RSS ABPS 2026: अंडमान, अरुणाचल और लद्दाख में हुआ संघ का विस्तार, RSS के भविष्य का रोडमैप तैयार
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RSS ABPS 2026: अंडमान, अरुणाचल और लद्दाख में हुआ संघ का विस्तार, RSS के भविष्य का रोडमैप तैयार

देश के 46 प्रांतों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में संघ ने भविष्य का रोडमैप तैयार किया। साथ ही शताब्दी वर्ष के साथ संघ का विस्तार, सामाजिक परिवर्तन और वैचारिक विमर्श पर जोर देने जैसे कई विषयों की योजना भी बनी।

Written byराजेश शांडिल्यराजेश शांडिल्य — edited by Lalit Fulara
Mar 15, 2026, 09:16 pm IST
inसंघ @100
पत्रकारों को संबोधित करते सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले। साथ में संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर जी।

पत्रकारों को संबोधित करते सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले। साथ में संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर जी।

पानीपत। देश के 46 प्रांतों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में संघ ने भविष्य का रोडमैप तैयार किया। साथ ही शताब्दी वर्ष के साथ संघ का विस्तार, सामाजिक परिवर्तन और वैचारिक विमर्श पर जोर देने जैसे कई विषयों की योजना भी बनी। हरियाणा के समालखा स्थित पट्टी कल्याणा माधव सृष्टि परिसर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा ने रविवार को पूरी हुई। इस सभा के शुरु होने से पहले से लेकर आज तक तीन प्रेसवार्ता के माध्यम से संघ के दिग्गजों ने मीडिया के समक्ष अपनी बात रखी और प्रश्नों के उत्तर भी दिये।इस दौरान संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर,अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर और प्रदीप जोशी उपस्थित रहे।

इनमें प्रतिनिधि सभा के आखिरी दिन संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले की प्रेस वार्ता को इसलिये अहम माना जा रहा था, क्योंकि मीडिया को संघ द्वारा बनाई गई योजना के साथ ज्यादा रुचि संगठनात्मक बदलाव की सूचना में थीम, मगर होसबले ने प्रेसवार्ता कर बैठक में हुई चर्चाओं और निर्णयों की जानकारी दी।उन्होंने बताया कि प्रतिनिधि सभा के सदस्य तीन वर्ष के लिए निर्वाचित और नियुक्त किए जाते हैं। कुछ सदस्य चुनाव से आते हैं तो कुछ नियुक्ति के माध्यम से। इस वर्ष प्रतिनिधि सभा में कुल 1488 प्रतिनिधि निर्धारित थे, जिनमें से 1487 प्रतिनिधियों की उपस्थिति अपेक्षित रही। देश के 46 प्रांतों से प्रतिनिधि इस अधिवेशन में शामिल हुए,लेकिन परिवर्तन नहीं हुआ है और जो होगा उसकी जानकारी बाद में दी जाएगी।

पत्रकारों को संबोधित करते सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले। साथ में संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर जी।

उन्होंने बताया कि इस बार संघ कार्य के विस्तार और शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों पर विशेष रूप से चर्चा हुई। संघ के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है। इसके लिए संगठनात्मक और सामाजिक दोनों स्तरों पर व्यापक योजनाएं बनाई गई हैं। संगठनात्मक दृष्टि से संघ कार्य का भौगोलिक विस्तार बढ़ाने, देशभर में नित्य शाखाओं और साप्ताहिक मिलनों की संख्या बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। संघ कार्य का विस्तार सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों तक भी पहुंचा है। अंडमान में संघ की शाखाएं चल रही हैं, हालांकि अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के निकोबार क्षेत्र में सरकारी प्रतिबंधों के कारण गतिविधियां सीमित हैं। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख जैसे दूरस्थ क्षेत्रों तथा जनजातीय इलाकों में भी संघ का विस्तार हुआ है।

दत्तात्रेय होसबले ने कहा कि शाखा केवल संख्या बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य समाज में जागरूक और जिम्मेदार व्यक्तित्व का निर्माण करना है। स्वयंसेवकों में तीन प्रमुख दृष्टियों का विकास किया जाता है,पूरे भारत को एकात्म दृष्टि से देखना, जाति और समुदाय से ऊपर उठकर पूरे समाज के लिए सोचना तथा देश हमें देता है सब कुछ, हम भी कुछ दें की भावना विकसित करना। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ कार्य केवल विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि कार्यकर्ताओं की गुणवत्ता, दृष्टि और समाज को जोड़ने की क्षमता का विकास भी उतना ही आवश्यक है। समाज परिवर्तन के लिए संघ ने पांच प्रमुख विषयों,सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवनशैली और नागरिक कर्तव्य बोध पर कार्य करने का लक्ष्य रखा है, जिन्हें पंच परिवर्तन कहा गया है।

