तकनीक : ‘एआई’ की दिशा तय करेगा भारत
June 25, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

तकनीक : ‘एआई’ की दिशा तय करेगा भारत

‘एजेंटिक एआई’ के आने से ‘कंप्यूटिंग’ का पूरा समीकरण बदल रहा है और यह बदलाव भारत के लिए बड़ा अवसर लेकर आया है। मनीश कुमार झा

Written byमनीश कुमार झामनीश कुमार झा
Mar 17, 2026, 03:14 pm IST
in भारत, विश्लेषण, विज्ञान और तकनीक

पिछले छह वर्षों में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (एआई) की दुनिया पर एक ‘प्रोसेसर’ का दबदबा रहा है-‘जीपीयू’ (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट)। ‘जीपीयू’ एक विशेष प्रोसेसर है जिसमें हजारों छोटी-छोटी ‘प्रोसेसिंग’ इकाइयां (जिन्हें ‘कोर’ कहते हैं) होती हैं। ये सब ‘कोर’ एक साथ मिलकर लाखों गणनाएं करते हैं। चैटजीपीटी जैसे ‘एआई मॉडलों’ को करोड़ों डेटा से सिखाने के लिए ठीक इसी तरह की ‘एक साथ लाखों गणनाएं’ चाहिए होती हैं, और इसमें ‘जीपीयू’ बेहद कारगर साबित हुआ। इसी ताकत ने अमेरिकी कंपनी ‘एनवीडिया’ को फरवरी 2026 तक लगभग 400 लाख करोड़ रुपए (4.7 ट्रिलियन डॉलर) के बाजार मूल्य तक पहुंचा दिया।

कैसे करता है काम

अब ‘सीपीयू’ (सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट) को समझिए – यह हर कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल का मूल प्रोसेसर है। इसमें आमतौर पर 2 से 64 ‘कोर’ होते हैं। ‘जीपीयू’ जहां एक साथ हजारों गणनाएं करता है, वहीं ‘सीपीयू’ का काम अलग है, यह सोचता है कि कौन-सा काम पहले करना है, कौन-सा बाद में, और पूरे सिस्टम के हर हिस्से में तालमेल बिठाता है – इसीलिए इसे कंप्यूटर का ‘दिमाग’ कहा जाता है। ‘एआई’ के उछाल के बाद ‘सीपीयू’ को कम महत्वपूर्ण माना जाने लगा था। लेकिन 2026 में ‘एआई’ जिस दिशा में बढ़ रहा है, उसमें ‘सीपीयू’ की भूमिका फिर से बहुत बड़ी हो गई है। यह बदलाव केवल प्रोसेसर तक सीमित नहीं है, बल्कि कंप्यूटर आपस में कैसे जुड़ते हैं, इस पर भी एक बहुत बड़ा तकनीकी बदलाव आ रहा है।

तार्किक निर्णय (लॉजिकलडिसिशन) लेने के लिए जहां शक्तिशाली ‘सीपीयू’ आवश्यक हो गया है, वहीं इन शक्तिशाली प्रोसेसरों के बीच भारी मात्रा में डेटा के तीव्र और निर्बाध प्रवाह के लिए ‘ऑप्टिक्स’ (प्रकाश विज्ञान) तकनीक भी उतनी ही जरूरी होतीजारहीहै। यह कंप्यूटिंग का वह नया समीकरण है जो विश्व पटल पर भारत के लिए अद्वितीय अवसर खोल सकताहै।

एजेंटिक एआई

2026 में ‘एआई’ का एक नया रूप सामने आया है – ‘एजेंटिक एआई’ (उदाहरण: ‘ओपनएआई ऑपरेटर’, ‘एंथ्रोपिक क्लॉड कंप्यूटर यूज़’)। पारंपरिक ‘एआई’ (जैसे चैटजीपीटी) से आप सवाल पूछते हैं और वह जवाब देता है – बस। लेकिन ‘एजेंटिक एआई’ को आप एक काम सौंपते हैं और वह उसे शुरू से अंत तक खुद पूरा करता है।

उदाहरण के तौर पर आपने कहा, ‘दिल्ली से मुंबई की सस्ती यात्रा की योजना बनाकर होटल बुक करो और कैलेंडर में डाल दो।’ पारंपरिक ‘एआई’ सस्ते विकल्पों की सूची देकर रुक जाता। लेकिन ‘एजेंटिक एआई’ पूरा काम खुद करेगा। वह पहले कई ट्रैवल वेबसाइटों पर खोज करेगा, इसके बाद कीमतों और रेटिंग की तुलना करेगा और अंत में सबसे अच्छा विकल्प चुनकर बुकिंग करेगा। इसके बाद कैलेंडर में विवरण दर्ज कर देगा।

