ब्रिटिश मुस्लिम आम ब्रिटिश नागरिकों की तुलना में ईरान के शासन के प्रति अधिक सकारात्मक
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ब्रिटिश मुस्लिम आम ब्रिटिश नागरिकों की तुलना में ईरान के शासन के प्रति अधिक सकारात्मक

ब्रिटेन के मुस्लिम ईरान को आम ब्रिटिशों से 5 गुना ज्यादा पसंद करते हैं। Policy Exchange और JL Partners के मार्च 2026 पोल में चौंकाने वाले खुलासे – चीन-रूस के प्रति गर्मजोशी और अमेरिका-इजरायल से नफरत।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by कुलदीप सिंह
Mar 19, 2026, 01:49 pm IST
inविश्व
UK Muslim Iran Support

प्रतीकात्मक तस्वीर

ब्रिटेन के मुस्लिमों को लेकर पॉलिसी एक्सचेंज थिंक टैंक के लिए जेएल पार्टनर ने मार्च 2026 में एक पोल का आयोजन किया था, और उसमें बहुत चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। उसमें यह बताया है ब्रिटिश मुस्लिम आम ब्रिटिश लोगों की तुलना में ईरान के शासन के प्रति 5% अधिक सकारात्मक हैं।

इजरायल-अमेरिका से नफरत

यूके में रहने वाले मुसलमान इजरायल और अमेरिका के प्रति अधिक शत्रुता का भाव रखते हैं और वे चीन और रूस के प्रति अधिक गर्माहट का भाव लिए हुए हैं। यह पोल 2 मार्च और 13 मार्च के बीच कराया गया था। और यह ईरान पर अमेरिका के हमलों से पहले का था। मगर यह ईरान द्वारा अपने ही नागरिकों पर नृशंस हमले के कुछ सप्ताह बाद कराया गया था। और यह और भी चौंकाने वाला है कि ईरान के अपने ही नागरिकों पर हमले के बाद भी ईरान के प्रति यह भाव है।

क्या कहती है रिपोर्ट

यह पोल यह भी बताता है कि जहां आम ब्रिटिश नागरिक ईरान विवाद पर कुछ और सोचता है तो वहीं ब्रिटिश मुस्लिम्स का विचार ईरानी विवाद पर कुछ और है। यह पोल यह भी बताता है कि कैसे मुस्लिम समाज का नजरिया अपने मजहबी नजरिए के अनुसार ही होता है। ईरान की सरकार द्वारा अपने ही नागरिकों पर किये गए अत्याचार उसके लिए कोई मायने नहीं रखते हैं। डेली मेल के अनुसार इस पोल में यह निकलकर आया है कि यूके में पाँच में से लगभग हर दो मुस्लिमों ने ईरान के संबंध में सकारात्मक कहा है, जबकि आम ब्रिटिश नागरिकों में यह आंकड़ा कुल 8% रहा था। ब्रिटिश मुस्लिमों में तेहरान की तानाशाह सरकार के प्रति +22 की सकारात्मक लहर देखी गई, जबकि जो आम ब्रिटिश नागरिक थे, उनमें यह -42 रही थी।

इसे भी पढ़ें: हाईवे पर सफर करने वालों के लिए जरूरी खबर: FASTag पास हुआ महंगा, पढ़ें पूरी डिटेल

इस पोल का शीर्षक था Worlds Apart: British Muslim Attitudes on the Iran Conflict, जिसे डॉक्टर राकिब एहसान ने किया था। इसमें लिखा है कि पश्चिम जियोपॉलिटिक्स के वृहद दायरे में उनके चीन और रूस के प्रति कम नकारात्मक विचार हैं जबकि अमेरिका विरोधी उनके विचार बहुत अधिक हैं।

रूस और चीन की तरफ झुकाव

और जब चीन और रूस की बात की जाए तो चीन के प्रति उनकी निष्ठा अधिक दिखाई देती है। पुतिन के रूस के प्रति जहां आम ब्रिटिश नागरिकों का नकारात्मक विचार है तो वहीं ब्रिटिश मुस्लिम्स का सकारात्मक विचार है। चीन के प्रति भी यही है।

