही है।
क्रीड़ा भारती
क्रीड़ा भारती की स्थापना 1992 में एक स्वस्थ, अनुशासित और आनंदमय समाज के निर्माण के उद्देश्य से खेल और शारीरिक गतिविधियों के माध्यम से की गई थी। संगठन देशभर में सक्रिय है और कई राज्यों तथा 554 जिलों में इसकी कार्यात्मक इकाइयाँ हैं। पिछले वर्ष के दौरान कई राष्ट्रीय स्तर की गतिविधियाँ आयोजित की गईं। 21 जून को देशभर में बड़े पैमाने पर सूर्य नमस्कार और योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। क्रीड़ा ज्ञान परीक्षा में 626 जिलों से प्रतिभागियों ने भाग लिया। इन पहलों के माध्यम से क्रीड़ा भारती भारत में खेल और फिटनेस की संस्कृति को मजबूत कर रही है।
महिला समन्वय
महिला समन्वय विभिन्न कार्यक्रमों और पहलों के माध्यम से महिलाओं की भागीदारी और विभिन्न संगठनों के बीच समन्वय को मजबूत करने के लिए कार्य कर रहा है। “ऑपरेशन सिंदूर” के समर्थन में, 44 प्रांतों में 837 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें कुल 1,64,179 महिलाओं ने भाग लिया। राष्ट्रीय महिला आयोग के सहयोग से गत वर्ष के दौरान चार राज्यों में 9 “प्री-मैरेटियल डायलॉग सेंटर” प्रारंभ किए गए। महिलाओं के सशक्तिकरण के अंतरराष्ट्रीय आयाम (स्त्री शक्ति) पर केंद्रित एक नई पहल भी शुरू की गई। सामाजिक समरसता पहल के अंतर्गत 10 राज्यों में “संविधान दिवस जागरूकता कार्यक्रम” आयोजित किए गए, जिनमें 52 कार्यक्रमों में 12,233 लोगों ने भाग लिया।

राष्ट्र सेविका समिति

राष्ट्र सेविका समिति समाज में महिलाओं के सशक्तिकरण, चरित्र निर्माण और सांस्कृतिक जागरण के लिए समर्पित एक संगठन है। नियमित प्रशिक्षण, सामाजिक सेवा और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से यह संगठन अनुशासित और सामाजिक रूप से प्रतिबद्ध महिलाओं का निर्माण करता है, जो राष्ट्र निर्माण में योगदान देती हैं। वर्तमान में संगठन 12 क्षेत्रों और 40 प्रांतों में कार्य कर रहा है। इनमें 405 जिलों में सेविकाएँ सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। कुल 4,477 शाखाएँ नियमित रूप से संचालित होती हैं, जिनमें 542 दैनिक और 3,935 साप्ताहिक शाखाएँ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 1,139 मिलन (571 मासिक, 238 पाक्षिक और 330 अन्य) आयोजित किए जाते हैं। समिति व्यापक रूप से सेवा गतिविधियों में भी संलग्न है, जिनमें 16 विद्यालय, 18 पुस्तकालय और 364 संस्कार केंद्र जैसे शिक्षा प्रकल्प, तथा 35 छात्रावास शामिल हैं।
विश्व हिंदू परिषद
विश्व हिंदू परिषद ने देशभर में अपने संगठनात्मक ढांचे का विस्तार किया है, जिसमें 10,330 प्रखंड, 353 विभाग, 1,210 जिले और 10,002 ब्लॉक शामिल हैं, जहां 75,488 समितियों और 27,440 साप्ताहिक सत्संगों का संचालन होता है। संगठन के पास 554 पूर्णकालिक कार्यकर्ता हैं। साथ ही 57,292 बजरंग दल संयोजक, 8,910 मातृशक्ति संयोजक और 10,767 दुर्गा वाहिनी संयोजक हैं। अपनी सेवा गतिविधियों के अंतर्गत विहिप 7,165 नियमित सेवा प्रकल्प संचालित करता है, जिनमें 3,914 शिक्षा, 1,410 स्वास्थ्य, 517 सामाजिक कार्य और 1,324 स्वावलंबन में हैं। साथ ही 2,63,467 गोवंश को वध से बचाया गया तो वहीं 3,49,927 लोगों को कन्वर्जन से बचाया। 10,545 हिंदू बालिकाओं की सुरक्षा के मामले दर्ज कराए तो वहीं 3,81,939 मामलों में कार्यकर्ताओं ने हस्तक्षेप किया। संगठन ने विभिन्न राष्ट्रीय कार्यक्रम भी आयोजित किए, जिसमें प्रमुख रूप से 43,842 रामोत्सव कार्यक्रम रहे जिसमें 28,07,523 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
विश्व विभाग
विश्व विभाग 65 देशों में समन्वय का काम करता है। वर्तमान में विभिन्न देशों में 1,801 शाखाएँ और 111 मिलन कार्यक्रम संचालित हो रहे हैं। प्रमुख गतिविधि केंद्रों में अमेरिका (267 शाखाएँ), यूके (117), कनाडा (70), म्यांमार (64) और श्रीलंका (64) शामिल हैं। संगठन ने 58 संघ शिक्षा वर्ग भी आयोजित किए, जिनमें 3,016 शिक्षार्थियों ने भाग लिया। वर्तमान में 24 प्रचारक विभिन्न देशों में कार्य कर रहे हैं। वर्ष के दौरान रवांडा और लातविया में नई शाखाएँ प्रारंभ की गईं।
शिक्षा