यही वह जगह है जहां ‘एआई’ की पूरी कार्यप्रणाली एक नया मोड़ लेती है। जब काम ‘एक-एक करके’ और ‘तार्किक क्रम’ (लॉजिकलआर्डर) में होता है, तब ‘जीपीयू’ की एक साथ लाखों गणना करने वाली ताकत उतनी काम नहीं आती, जितनी ‘सीपीयू’ की चरणबद्ध (फेजवाइज) और सटीक निर्णय लेने की क्षमता आती है। इसी कारण ‘एजेंटिक एआई’ के युग में पारंपरिक ‘कंप्यूटिंग’ के नियम तेजी से बदल रहे हैं।

यही बात ‘सीपीयू’ को ‘एजेंटिक एआई’ के लिए इतना जरूरी बनाती है। ‘जीपीयू’ का काम है एक साथ लाखों गणनाएं करना लेकिन ‘एजेंटिक एआई’ में काम एक-एक करके, क्रम में होता है, और हर कदम पर तार्किक निर्णय लेना पड़ता है। यह ठीक वही है जिसके लिए ‘सीपीयू’ बना है। 2025 में अमेरिका की ‘जॉर्जिया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ और ‘इंटेल’ ने मिलकर पांच प्रमुख ‘एजेंटिक एआई सिस्टम्स’ का परीक्षण किया (स्रोत: अनकवरअल्फाडॉटकॉम)। उन्होंने पाया कि कुल प्रोसेसिंग समय का 50% से 90% ‘एआई मॉडल’ द्वारा जवाब बनाने में नहीं, बल्कि अन्य कार्यों में जाता है। जैसे, बाहरी स्रोतों से जानकारी लाना, दूसरे सॉफ्टवेयर से संवाद करना और कोड चलाना। ये सब काम ‘सीपीयू’ पर चलते हैं, ‘जीपीयू’ पर नहीं। इसी शोध में ‘एजेंटिक एआई’ की कुल बिजली खपत में ‘सीपीयू’ का हिस्सा लगभग 44% तक पहुंचा, यानी इन नए सिस्टम्स में लगभग आधा काम ‘सीपीयू’ कर रहा है।

उद्योग अपना रहे बदलाव

उद्योगों ने भी इस बदलाव को अपनाना शुरू कर दिया है। ‘एनवीडिया’- जो ‘जीपीयू’ के दम पर खड़ी है, उसने 5 जनवरी 2026 को अपनी अगली पीढ़ी की ‘एआई’ प्रणाली ‘रुबिन’ में 88 कोर वाला एक नया शक्तिशाली ‘सीपीयू’ (‘वेरा’) पेश किया। यह ‘सीपीयू’ सीधे ‘एजेंटिक एआई’ के लिए बनाया गया है और बिना ‘जीपीयू’ के, अकेले भी काम कर सकता है। यानी दुनिया की सबसे बड़ी ‘जीपीयू’ कंपनी भी मान रही है कि ‘एजेंटिक एआई’ के लिए केवल ‘जीपीयू’ काफी नहीं।

इस दिशा में एक और बड़ा कदम 17 फरवरी 2026 को ‘मेटा’ (फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम की मूल कंपनी) ने उठाया। उसने अपने ‘डेटा सेंटर्स’ में जहां लाखों सर्वर ‘एआई’ का काम संभालते हैं उनमें में ‘एनवीडिया’ का ‘ग्रेस सीपीयू’ बड़े पैमाने पर लगाया है बिना किसी

‘जीपीयू’ के, नतीजतन

उसी बिजली में दोगुना काम हुआ। यह पहला मौका है जब किसी इतनी बड़ी कंपनी ने सिद्ध किया कि अनेक ‘एआई’ कार्यों के लिए महंगे ‘जीपीयू’ की जरूरत नहीं। ‘ग्रेस सीपीयू’ का यह सफल परीक्षण ‘डेटा सेंटर्स’ में ‘सीपीयू’ के पुनरुत्थान को पुष्ट करता है और यह स्थापित करता है कि ‘एआई’ के ‘इनफरेंस’ (जब एआई मॉडल सवालों के जवाब देता है या कार्य करता है) चरण के लिए ‘सीपीयू’ अत्यधिक किफायती और सक्षम विकल्प है।

