परमाणु निरोध, प्रसार और वैश्विक सुरक्षा का नाज़ुक संतुलन, द्वितीय विश्व युद्ध से मिली ऐतिहासिक सीख
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परमाणु निरोध, प्रसार और वैश्विक सुरक्षा का नाज़ुक संतुलन, द्वितीय विश्व युद्ध से मिली ऐतिहासिक सीख

1945 के बाद से परमाणु हथियारों ने एक विचित्र प्रकार की स्थिरता पैदा की है। बड़े देश जानते हैं कि परमाणु युद्ध का परिणाम पारस्परिक विनाश हो सकता है। इसी कारण परमाणु निरोध की अवधारणा ने परमाणु शक्तियों के बीच सीधे युद्ध को रोके रखा है।

Written byसुबोध मिश्रासुबोध मिश्रा — edited by Mahak Singh
Mar 15, 2026, 02:46 pm IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

आधुनिक इतिहास में बहुत कम युद्ध ऐसे रहे हैं जिनका अंत पूरी तरह स्पष्ट और निर्णायक रहा हो। द्वितीय विश्व युद्ध शायद एकमात्र ऐसा वैश्विक संघर्ष था जिसका अंत स्पष्ट रूप से हुआ। जर्मनी, इटली और जापान जैसे धुरी राष्ट्रों की पूर्ण पराजय ने इस विनाशकारी युद्ध का समापन किया। ये राष्ट्र आक्रामक विस्तारवाद की नीति पर चल रहे थे और लोकतांत्रिक देशों के साथ-साथ सोवियत संघ जैसे साम्यवादी देशों के लिए भी खतरा बन गए थे।

उस समय एक महत्वपूर्ण तथ्य यह था कि धुरी राष्ट्रों के पास परमाणु हथियार नहीं थे। 1945 में अमेरिका द्वारा जापान पर परमाणु बम गिराए जाने के बाद युद्ध अचानक समाप्त हो गया। इस घटना ने पूरी दुनिया को यह समझा दिया कि यदि परमाणु हथियारों का व्यापक उपयोग हुआ तो मानव सभ्यता का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है।

परमाणु निरोध और रणनीतिक संयम

1945 के बाद से परमाणु हथियारों ने एक विचित्र प्रकार की स्थिरता पैदा की है। बड़े देश जानते हैं कि परमाणु युद्ध का परिणाम पारस्परिक विनाश हो सकता है। इसी कारण परमाणु निरोध की अवधारणा ने परमाणु शक्तियों के बीच सीधे युद्ध को रोके रखा है।

उदाहरण के लिए रूस-यूक्रेन युद्ध में रूस ने परमाणु विकल्प का उपयोग नहीं किया और संघर्ष को पारंपरिक युद्ध तक सीमित रखा है। इसी प्रकार इज़राइल, जो कि परमाणु क्षमता रखने वाला देश माना जाता है, ने भी क्षेत्रीय तनावों के बावजूद परमाणु हथियारों का उपयोग नहीं किया। यह दर्शाता है कि परमाणु हथियार मुख्यतः युद्ध के लिए नहीं बल्कि निरोध के साधन के रूप में देखे जाते हैं।

परमाणु प्रसार का बढ़ता खतरा

आज वास्तविक खतरा मौजूदा परमाणु शक्तियों से कम और नए देशों में परमाणु क्षमता फैलने से अधिक है। जब यह क्षमता राजनीतिक रूप से अस्थिर या वैचारिक रूप से कट्टर राज्यों तक पहुँचती है, तो वैश्विक सुरक्षा अधिक अस्थिर हो जाती है।

उत्तर कोरिया और पाकिस्तान जैसे देशों ने कई बार परमाणु धमकियों का सहारा लिया है। दक्षिण एशिया में पाकिस्तान ने समय-समय पर भारत के खिलाफ परमाणु बयानबाज़ी की है। इसके विपरीत भारत ने अपेक्षाकृत संयमित नीति अपनाई है और परमाणु हथियारों को राजनीतिक धमकी के रूप में इस्तेमाल नहीं किया। रणनीतिक दृष्टि से भी यह स्पष्ट है कि भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध दोनों देशों के लिए विनाशकारी होगा, और पाकिस्तान के लिए इसके परिणाम और भी अधिक गंभीर हो सकते हैं।

ईरान और वैश्विक चिंता

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर विश्व स्तर पर गंभीर बहस चल रही है। ईरान की धार्मिक नेतृत्व व्यवस्था ने कई बार इज़राइल के प्रति अत्यंत कठोर बयान दिए हैं। आलोचकों का तर्क है कि यदि वैचारिक रूप से प्रेरित शासन परमाणु हथियार हासिल कर लेता है तो मध्य पूर्व की स्थिरता गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। इसी संदर्भ में डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेताओं का तर्क सामने आता है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना किसी भी बड़े समझौते या युद्धविराम से पहले आवश्यक है।

महाशक्तियों की प्रतिस्पर्धा

वैश्विक अस्थिरता का एक और पहलू महाशक्तियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा है। रूस और यूक्रेन का युद्ध केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं बल्कि व्यापक भू-राजनीतिक तनाव का हिस्सा है। रूस का मानना है कि पश्चिमी सैन्य गठबंधनों का उसके सीमाओं के करीब विस्तार उसकी सुरक्षा के लिए खतरा है। हालाँकि इस तर्क से सभी सहमत नहीं हैं, फिर भी यह स्पष्ट है कि परमाणु निरोध ने इस संघर्ष को भी सीमित रखने में भूमिका निभाई है।

मानवता के सामने मुख्य चुनौती

आज की दुनिया तकनीकी रूप से उन्नत है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज़ से अत्यंत नाज़ुक भी। परमाणु हथियारों ने बड़े देशों के बीच युद्ध को रोका है, परंतु उनका प्रसार वैश्विक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने सबसे महत्वपूर्ण कार्य है-  परमाणु प्रसार को रोकना, इससे पहले कि किसी भी बड़े राजनीतिक समझौते की बात की जाए। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो भविष्य के संघर्षों का अंत शायद उतना नियंत्रित नहीं होगा जितना मानवता उम्मीद करती है।

Topics: World War IIthe threat of nuclear warthe Russia-Ukraine Warthe Middle East and Iran's nuclear programthe India-Pakistan nuclear balanceNuclear Weaponsand the international security systemStrategic StabilityGlobal GeopoliticsNuclear deterrencenuclear proliferationglobal security
सुबोध मिश्रा
सुबोध मिश्रा
वरिष्ठ पत्रकार (हिंदुस्तान टाइम्स और पीटीआई ) [Read more]
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