भारतीय शिक्षण मंडल
भारतीय शिक्षण मंडल भारतीय मूल्यों, सांस्कृतिक दृष्टि और भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित शिक्षा प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए समर्पित है। मार्च 2025 से फरवरी 2026 तक, भारतीय शिक्षण मंडल ने शिक्षा परिवर्तन, महिला सशक्तिकरण, पंच-परिवर्तन, भारतीय सांस्कृतिक-दार्शनिक अवधारणाएं, भारतीय शिक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, तथा भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय सेमिनार आयोजित किए। ये सेमिनार विभिन्न राज्यों और जिलों में अनेक शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी के साथ आयोजित किए गए। मुख्य कार्यक्रमों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 पर 29 प्रांतों और 191 जिलों में सेमिनार शामिल थे, जिनमें 292 संस्थानों, 5,125 शिक्षकों और 43,120 विद्यार्थियों ने भाग लिया। ‘शिक्षा में रामत्व’ पर 14 प्रांतों और 110 जिलों में चर्चाएं आयोजित की गईं, जिनमें 2,893 शिक्षक और 25,840 विद्यार्थी शामिल हुए।
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित मूल्य आधारित शिक्षा और समग्र व्यक्तित्व विकास को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रहा है। वर्ष के दौरान 30 प्रांतों में 35 स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 31 कार्यशालाएं और 4 वेबिनार शामिल थे, जिनमें 8,749 प्रतिभागियों ने भाग लिया। वैदिक गणित के अंतर्गत कक्षा 1 से 12 तक के पाठ्यक्रमों के साथ प्रमाणपत्र और डिप्लोमा कार्यक्रम विकसित किए गए हैं। 38 विश्वविद्यालयों के साथ समझौते किए गए हैं, और 19 प्रांतों में कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 8,538 प्रतिभागियों ने भाग लिया। 46 सेमिनार, 27 कार्यशालाएँ और 7 वेबिनार आयोजित किए गए। पर्यावरण शिक्षा के अंतर्गत भी जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। 20 प्रांतों में 21 स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 17 कार्यशालाएँ और 4 वेबिनार शामिल थे, जिनमें 5,682 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
विद्या भारती
विद्या भारती देशभर में विद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से शिक्षा क्षेत्र में कार्य कर रही है। 2025–26 शैक्षणिक सत्र के दौरान, इसका कार्य 775 जिलों तक विस्तृत रहा, जिनमें से 679 जिले सक्रिय हैं, और 66 प्रांतीय समितियाँ गतिविधियों का मार्गदर्शन कर रही हैं। संगठन 12,068 औपचारिक विद्यालय और 10,178 अनौपचारिक शिक्षा केंद्र संचालित करता है, जिससे कुल 22,246 शैक्षणिक संस्थान बनते हैं। इन संस्थानों में 1,52,624 आचार्य औपचारिक विद्यालयों में और 10,234 आचार्य अनौपचारिक केंद्रों में कार्यरत हैं, जिससे कुल आचार्यों की संख्या 1,62,858 है। 33,32,774 विद्यार्थी औपचारिक विद्यालयों में अध्ययनरत हैं, जबकि 2,53,435 विद्यार्थी अनौपचारिक शिक्षा केंद्रों में नामांकित हैं, जिससे कुल विद्यार्थियों की संख्या 35,86,209 है। इसके अतिरिक्त, संगठन देशभर में अपनी बढ़ती शैक्षणिक गतिविधियों के अंतर्गत 59 महाविद्यालय भी संचालित कर रहा है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने छात्र इकाइयों और संपर्क केंद्रों के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से देशभर में अपनी संगठनात्मक उपस्थिति का विस्तार किया है। वर्तमान में संगठन की 4,195 इकाइयाँ, 4,540 संपर्क केंद्र और 5,638 महाविद्यालय इकाइयाँ हैं, जिनकी कुल सदस्यता 77,26,129 छात्रों की है। वर्ष के दौरान कई राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किए गए। 9 जुलाई (राष्ट्रीय छात्र दिवस) को 6,519 स्थानों पर 8,544 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 18,19,589 छात्रों ने भाग लिया। 12 जनवरी (राष्ट्रीय युवा दिवस) को 8,343 स्थानों पर 11,451 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 22,83,949 प्रतिभागी शामिल हुए। 6 दिसंबर (सामाजिक समरसता दिवस) को 4,515 स्थानों पर 5,373 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 8,94,153 लोगों ने भाग लिया।