कंप्यूटिंग की अगली बाधा

जैसा कि हमने देखा, शक्तिशाली ‘सीपीयू’ और ‘जीपीयू’ अब ‘एआई’ के लिए उपलब्ध हैं। लेकिन तकनीक की दुनिया में एक बहुत शांत मगर गहरा बदलाव आ रहा है। अब सबसे बड़ी चुनौती यह नहीं है कि हम कितना शक्तिशाली चिप बना सकते हैं, बल्कि यह है कि हम एक चिप से दूसरे चिप तक डेटा कितनी तेजी से पहुंचा सकते हैं। सरल शब्दों में कहें तो अब समस्या कंप्यूटर के ‘दिमाग’ की नहीं, बल्कि ‘नसों’ की है। हमारे पास दुनिया के सबसे तेज और शक्तिशाली प्रोसेसर मौजूद हैं, लेकिन उन्हें आपस में जोड़ने वाले माध्यम पुराने हैं। हम अब तक डेटा को ‘सर्वर रैक’ के अंदर और बाहर ‘विधुत’ के रूप में ‘तांबे के तारों’ (कॉपरवायर) से भेज रहे हैं। लेकिन तांबे की एक सीमा है जिसे पार करना अब भौतिक रूप से असंभव होता जा रहा है, वह है ‘दूरी और गति का संतुलन’।
जैसे-जैसे हम ‘एआई’ मॉडलों को अधिक डेटा देते हैं (रफ्तार को 800 गीगाबिट प्रति सेकंड (जीबी/एस) से 1.6 टेराबिट प्रति सेकंड (टीबी/एस) तक ले जाते हैं), तांबे के तारों में भौतिक समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं। तांबे के तारों में उच्च गति पर ‘सिग्नल का नुकसान’ (सिग्नललॉस) बहुत तेजी से होता है।

वर्तमान तकनीक में, यदि तांबे का तार 2 मीटर (लगभग 6.5 फीट) से लंबा हुआ, तो विधुत संकेत (इलेक्ट्रिकलसिग्नल)क्षीण पड़ जाते हैं और डेटा सही सलामत नहीं पहुंच पाता। इस दूरी को बढ़ाने और सिग्नल को बनाए रखने के लिए अत्यधिक मात्रा में अतिरिक्त बिजली खर्च करनी पड़ती है, जो अंततः ‘डेटा सेंटर’ के अंदर अकल्पनीय गर्मी पैदा करती है,और इस गर्मी को ठंडा करने के लिए अत्यधिक मात्रा में साफ पानी की जरूरत होती है।

ऐसे में विकल्प के तौर पर आता है ‘फाइबर ऑप्टिक केबल’। ‘एनवीडिया’ और ‘ब्रॉडकॉम’ जैसी कंपनियां अब तेजी से इस ‘विधुत’ से ‘प्रकाश’(ऑप्टिकलइंटरकनेक्ट्स) की ओर रुख कर रही हैं।

प्रकाश के उपयोग (फोटोनिक्स) के अत्यंत महत्त्वपूर्ण लाभ हैं। प्रकाश के माध्यम से डेटा भेजने पर न तो तांबे की तरह अपार गर्मी पैदा होती है, और न ही लंबी दूरी पर सिग्नल कमजोर पड़ता है। इसका अर्थ है कि सर्वर के एक हिस्से में बैठा शक्तिशाली ‘सीपीयू’ अब सैकड़ों मीटर या कई किलोमीटर दूर रखी ‘मेमोरी यूनिट’ से संपर्क ऐसे कर सकता है जैसे वह उसके ठीक बगल में चिपकी हो।तांबे के तार जो अड़चन पैदा कर रहे थे, ‘ऑप्टिक्स’ उन्हें पूरी तरह खत्म कर सकता है, और ‘सीपीयू’ को एक ही पल में असीमित डेटा की गति प्रदान करता है।

भारत के लिए अवसर

भारत का ‘आईटी’ उद्योग वर्तमान में बदलाव की दहलीज पर खड़ा है। पश्चिमी कंपनियों के लिए सस्ते ‘कोडिंग’ या ‘सॉफ्टवेयर सपोर्ट’ का युग अब एआई ने अपने हाथ में लेताजारहाहै। लेकिन ‘सीपीयू’ और ‘ऑप्टिक्स’ का यह नया तकनीकी संगम भारत को विदेशी कंपनियों का ‘बैक-ऑफिस’ बने रहने के बजाय, दुनिया का ‘प्रैक्टिकल एआई आर्किटेक्चर हब’ बनने का अचूक अवसर दे रहा है।