डेली मेल के अनुसार “आम जनता के बीच चीन की लोकप्रियता रेटिंग -22 है, जबकि व्लादिमीर पुतिन के रूस के लिए यह काफी नीचे, यानी -52 पर है। इसकी तुलना में, ब्रिटिश मुसलमानों का बीजिंग के प्रति नज़रिया +22 (सकारात्मक) है, और मॉस्को के प्रति +2 है।“

क्यों हास्यास्पद है मुसलमानों का दृष्टिकोण

यह और भी हास्यास्पद और विरोधाभासी है, क्योंकि चीन का अपने ही देश के मुस्लिमों के प्रति रवैया पूरे विश्व के प्रति स्पष्ट है। चीन में उइघुर मुसलमानों को कैंप्स में रखा जाता है, उन पर कई तरह के मजहबी प्रतिबंध हैं और उन्हें लगातार ही चीनी संस्कृति में ढालने का काम हो रहा है।

मस्जिदों को तोड़ा जा रहा है और उनकी लड़कियों की जबरन शादी दूसरे लोगों से कराई जाती है। बच्चों के लिए इस्लामी तालीम पर भी पाबंदी है और अगर कुरान को पढ़ाया जाता है तो इस पर कानूनी कार्यवाही भी की जा सकती है। ये भी रिपोर्ट्स हैं कि चीन अपने मुस्लिम नागरिकों को हज भी करने की अनुमति नहीं देता है, वह उनके पासपोर्ट आदि जब्त कर लेता है। यह सब चीन आतंक और अलगाववादी भावनाओं से निपटने के लिए करता है। अर्थात चीन अपने देश के मुस्लिम नागरिकों को मस्जिद बनाने तक की आजादी नहीं देता है, बनाने की आजादी तो दूर, वह तो उन मस्जिदों और गुंबदों को भी तोड़ता है, जो पहले से बनी हुई हैं।

चीन में मुस्लिमों को निजी अधिकार तक नहीं, फिर भी निष्ठा

सबसे बढ़कर वह (चीन) अपने यहाँ मुस्लिमों को कोई भी निजी अधिकार तक कठिनाई से देता है, उस चीन के प्रति ब्रिटिश मुस्लिमों की दीवानगी हैरान करने वाली है। क्या ब्रिटेन के मुस्लिमों को चीन के मुस्लिमों से कोई भी लेना देना नहीं है? क्या उन्हें यह जरा भी नहीं लगता कि उन्हें चीन के अपने मुस्लिम भाइयों के साथ खड़े होना चाहिए या चीन में मुस्लिम लड़कियों के लिए आवाज उठानी चाहिए?

या फिर उन्हें ईरान की तानाशाह सरकार द्वारा अपने ही मुस्लिम भाई-बहनों की हत्याओं पर बात करनी चाहिए? ब्रिटेन के मुस्लिमों का रवैया मुस्लिम भाई-बहनों या उन मासूम मुस्लिम बच्चों के हक में तो नहीं है जो ईरान और चीन के तानाशाह शासकों के हाथों अत्याचार का शिकार हो रहे हैं।

एक और बात सामने इस पोल से निकलकर आई कि ब्रिटेन के आम लोग जहां मुख्यधारा की मीडिया रिपोर्ट्स का सहारा ले रहे हैं, तो वहीं ब्रिटिश मुस्लिम कतर के स्वामित्व वाले अलजज़ीरा से इस युद्ध के समाचार ले रहे हैं। UK में लगभग 26 प्रतिशत मुसलमान ईरान से जुड़ी खबरें Instagram से और 27 प्रतिशत TikTok से ले रहे हैं। पोल में पाया गया कि आम जनता के लिए यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 10 प्रतिशत और 11 प्रतिशत रह जाता है।

यह पोल और उसके आँकड़े बहुत हैरान करने वाले हैं और ब्रिटेन के मुस्लिमों की प्राथमिकता की ओर भी संकेत करते हैं।

Topics: ब्रिटेन मुस्लिम ईरान समर्थनब्रिटिश मुस्लिम ईरान पोलChinaब्रिटेन मुस्लिम ईरान सरकार सकारात्मक रायIslamization of BritainBritish Muslim support for IranचीनBritish Muslim poll on IranईरानBritish Muslims hold positive views of the Iranian governmentरूसrussiaIranब्रिटेन इस्लामीकरण
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