भुवनेश्वर: ओडिशा में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को एक बड़ी सफलता मिली है। राज्य के कंधमाल जिले में 10 माओवादी कैडरों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इन सभी ने हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास जताया और सामान्य जीवन जीने की इच्छा व्यक्त की। आत्मसमर्पण के दौरान उन्होंने अपने पास मौजूद हथियार, गोला-बारूद और अन्य सामग्री भी पुलिस को सौंप दी।
यह आत्मसमर्पण कार्यक्रम कंधमाल जिले के मुख्यालय फुलबनी स्थित माडीकुंडा रिजर्व पुलिस ग्राउंड में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयोजित किया गया। सभी माओवादी कैडरों ने राज्य के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एंटी-नक्सल ऑपरेशन) संजीब पेडा के सामने औपचारिक रूप से हथियार डाल दिए। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह घटना नक्सल संगठन CPI (माओवादी) के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है और इससे क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों को कमजोर करने में मदद मिलेगी।
खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हाल ही में खुफिया एजेंसियों को सूचना मिली थी कि कंधमाल, कालाहांडी और रायगढ़ा जिलों की सीमावर्ती जंगलों में लगभग 25 माओवादी सक्रिय हैं। ये सभी माओवादी कमांडर शुकुरु और शीला के नेतृत्व में काम कर रहे थे और क्षेत्र में विभिन्न उग्रवादी गतिविधियों में शामिल थे।
इसी दौरान पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने लगातार दबाव बनाते हुए माओवादियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया। इसके परिणामस्वरूप 10 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण करने का फैसला किया।
एडीजी संजीब पेडा ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वालों में एक स्टेट कमेटी सदस्य, एक डिविजनल कमेटी सदस्य, दो एरिया कमेटी सदस्य और छह सामान्य पार्टी सदस्य शामिल हैं। इन सभी के खिलाफ सरकार ने कुल मिलाकर लगभग 1.15 करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।

वरिष्ठ माओवादी नेता भी शामिल
आत्मसमर्पण करने वालों में सबसे प्रमुख नाम सानू पोट्टम उर्फ नीतू (48) का है। वह छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र के कुरसिल गांव का निवासी है। उसने वर्ष 1997 में माओवादी संगठन जॉइन किया था और धीरे-धीरे संगठन में ऊंचे पद तक पहुंच गया।
करीब तीन दशकों तक माओवादी संगठन से जुड़े रहने के बाद वह CPI (माओवादी) के केकेबीएन डिवीजन का स्टेट कमेटी सदस्य बन गया था। उसके खिलाफ कई माओवादी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप थे और उसकी गिरफ्तारी पर सरकार ने 65 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। एक अन्य महत्वपूर्ण आत्मसमर्पण शांतेई सलाम उर्फ अनुपा (45) का है, जो सानू पोट्टम की पत्नी है। वह भी संगठन में डिविजनल कमेटी सदस्य के रूप में सक्रिय थी। छत्तीसगढ़ के राजबेड़ा गांव की रहने वाली अनुपा ने 1998 में माओवादी संगठन जॉइन किया था और पिछले दो दशकों से अधिक समय से उग्रवादी गतिविधियों में शामिल रही।आत्मसमर्पण के दौरान उसने अपने पास मौजूद एक इंसास राइफल पुलिस को सौंप दी।
अन्य माओवादी कैडरों ने भी छोड़ा हथियार
इन दोनों वरिष्ठ नेताओं के अलावा आठ अन्य माओवादी कैडरों ने भी पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया। इनमें लक्ष्मी मडवी उर्फ संगीता, सुनील तेलम, मंजुलता पुनेम उर्फ शिल्पा, रामवती वयाम उर्फ जमुना, गणेश कुंजाम, सुशीला डुडी, सरिता कुहुडाम और छोड़ी योगी उर्फ राजनी शामिल हैं। इन दसों में सात महिलाएं और तीन पुरुष हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कुछ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में महिलाओं की भी बड़ी संख्या माओवादी संगठनों से जुड़ी रही है। सभी आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़ने और सामान्य जीवन में लौटने की इच्छा जताई है।