(1) अरबों डॉलर की बचत और ‘सॉवरेन एआई’ का निर्माण

अब तक यह माना जाता था कि ‘एआई’ की दौड़ में शामिल होने के लिए भारत को अमेरिका से लाखों की संख्या में 30 से 40 लाख रुपए प्रति यूनिट वाले हाई-एंड ‘जीपीयू’ (जैसे,एनवीडियाएच100) आयात करने होंगे। इससे भारत का बहुमूल्य विदेशी मुद्रा भंडार कम हो जाता।

लेकिन, ‘एजेंटिक एआई’ में ‘सीपीयू’ की बढ़ती भूमिका और तेज ‘ऑप्टिक्स’ ने खेल बदल दिया है। भारतीय डेटा सेंटर कंपनियां (जैसे योट्टा, सीटीआरएलएस) और टेक दिग्गज (जियो, टीसीएस) अब ‘हाइब्रिड क्लस्टर’ डिजाइन कर रही हैं। इन क्लस्टर्स में केवल मुट्ठी भर महंगे ‘जीपीयू’ (ट्रेनिंग के लिए) और हजारों की संख्या में सस्ते, ऊर्जा-कुशल ‘सीपीयू’ (इनफरेंस और एजेंटिक एआई के लिए) लगाए जाएंगे, जिन्हें अकल्पनीय गति वाले ‘ऑप्टिकल फाइबर’ से जोड़ा जाएगा।

वास्तविक लाभ: इससे भारत में डेटा सेंटर और एआई सुपरकंप्यूटर स्थापित करने की पूंजीगत लागत (कैपेक्स) में 60% से 70% तक की भारी गिरावट आसकतीहै। इससे भारत का अपना ‘सॉवरेन एआई’ यानी ‘स्वदेशी एआई बुनियादी ढांचा’ खड़ा होगा, जहां हमारा डेटा हमारे ही देश में, हमारे ही सस्ते लेकिन अत्यधिक शक्तिशाली सर्वरों में सुरक्षित रहेगा।

(2) ‘एआई इनफरेंस’ का वैश्विक कारखाना (ग्लोबल इनफरेंस फैक्टरी)

‘डेलॉयट’ का अनुमान है कि 2026 में लगभग 66% निवेश केवल एआई के ‘इनफरेंस’ (जब एआई मॉडल सवालों के जवाब देता है या एजेंट के रूप में काम करता है) पर होगा। भारत के पास दुनिया का बड़ा और सस्ता नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) ग्रिड और टेलीकॉम (जियो/एयरटेल) का ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क है।

कैसे संभव है: यदि भारत अपने डेटा सेंटर्स में शक्ति-कुशल ‘सीपीयू’ और ‘को-पैकेज्ड ऑप्टिक्स’ (सीपीओ) का जाल बिछा ले, तो हम दुनिया को अकल्पनीय रूप से सस्ती ‘कंप्यूटिंग पावर’ बेच सकते हैं। अमेरिका या यूरोप का कोई स्टार्टअप जब अपना ‘एआई एजेंट’ चलाएगा, तो उसकी ‘सोचने और निर्णय’ (इनफरेंस) लेने की सारी प्रोसेसिंग भारत के सर्वरों में हो रही होगी। हम ‘सॉफ्टवेयर कोड’ नहीं, बल्कि ‘बुद्धिमान कंप्यूटिंग शक्ति’ (इंटेलीजेंट कंप्यूट पावर) का निर्यात करेंगे।

(3) नए प्रकार के हाई-वैल्यू रोजगारों का सृजन

आईटी सेक्टर में जो नौकरियां जा रही हैं, वे ‘बेसिक कोडर’ की हैं। सीपीयू और ऑप्टिक्स की क्रांति भारत में एक बिल्कुल नई ‘हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर को-डिजाइन’ प्रतिभाओं की मांग पैदा करेगी।

लाभ: अगले पांच वर्षों में, भारत को साधारण प्रोग्रामरों की नहीं, बल्कि लाखों ‘एआई सिस्टम आर्किटेक्ट्स’, ‘फोटोनिक्स इंजीनियर्स’, ‘सप्लाई चेन एनालिस्ट्स’ और ‘हार्डवेयर ऑप्टिमाइजेशन स्पेशलिस्ट्स’ की आवश्यकता होगी। इन नौकरियों का वेतनमान एक सामान्य कोडर की तुलना में 3 से 4 गुना अधिक होता है। भारत की इंजीनियरिंग प्रतिभा को अब ‘एप्स’ बनाने से ऊपर उठकर ‘चिप के अंदर की दुनिया’ को ऑप्टिमाइज करने का अवसर मिलेगा।