होसबले के अनुसार वैचारिक विमर्श के महत्व पर भी जोर देने और भारत के इतिहास, संस्कृति और ज्ञान परंपरा को लेकर सही विमर्श की आवश्यकता है और विश्वविद्यालयों, पाठ्यपुस्तकों तथा समाज में भारतीय दृष्टिकोण स्थापित करने के प्रयास होने चाहिए। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के शासन के कारण समाज में औपनिवेशिक मानसिकता विकसित हुई, जिससे मुक्ति आवश्यक है। हिंदुत्व के विषय में उन्होंने कहा कि इसे केवल दर्शन नहीं बल्कि जीवन शैली के रूप में समझा जाना चाहिए। भारत की इस जीवन दृष्टि को वैश्विक स्तर पर भी प्रस्तुत करने की आवश्यकता है। उन्होंने इसका उदाहरण देते हुए कहा कि जी-20 शिखर सम्मेलन में भारत ने एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य का संदेश दिया। उन्होंने समाज में सक्रिय विभिन्न संस्थाओं और लोगों के समन्वय की आवश्यकता पर भी बल दिया। इसे उन्होंने पावर आफ द गाड,यानी सज्जन शक्ति का समन्वय बताया। इसी उद्देश्य से देशभर में अनेक समाज संपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें प्रबुद्ध नागरिक गोष्ठियां, हिंदू सम्मेलन, धर्म सम्मेलन और गृह संपर्क अभियान शामिल हैं।

इन कार्यक्रमों में विभिन्न संप्रदायों के संतों का मार्गदर्शन और समाज के प्रमुख पुरुषों तथा महिलाओं की सक्रिय भागीदारी भी हो रही है। शताब्दी वर्ष के दौरान युवाओं के लिए भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें संवाद कार्यक्रम, प्रतियोगिताएं और बड़े युवा सम्मेलन शामिल होंगे। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि अंडमान के पोर्ट ब्लेयर में आयोजित हिंदू सम्मेलन में 9 द्वीपों से लगभग 13 हजार लोग शामिल हुए। वहीं अरुणाचल प्रदेश में आयोजित 21 धर्म सम्मेलनों में लगभग 37 हजार लोगों की भागीदारी रही और आगे 15 और सम्मेलन प्रस्तावित हैं। इसके अलावा गुरु तेग बहादुर की 350वीं शहीदी वर्षगांठ पर भी देश के लगभग 18 राज्यों में कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें करीब 7 लाख लोगों ने भाग लिया। वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए।इसमें सिख समाज और संतों की बड़ी संख्या में भागीदारी रही।

आगामी समय में संत रविदास की 650वीं जयंती वर्ष के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, जिनके माध्यम से उनके संदेश को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाने का प्रयास होगा।संघ के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अंतर्गत संघ शिक्षा वर्ग भी आयोजित किए जाएंगे। कुल 75 प्रशिक्षण वर्ग प्रस्तावित हैं, जिनमें 63 क्षेत्रीय स्तर के, 11 क्षेत्र स्तर के और एक अखिल भारतीय वर्ग नागपुर में आयोजित होगा। सामाजिक कार्य योजनाओं के अंतर्गत गोसेवा और ग्राम विकास पर भी विशेष कार्य किया जाएगा। पर्यावरण संरक्षण के लिए हरित घर अभियान चलाया जाएगा, जिसके अंतर्गत पॉलीथिन का कम उपयोग, पानी की बचत, पक्षियों के लिए दाना-पानी रखना, छतों पर सब्जियां उगाना और गोबर व गोमूत्र का जैविक उपयोग जैसे सुझाव दिए गए हैं।बैठक में आने वाले वर्ष के लिए संघ का वार्षिक कैलेंडर भी तैयार किया गया।

Topics: संघराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघRashtriya Swayamsevak SanghAll India Representative AssemblyRSS ABPS 2026The future roadmap of the RSS
राजेश शांडिल्य
राजेश शांडिल्य
वरिष्ठ पत्रकार [Read more]
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