हथियार और गोला-बारूद बरामद
आत्मसमर्पण के दौरान माओवादियों ने कुल 10 हथियार पुलिस को सौंपे। इनमें दो इंसास राइफल, दो सेल्फ लोडिंग राइफल (SLR), तीन .303 राइफल, दो सिंगल शॉट गन और एक 12 बोर बंदूक शामिल हैं।
इसके अलावा काफी मात्रा में गोला-बारूद भी पुलिस को सौंपा गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इन हथियारों को जब्त कर लिया गया है और आगे की जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है।
पुनर्वास नीति का मिला लाभ
ओडिशा सरकार ने माओवादी कैडरों को मुख्यधारा में लाने के लिए एक व्यापक आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति लागू की है। इसके तहत आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों को आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर प्रदान किए जाते हैं ताकि वे समाज में सामान्य जीवन जी सकें। पुलिस सूत्रों के अनुसार इन 10 माओवादियों पर घोषित इनाम की कुल राशि लगभग 1.15 करोड़ रुपये है। इसके अलावा राज्य सरकार की पुनर्वास योजना के तहत उन्हें करीब 40 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता भी मिल सकती है। इस तरह कुल मिलाकर इन आत्मसमर्पित कैडरों को लगभग 1.55 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता मिल सकती है।
घट रहा है माओवादियों का प्रभाव
एडीजी संजीब पेडा ने कहा कि वरिष्ठ माओवादी नेताओं का आत्मसमर्पण यह दर्शाता है कि राज्य में वामपंथी उग्रवाद का प्रभाव लगातार कमजोर हो रहा है। सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से माओवादी संगठनों की संरचना और उनकी क्षमता दोनों प्रभावित हुई हैं। उन्होंने बताया कि इन अभियानों में ओडिशा पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG), जिला स्वयंसेवी बल (DVF), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं। दिसंबर 2025 में कंधमाल जिले में माओवादी केंद्रीय समिति के सदस्य गणेश उइके की मौत के बाद संगठन पर और दबाव बढ़ गया था। इसके बाद से कई माओवादी कैडर संगठन छोड़ने लगे हैं।
राज्य में घट रही माओवादियों की संख्या
नवीनतम आत्मसमर्पण के बाद सुरक्षा एजेंसियों का अनुमान है कि ओडिशा में सक्रिय सशस्त्र माओवादियों की संख्या अब घटकर लगभग 25 रह गई है। इनकी गतिविधियां मुख्य रूप से कंधमाल, कालाहांडी और रायगढ़ा जिलों की सीमावर्ती जंगलों तक सीमित रह गई हैं। सुरक्षा बल इन इलाकों में लगातार गश्त और निगरानी बढ़ा रहे हैं।
मार्च 2026 तक माओवादी मुक्त राज्य का लक्ष्य
ओडिशा पुलिस ने राज्य को पूरी तरह माओवादी मुक्त बनाने के लिए 31 मार्च 2026 तक का लक्ष्य तय किया है। अधिकारियों का मानना है कि लगातार सुरक्षा अभियान और प्रभावी पुनर्वास नीति के कारण अधिक से अधिक माओवादी कैडर आत्मसमर्पण करेंगे। इस कार्यक्रम में आईजी अमितेंद्र नाथ सिन्हा, साउदर्न रेंज के आईजी नीति शेखर, आईजी ऑपरेशन डॉ. दीपक कुमार, डीआईजी अखिलेश्वर सिंह, कंधमाल के एसपी हरीश बी.सी. और अतिरिक्त एसपी रामेंद्र प्रसाद सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
पुलिस ने अंत में बाकी माओवादी कैडरों से भी अपील की कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करें और सरकार की पुनर्वास योजना का लाभ उठाकर अपने और अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य बनाएं।

















