अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कुछ समर्थक ऐसे भी रहे हैं, जिन्होंने अमेरिका को महान बनाने का अभियान चलाया था और मेक अमेरिका ग्रेट अगैन में भारतीयों को एक बाधा माना था। उन्होंने यहां तक कहा था कि उनके देश को श्वेत लोगों ने बनाया था न कि भारत से आने वाले तीसरी दुनिया के हमलावरों ने। भारत और भारतीयों के लिए अत्यंत ही अपमानजनक बातें कही थीं। लॉरा लूमर ने तो यहां तक कहा था कि भारत में न ही रनिंग वाटर है और न ही टॉइलेट पेपर!
जब लॉरा लूमर को इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में बुलाया गया तो भारत के लोगों का गुस्सा भड़का। सवाल उठाए कि आखिर उन्हें इस कॉन्क्लेव में क्यों बुलाया जा रहा है? इतने शोर के बाद भी वह भारत आईं और अपने कुछ पोस्ट के लिए माफी मांगी। अब वह माफी कितनी सच है, यह तो समय ही बताएगा। मगर उन्होंने इस्लाम, कट्टरपंथियों और अपने देश के मुस्लिमों को लेकर जो कहा, उसे लेकर कथित निरपेक्ष पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने जो प्रतिक्रिया दी उस पर काफी चर्चा हो रही है।
राजदीप ने ल़ॉरा लूमर की छवि को सुधारने के लिए जान-बूझकर किया या फिर अपनी छवि को और भी ज्यादा सेक्युलर दिखाने के लिए, यह तो अभी भविष्य के गर्भ में है।
क्या कहा लॉरा लूमर ने
लॉरा लूमर ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका में मुस्लिमों को सार्वजनिक पदों पर नहीं चुना जाना चाहिए। मिनेसोटा की प्रतिनिधि इल्हान उमर, न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी, मिनेसोटा के अटॉर्नी जनरल कीथ एलिसन और मिशिगन की प्रतिनिधि रशीदा तालिब जैसे नेताओं की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ये मुस्लिम राजनेता “हर चीज में इस्लाम को सबसे आगे और केंद्र में रखते हैं।”
लूमर ने इस विचार पर भी जोर दिया कि दरअसल “जनसांख्यिकी ही आपका भविष्य है!” कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगता कि कुरान के नाम पर कसम लेने वाले ये राजनेता कभी भी अमेरिका के लिए वफादार हो पाएंगे। हिजाब का उल्लेख करते हुए कहा कि ये लोग कानून अपने अनुसार बदलते हैं, जैसे कि यूएस कॉन्ग्रेस में काफी लंबे समय से कानून था कि सिर नहीं ढका जाएगा, मगर अब आप कॉन्ग्रेस में हिजाब देख सकते हैं।
लॉरा वैसे ही इस्लाम और कट्टरपंथियों को लेकर काफी मुखर रहती हैं। उन पर अक्सर इस्लामोफोबिक होने के आरोप लगते हैं। वे खुद को इस्लामोफोबिक कहती भी हैं। वे यह भी कहती हैं कि इस्लाम एक ऐसी विचारधारा है, जो पूरी तरह से पश्चिमी मूल्यों के खिलाफ है, यह अमेरिकी मूल्यों के भी खिलाफ है। अगर आप कुरान पर हाथ रखकर कोई कसम ले रहे हैं, तो आप शरिया कानून के प्रति अपनी वफा दिखा रहे हैं, जिसका यह मानना है कि वह अमेरिका के कानून से भी बढ़कर है।
राजदीप सरदेसाई ने लॉरा लूमर को बताया इस्लामोफोबिक
जब लॉरा अपनी बात कह रही थीं तो उससे कई लोग असहज हो गए और इंडिया टुडे के पत्रकार राजदीप ने उनसे कहा कि उनकी टिप्पणियां नस्लवादी और इस्लामोफोबिक हैं। राजदीप अपनी इस टिप्पणी को साझा भी कर रहे हैं और इंडिया टुडे ने भी यह लिखा कि इंडिया टुडे के राजदीप सरदेसाई ने लॉरा लूमर पर भड़क कर टिप्पणी की कि उनके बयान पूरी तरह से नस्लवादी और इस्लामोफोबिक हैं।
लॉरा ने भी उत्तर दिया
लॉरा लूमर ने एक्स पर राजदीप के इस प्रश्न का उत्तर दिया। उन्होंने लिखा कि राजदीप, इस दुनिया में इस्लामोफोबिया जैसी कोई चीज नहीं है।
There is no such thing as Islamophobia @sardesairajdeep.
A phobia is an irrational fear. It is NOT irrational to fear Islam, an ideology that explicitly calls for the killing of all non-Muslims. How can you sit back and watch the Islamic massacre and raping of Hindus and defend… https://t.co/4UKOuW9Luk
— Laura Loomer (@LauraLoomer) March 14, 2026
उन्होंने लिखा कि फोबिया एक आधारहीन डर होता है। लेकिन इस्लाम से डरना बेबुनियाद नहीं है—यह एक ऐसी विचारधारा है जो साफ तौर पर सभी गैर-मुसलमानों को मारने की बात करती है। आप चुपचाप बैठकर जिहादियों के हाथों हिंदुओं का जीनोसाइड और बलात्कार होते कैसे देख सकते हैं, और अपने ही देश में उन पाकिस्तानी घुसपैठियों का बचाव कैसे कर सकते हैं, जो भारत को एक मुस्लिम देश बनाना चाहते हैं?
क्या आपके अंदर देश के लिए कोई गौरव-बोध नहीं है? क्या आप अपने देश को हिंदू-बहुल देश के रूप में बनाए रखने की इच्छा नहीं रखते? आपके अंदर अपने अस्तित्व की रक्षा की कोई इच्छा शक्ति या प्रवृत्ति है ही नहीं!”
लॉरा जब अस्तित्व की रक्षा की बात कहती हैं, तो वह यह भूल जाती हैं कि भारत में कथित प्रगतिशील या सेक्युलर हिन्दू ऐसा वर्ग है, जिसके भीतर अपने अस्तित्व को लेकर ही घृणा है, वह हिन्दू होने के अस्तित्व से ही घृणा करता है तो ऐसे में अपने उस अस्तित्व के प्रति गौरव का बोध कैसे उत्पन्न हो सकता है? राजदीप जैसे लोगों के प्रति हिन्दू होने के बोध को लेकर ही हीनता का भाव दिखता है, तो फिर अपने हिन्दू होने के अस्तित्व की रक्षा के लिए वह कैसे सहज हो सकते हैं?
लॉरा ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में कहा कि वे भारत विरोधी पोस्ट्स के लिए माफी मांगती हैं। उनके दिल में हिंदुओं या भारत को लेकर घृणा नहीं है, वे इस्लाम की नृशंसता के विषय में बात करती हैं, जिसने पूरी दुनिया में लाखों हिंदुओं की हत्या की है।
हिन्दू सदियों से जिहादियों का शिकार होता रहा है। राजदीप जैसे लोग तो भारत का इतिहास ही मुगल काल से मानते हैं तो फिर हिंदुओं के अस्तित्व की रक्षा का बोध कैसे आएगा, यह भी एक प्रश्न है!

















