भुवनेश्वर: ओडिशा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) योगेश बहादूर खुरानिया ने कहा है कि राज्य जल्द ही माओवादी गतिविधियों से मुक्त घोषित होने की दिशा में अग्रसर है, क्योंकि वर्तमान में केवल 13 सक्रिय माओवादी कैडर शेष हैं। पुलिस भवन में आयोजित एक प्रेस वार्ता में डीजीपी खुरानिया ने बताया कि माओवादियों का एक छोटा समूह कंधमाल–कालाहांडी–रायगड़ा ट्राई -जंक्शन क्षेत्र में सक्रिय है। उन्होंने कहा, “हमने इस समूह में लगभग 15 सदस्यों का अनुमान लगाया था। दो को कल गिरफ्तार किया गया, जिससे अब केवल 13 बचे हैं। मुझे विश्वास है कि निर्धारित समयसीमा से पहले इन्हें या तो गिरफ्तार कर लिया जाएगा या वे आत्मसमर्पण करेंगे।”
31 मार्च की समयसीमा के नजदीक आते ही ओडिशा पुलिस ने राज्य से माओवादी गतिविधियों को समाप्त करने के लिए अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार, शेष कैडर प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) की राज्य समिति के सदस्य सुकुरू के नेतृत्व में सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
डीजीपी ने हाल के एंटी-नक्सल अभियानों की सफलता का उल्लेख करते हुए बताया कि इस सप्ताह कालाहांडी जिले में 11 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। इस समूह में एक डिविजनल कमेटी सदस्य, पाँच एरिया कमेटी सदस्य और पाँच पार्टी सदस्य शामिल थे। इन पर कुल ₹63.25 लाख का इनाम घोषित था।
एक अन्य महत्वपूर्ण घटना में कंधमाल जिले में 10 कुख्यात माओवादियों ने हथियार डाल दिए। इन पर संयुक्त रूप से ₹1.5 करोड़ से अधिक का इनाम था। इन आत्मसमर्पणों से क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क को गंभीर झटका लगा है। अधिकारियों ने बताया कि इन सफलताओं के पीछे राज्य और केंद्रीय सुरक्षा बलों—विशेष ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी), जिला स्वयंसेवी बल (डीवीएफ), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ)—के समन्वित और सतत अभियानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। लगातार दबाव के कारण माओवादी संगठनात्मक ढांचा कमजोर हुआ है और उनकी गतिविधियाँ सीमित हो गई हैं।
पुलिस अधिकारियों ने यह भी कहा कि दिसंबर 2025 में कंधमाल में माओवादी केंद्रीय समिति सदस्य गणेश उइके के मुठभेड़ में मारे जाने से कैडरों का मनोबल काफी प्रभावित हुआ। इसके परिणामस्वरूप कई माओवादी हिंसक गतिविधियों को छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय ले रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, हाल के महीनों में राज्य में सक्रिय माओवादी कैडरों की संख्या लगभग 25 से घटकर अब 13 रह गई है। माओवादी गतिविधियाँ मुख्य रूप से सीमावर्ती और दूरस्थ वन क्षेत्रों तक सीमित हैं। कई जिले—नुआपाड़ा, नबरंगपुर, मलकानगिरी, कोरापुट, बौध और बलांगीर—पहले ही माओवादी मुक्त घोषित किए जा चुके हैं।
डीजीपी खुरानिया ने कहा कि राज्य सरकार और पुलिस बल मार्च 31, 2026 तक ओडिशा को पूर्णतः माओवादी मुक्त बनाने के लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि केंद्र सरकार द्वारा घोषित राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप राज्य में यह अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने पुलिस की ‘ऑपरेशन साइबर कवच’ पहल का भी उल्लेख किया, जिसके तहत म्यूल बैंक खातों और फर्जी सिम नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई कर साइबर अपराध पर अंकुश लगाया जा रहा है। इस अभियान ने साइबर अपराधियों के नेटवर्क को भी कमजोर किया है। डीजीपी ने विश्वास जताया कि निरंतर अभियानों, प्रभावी पुनर्वास नीति और आत्मसमर्पण को प्रोत्साहित करने वाली रणनीति के कारण ओडिशा जल्द ही माओवादी गतिविधियों से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि सुरक्षा बलों के संयुक्त प्रयासों से राज्य के आंतरिक सुरक्षा परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज होने जा रही है।

