कृषि में क्रांति

कल्पना कीजिए, महाराष्ट्र का कोई किसान स्थानीय भाषा में अपने सामान्य स्मार्टफोन से बोल कर कहता है- ‘पिछले तीन दिन से बारिश नहीं हुई है, क्या मुझे कल सिंचाई करनी चाहिए और खाद कितनी डालूं?’ ‘एजेंटिक एआई’ (जो कि भारत में स्थित सस्ते ‘सीपीयू’ औरतेज़ ‘ऑप्टिक्स’ से संचालित होगा) तुरंत कई निर्णय लेगा, वह सैटेलाइट से खेत के मौसम को पढ़ेगा, मिट्टी की पुरानी रिपोर्ट खंगालेगा, और उसी क्षण किसान को सटीक वैज्ञानिक सलाह देगा। चू्ंकि इस एआई को महंगे जीपीयू पर नहीं चलाया जा रहा है, इसलिए किसान को यह सुविधा मात्र कुछ रुपए महीने (या सरकारी सब्सिडी पर मुफ्त) में मिल सकेगी।

स्वास्थ्य सेवा में बदलाव

उत्तर प्रदेश के किसी जिला अस्पताल में एक डॉक्टर दिन में 200 मरीज देखता है। ‘एआई एजेंट’ (जो दूरस्थ सीपीयू क्लस्टर पर ऑप्टिक फाइबर के जरिए जुड़ा है), डॉक्टर के पूछने से पहले ही मरीज की पिछली मेडिकल हिस्ट्री, हालिया ब्लड रिपोर्ट को पढ़कर संभावित बीमारियों (इनिशियल डायग्नोसिस) की तार्किक सूची स्क्रीन पर दिखा देगा। इसमें कोई ‘देरी’ नहीं होगी क्योंकि डेटा तांबे के तारों में नहीं, बल्कि ‘प्रकाश की गति’ से यात्रा कर रहा है। इससे एक सरकारी डॉक्टर मरीजों का अधिक सटीकता से इलाज कर सकेगा, और देश के स्वास्थ्य ढांचे का कायाकल्प हो जाएगा।

नीतिगत दिशा

यह सब अपने आप नहीं होगा। भारत सरकार का ‘सेमीकंडक्टर मिशन’ अभी चिप बनाने के कारखाने (फैब) लगाने पर केंद्रित है। लेकिन तकनीक के इस नए मोड़ पर भारत को दो ठोस नीतिगत क़दम उठाने होंगे:

(1) स्वदेशी सीपीयू और फोटोनिक्स डिजाइन

हमें विदेशी कंपनियों के चिप्स केवल भारत में ‘असेम्बल’ करने से आगे निकलना होगा। भारत को ‘आर-आईएससी वी’ जैसे ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करके ऐसे स्वदेशी ‘सीपीयू आर्किटेक्चर’ और ‘ऑप्टिकल डेटा चिप्स’ (फोटोनिक्स) के डिजाइन में निवेश करना होगा, जो विशेष रूप से ‘एजेंटिक एआई’ के लिए बने हों।

(2) ‘टेलीकॉम-टू-एआई’ एकीकरण

सरकार को ऐसी नीतियां बनानी होंगी जहां हमारी टेलीकॉम कंपनियों के पास मौजूद विशाल ‘ऑप्टिकल फाइबर’ नेटवर्क का सीधा उपयोग ‘डेटा सेंटर्स’ की ‘नसों’ के रूप में किया जाए, ताकि हर गांव तक एआई की पहुंच बिना किसी रुकावट के हो सके।
इस नए युग में, भारी ‘जीपीयू’ महत्वपूर्ण रहेंगे, लेकिन कंप्यूटर के तार्किक ‘दिमाग’ अर्थात् ‘सीपीयू’ और डेटा को एक क्षण में इधर-उधर पहुंचाने वाली प्रकाश की ‘नसों’ अर्थात् ‘ऑप्टिक्स’ का संयोजन अब इस तकनीक का वास्तविक ‘हृदय’ बन चुका है। जहां एक ओर तांबे के तारों की सीमाएं समाप्त हो रही हैं, वहीं प्रकाश-आधारित चिप्स नवाचार के नए क्षितिज खोल रहे हैं।

