आगामी विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी के लिए मुस्लिम वोटबैंक सबसे बड़ी पहेली बनने जा रहा है। 2011 के बाद विधानसभा, लोकसभा और स्थानीय चुनावों में ममता बनर्जी की सबसे बड़ी ताकत मुस्लिम वोट बैंक हुआ करता था। उनके हर राजनीतिक योजना में मुस्लिम वोट बैंक सर्वोपरि होता था। लेकिन, 2023 के बाद ममता बनर्जी का मुस्लिम वोट बैंक पर पकड़ कमजोर होता दिखा।
2023 में मुर्शिदाबाद जिले के सागरदिघी विधानसभा सीट पर अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस पार्टी के सुब्रता साहा के निधन के कारण उपचुनाव हुआ था। इस सीट पर 64 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं और 2011 से लगातार तीन बार तृणमूल कांग्रेस पार्टी यह सीट बड़े अंतर से जीत रही थी, मगर 2023 में हुए उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी के बायरन बिस्वास ने सबको चौंकाते हुए इस सीट पर जीत दर्ज़ की थी। यह हार ममता बनर्जी के लिए 2021 में नंदीग्राम में सुवेंदु अधिकारी के हाथों मिली हार के समान थी। विदित हो कि कांग्रेस पार्टी इस सीट पर आखिरी बार 1972 में जीती थी।
ममता की परेशानी
ममता बनर्जी ने कांग्रेस पार्टी की इस जीत से काफी परेशान हो गईं और उन्हें शक हुआ कि मुस्लिम मतदाता फिर से कांग्रेस पार्टी की तरफ रुख कर सकते हैं, अतएव ममता बनर्जी ने उपचुनाव में विजयी कांग्रेस पार्टी का पश्चिम बंगाल विधानसभा में एकमात्र विधायक बायरन बिस्वास को बिना देर किये हुए अपने पार्टी में शामिल करवा लिया।
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मुस्लिमों में गिरी ममता की साख
सागरदिघी सीट पर उपचुनाव परिणाम से ममता बनर्जी काफी परेशान हैं और अब मुस्लिम वोट बैंक से उनका विश्वास पहले की अपेक्षा काफी कम हो गया है। पश्चिम बंगाल में 106 मुस्लिम बाहुल्य विधानसभा हैं, जहां लगभग 30 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम मतदाता हैं। अतएव 2023 में सागरदिघी में मिली पराजय के कारण अब ममता बनर्जी आगामी चुनाव में अपना प्रचार मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर ही केंद्रित करती दिखेंगी। पूर्व के चुनावों में ममता बनर्जी मुस्लिम मतदाताओं को अपना वोटबेंक मानते हुए मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में नाम मात्र का प्रचार करती थीं और उनका सारा चुनावी अभियान गैर मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में होता था।
कांग्रेस की तरफ मुस्लिमों का झुकाव
ममता बनर्जी का मुस्लिम वोटबैंक के प्रति अविश्वास 2024 के लोकसभा चुनाव में तब भी दिखा था, जब बहरामपुर लोकसभा सीट से उनको अधीर रंजन चौधरी के खिलाफ गैर बंगाली क्रिकेटर युसूफ पठान को चुनावी मैदान में उतारना पड़ा। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी 11 विधानसभा की सीटों पर प्रथम पायदान पर रही थी। वो भी तब जबकि, कांग्रेस पार्टी का विधानसभा में एक भी सदस्य नहीं है। ये सभी सीट मुस्लिम बाहुल्य हैं। ममता बनर्जी को उम्मीद थी कि राज्य में मुख्य लड़ाई भाजपा और उनकी पार्टी के बीच है, अतएव मुस्लिम मतदाता पूर्ववत की तरह ही इस बार भी उनके पार्टी को मत करेंगे।
मगर लोकसभा चुनाव ने भी ममता बनर्जी का मुस्लिम वोटबेंक के प्रति परेशानी बढ़ा दिया था। लोकसभा चुनाव में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस पार्टी के बीच सीधी टक्कर के बावजूद भी मुस्लिम बाहुल्य लोकसभा सीटों रायगंज, मालदह उत्तर , मालदह दक्षिण, जंगीपुर, बहरामपुर, बीरभूम पर कांग्रेस पार्टी को अच्छा खासा मत मिला। इस वजह से ममता बनर्जी काफी परेशान हैं। मालदह दक्षिण सीट पर कांग्रेस पार्टी ने जीत भी दर्ज़ की थी।
इसके अलावा ममता बनर्जी मालदह जिले के बड़ी मुस्लिम नेत्री मौसम नूर के पार्टी छोड़कर फिर से कांग्रेस पार्टी में शामिल होने से भी दुखी हैं क्योंकि मौसम नूर के परिवार का उत्तरी बंगाल के मुस्लिम बाहुल्य इलाकों मालदह , मुर्शिदाबाद, उत्तर और दक्षिणी दिनाजपुर जिलों में मजबूत पकड़ है। इन चारो जिलों में 49 विधानसभा की सीटें हैं और 2021 के विधानसभा चुनाव में इन जिलों में 38 विधानसभा सीटों पर तृणमूल कांग्रेस पार्टी ने जीत दर्ज़ की थी। कुल मिलाकर ममता बनर्जी पर अब मुस्लिम वोटबैंक का पहले की तरह विश्वाश नहीं रहा।

