संस्कृत भारती
संस्कृत भारती देश और विदेश में संस्कृत भाषा और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रही है। वर्तमान में इसकी गतिविधियाँ भारत के 43 प्रांतों के 646 जिलों में 4,814 स्थानों पर और विश्व के 27 देशों में संचालित हो रही हैं। ग्रीष्मकालीन अवकाश (अप्रैल-जून) के दौरान, विभिन्न प्रांतों में संस्कृत भाषा और संगठनात्मक कार्य के प्रशिक्षण के लिए बोध वर्ग आयोजित किए गए। कुल 42 ऐसे प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 2,693 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त, कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित किए गए, जिनमें संगठनात्मक प्रशिक्षण और संस्कृत आधारित शिविर प्रबंधन कौशल प्रदान किए गए। ये 12-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम विभिन्न स्थानों पर आयोजित किए गए। कुल 12 ऐसे शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 716 कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
सुरक्षा
अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद
अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को संगठित करने और उनकी सेवा करने के साथ-साथ समाज में राष्ट्रीय चेतना और सुरक्षा जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रही है। संगठन ने 44 प्रांतों में अपनी उपस्थिति स्थापित की है, जिनमें 40 प्रांतों में सैनिक परिषद सक्रिय है। इसकी कुल सदस्यता 1,39,317 है।
परिषद कई प्रकंल्प संचालित करती है, जिनमें वीर सैनिक ग्राम गौरव योजना और सैन्य मातृशक्ति शामिल हैं। यह मोइरांग यात्रा (मणिपुर), कारगिल यात्रा और वालोंग यात्रा जैसी देशभक्ति यात्राएं भी आयोजित करती है, जो भारत के सैन्य इतिहास के महत्वपूर्ण पड़ावों का स्मरण कराती हैं।
सीमा जागरण मंच
सीमा जागरण मंच वर्ष 1985 से (राम नवमी के दिन से) कार्य कर रहा है, जिसका उद्देश्य नागरिकों में भारत की सीमाओं के महत्व के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना तथा सीमा क्षेत्रों के विकास और सुरक्षा में संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और सहभागिता को बढ़ावा देना है। यह संगठन 135 जिलों में सक्रिय है, जिनमें से 83 जिले सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। 425 ब्लॉकों और 1,176 गाँवों में इसका कार्य चल रहा है। इसकी गतिविधियाँ 18,273 सीमावर्ती गाँवों तक फैली हुई हैं, जिनमें से 3,402 गांव संगठन से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। अखिल भारतीय स्तर पर, प्रांतों और स्थानीय इकाइयों के माध्यम से जन-जागरूकता को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिवर्ष कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। स्थापना दिवस (राम नवमी) के अवसर पर 412 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 14,144 प्रतिभागियों ने भाग लिया। रक्षा बंधन के दौरान 1,074 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 43,421 लोगों ने भाग लिया, जिनमें 21,109 सैनिक और विद्यार्थी शामिल थे।
वैचारिक
विज्ञान भारती
विज्ञान भारती ‘भारतीयता’ की भावना को बनाए रखते हुए भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी आकांक्षाओं को साकार करने के लिए समर्पित है। आज संगठन ने देशभर में अपना विस्तार किया है, जिसमें 38 प्रांत इकाइयाँ, 7 संबद्ध संस्थाएँ और 13 पहलें शामिल हैं। वर्तमान में संगठन के पास 3 प्रचारक, 9 पूर्णकालिक कार्यकर्ता और 23,000 से अधिक पंजीकृत सदस्य हैं।
अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद
अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद की स्थापना 7 सितंबर 1992 को हुई थी। यह संगठन भारतभर में अधिवक्ताओं के बीच भारतीय मूल्यों को बढ़ावा देने और विधिक क्षेत्र में आदर्शवाद स्थापित करने के उद्देश्य से कार्य करता है, ताकि बार और न्यायपालिका की कार्यकुशलता और मानकों में सुधार किया जा सके। परिषद की गतिविधियाँ विभिन्न आयामों के माध्यम से संचालित होती हैं, जिनमें आउटरीच, संगठन, कार्यक्रम आयोजन, न्याय केंद्र, वाद-विवाद (लिटिगेशन), थिंक टैंक और अंतरराष्ट्रीय विधि शामिल हैं। वर्ष के दौरान, संगठन ने कई कार्यक्रम और पहलें संचालित कीं। इनमें ऑपरेशन सिंदूर के समर्थन में तिरंगा यात्रा, सिंधु जल संधि पर अध्ययन मंडल, और तटीय सुरक्षा सुदृढ़ीकरण पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आदि शामिल हैं।
अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना
अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना भारत के इतिहास के राष्ट्रीय दृष्टिकोण से अनुसंधान और जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए सेमिनार, कार्यशालाओं और शैक्षणिक पहलों के माध्यम से कार्य कर रही है। 10-12 मई 2025 को “भारत बोध: एक परिचर्चा” शीर्षक से एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन भारतीय इतिहास संकलन समिति (दक्षिण बिहार), भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (नई दिल्ली), नालंदा ओपन विश्वविद्यालय और नालंदा कॉलेज, बिहार के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। 8 जून 2025 को युवा इतिहासकार परिषद की एक राष्ट्रीय कार्यशाला संगठन के केंद्रीय कार्यालय, झंडेवालान में माधव संस्कृति न्यास के सहयोग से आयोजित की गई। 27 नवंबर 2025 को “वंदे मातरम् के 150 वर्ष: राष्ट्रीय गीत का स्मरणोत्सव” विषय पर एक संगोष्ठी साधना हॉल, केशव कुंज, झंडेवालान में आयोजित की गई।
प्रज्ञा प्रवाह
प्रज्ञा प्रवाह हिंदू जीवन मूल्यों पर आधारित बौद्धिक विमर्श और शोध को बढ़ावा देने तथा समकालीन आवश्यकताओं के अनुरूप राष्ट्रीय जीवन के पुनर्निर्माण के लिए विचारों की खोज करने के उद्देश्य से कार्य कर रहा है। इसकी गतिविधियां तीन प्रमुख आयामों-शोध, प्रकाशन और बौद्धिक जागरण-के माध्यम से संचालित होती हैं। वर्ष के दौरान, अखिल भारतीय संयोजक बैठक आयोजित की गई, जिसमें 10 क्षेत्रों से संयोजकों और सह-संयोजकों ने भाग लिया, कुल 292 प्रतिभागी उपस्थित थे, जिनमें 58 महिलाएँ शामिल थीं। सभी क्षेत्रों में शोध दल गठित किए गए हैं, और युवा, महिला, शोध आदि आयामों में इन टीमों की नियमित मासिक बैठकें आयोजित की जा रही हैं। अध्ययन केंद्रों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद
अखिल भारतीय साहित्य परिषद राष्ट्रीय चिंतन और सांस्कृतिक मूल्यों से संबंधित साहित्यिक गतिविधियों और बौद्धिक विमर्श को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रही है। वर्तमान में संगठन की 630 इकाइयाँ और 176 संपर्क केंद्र देशभर में कार्यरत हैं। परिषद देशभर में विभिन्न विषयों पर चर्चा, अध्ययन कार्यक्रम और साहित्यिक गतिविधियाँ आयोजित करती है, जो संघ साहित्य और राष्ट्रीय जीवन से संबंधित हैं।
संस्कार भारती
संस्कार भारती एक सांस्कृतिक संगठन है, जो भारत की कला, साहित्य, संगीत, रंगमंच और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। संगठन 771 जिलों में सक्रिय है, जिनमें 356 जिलों में समितियाँ गठित हैं और कुल 365 जिला समितियाँ हैं। इनमें 3,487 जिला सदस्य शामिल हैं। शहरी क्षेत्रों में, संगठन 201 महानगर केंद्रों में कार्य करता है, जिनमें 118 शहरों में समितियाँ गठित हैं, जिनमें 138 महानगर समितियाँ और 1,815 सदस्य शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, इसके पास 10,627 संस्कार मित्र सदस्य हैं। गत वर्ष कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में “संघ गंगा के तीन भागीरथ” नाटक का 15 से अधिक स्थानों पर मंचन किया गया, जिसमें 10,000 से अधिक दर्शकों ने भाग लिया, जिसमें रंगमंच के माध्यम से संघ की विचारधारा, त्याग और निरंतर राष्ट्रीय सेवा को प्रस्तुत किया गया।
Topics: परिवार प्रबोधनगुरु तेग बहादुरहिंदू सम्मेलनमोहनराव भागवतसंघ के संस्थापकपर्यावरणडॉ. केशव बलिराम हेडगेवारसंत रविदासमाधव सृष्टिस्वदेशीसंगठन विस्तारपाञ्चजन्य विशेषविश्व शांति का संकल्पपंच परिवर्तनसंघ शताब्दी वर्षदत्तात्रेय होसबालेनागरिक कर्तव्यसामाजिक समरसता
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