यदि भारत पूर्ण रूप से इस तकनीकी बदलाव को अपने नीतिगत ढांचे में आत्मसात कर ले, सॉफ्टवेयर कोडिंग की घटती नौकरियों के शोक से बाहर निकलकर, उच्च-स्तरीय हार्डवेयर आर्किटेक्चर, सीपीयू डिजाइनिंग और प्रकाश आधारित सर्वर-नेटवर्किंग को अपना ले, तो निस्संदेह भारत केवल एआई ‘कौशल’ भेजने वाला राष्ट्र न रहकर, सम्पूर्ण ‘एआई सिस्टम्स’ का निर्माता और वैश्विक अगुआ बन
सकता है।

Topics: जीपीयू (GPUहार्डवेयर-सॉफ्टवेयरतकनीकी जगतओपन-सोर्स प्लेटफॉर्मAgentic AIसीपीयूट्रांसफर की तकनीकएआई इनफरेंसस्वदेशी एआईस्वास्थ्य सेवाआर्थिक अवसरपाञ्चजन्य विशेषग्लोबल इनफरेंसडेटा सेंटरकृषि क्रांतिसेमीकंडक्टर मिशनएआई सिस्टम आर्किटेक्ट
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प

जी 7, पश्चिम एशिया और भारत के सधे कदम

dr Shyama prasad Mukharjee mystirious death

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान : नेहरू की भूमिका, मौत के पीछे की साजिश, मां का पत्र और बेटी का रहस्योद्घाटन

महान वीरांगना रानी दुर्गावती

रानी दुर्गावती: स्वाभिमान की रक्षा के लिए प्राणोत्सर्ग करने वालीं महान वीरांगना

संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार

राष्ट्र-चिंतक डॉ. हेडगेवार

बनाएं स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत

अंदमान निकोबार : भारत को मिली नई ‘ऊर्जा’

Load More

ताज़ा समाचार

maharashtra government considers printing bride groom dob on wedding cards

महाराष्ट्र में बाल विवाह पर कड़ा प्रहार: शादी के कार्ड पर छपेगी दूल्हा-दुल्हन की जन्मतिथि! सरकार ला रही नया नियम

israel will not withdraw from southern lebanon defence minister israel katz

‘अमेरिका कहेगा, तब भी नहीं हटेंगे’ : दक्षिणी लेबनान पर इज़राइल का बड़ा एलान

rashtra sevika samiti praveen shiksha varg concludes nagpur shanta kumari

“वैश्विक संघर्षों के बीच हिंदू जीवन-दृष्टि ही दिखाएगी शांति का मार्ग” : प्रमुख संचालिका शांता कुमारी

AAP MLA Chaitar Vasava Bharuch Court Summons Bharuch Police Case Investigation

जेल में बंद AAP विधायक चैतर वसावा की मुश्किलें और बढ़ीं: अब भरूच कोर्ट ने भेजा समन; पुलिस की बदनामी करने का आरोप!

howrah shibpur tmc leader attacks-bjp supporting locality manoj khan

हावड़ा: शिवपुर में TMC नेता की अगुवाई में हुई भारी बमबाजी और फायरिंग, भाजपा नेता थे निशाना, जमकर लगे मजहबी नारे

Moga RSS Shakha Massacre 1989 Punjab Terrorism 25 Swayamsevak Balidan

25 जून 1989 : जब मोगा में 25 स्वयंसेवकों ने बलिदान देकर भी बचाई हिंदू-सिख एकता

आपातकाल का सच

हिटलर गांधी : स्वयंसेवकों का बलिदान, बचा संविधान

Mahrang Baloch Sentenced to Life Imprisonment Pakistan Army Balochistan Protest

पाकिस्तान में तानाशाही हावी: बलूच एक्टिविस्ट डॉ. महरंग बलोच को उम्रकैद, उबाल पर बलूचिस्तान, सड़कों पर उतरा जनसैलाब!

उत्तराखंड पुलिस की फर्जी इंस्टाग्राम ID : सीनियर अफसर का बनाया ‘डीपफेक’ वीडियो, मोहम्मद लुकमान गिरफ्तार

ncient shaligram fossils found in lapthal niti valley chamoli uttarakhand

उत्तराखंड: तिब्बत बॉर्डर पर शालिग्राम की खोज, रहस्यों से उठने लगा पर्दा

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies