इजरायल और अमेरिका के द्वारा ईरान पर छेड़े गए युद्ध के बाद से आईआरजीसी लगातार मिडिल ईस्ट के देशों को दहला रहा है। उसने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करके जहाजों की आवाजाही को ठप कर दिया है। इससे भारत समेत कई देशों में तेल संकट गहरा गया है। इस बीच भारतीय विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बात की। इसके बाद ईरान ने भारत के टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की इजाजत दे दी है। जिन भी टैंकरों पर भारत का झंडा लगा होगा, उस पर अब हमले नहीं किए जाएंगे।
क्या कहा ईरान ने
दरअसल, जयशंकर और अरागची की यह तीसरी बातचीत थी, जो पिछले महीने अमेरिका और इज़राइल के साथ शुरू हुए युद्ध के बाद हुई। मंगलवार 11 मार्च 2026 को हुई इस फोन कॉल में वेस्ट एशिया की स्थिति पर चर्चा हुई। इसी दौरान ईरान ने भारतीय झंडे वाले टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट से पास करने की अनुमति दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दो भारतीय टैंकर – पुष्पक और परिमल – सुरक्षित तरीके से इस जलमार्ग से गुजर रहे हैं। लेकिन पश्चिमी देशों (अमेरिका, यूरोप), इज़राइल के टैंकरों और कंटेनर शिप्स के लिए यह रास्ता बंद है। ईरान ने इस इलाके में शिपिंग पर सख्ती बरती हुई है, खासकर हमलों के बाद।
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क्षेत्र में हालात
इस समय होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमले बढ़ गए हैं। 12 मार्च को ही कम से कम छह जहाजों पर हमले हुए। ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि कुछ जहाजों ने उनकी चेतावनी नहीं मानी, इसलिए उन पर कार्रवाई की गई, जैसे लाइबेरिया फ्लैग वाला एक्सप्रेस रोम और थाई बुल्क कैरियर मयूरी नारी। ऐसे हमलों से शिपिंग रुक-रुक कर चल रही है।
भारत के लिए राहत की खबर
भारत के लिए यह राहत की बात है क्योंकि हमारा बड़ा हिस्सा तेल आयात इसी रास्ते से आता है, हालांकि अभी 70 फीसदी तेल इम्पोर्ट होर्मुज के बाहर के रास्तों से हो रहा है। युद्ध शुरू होने से पहले ब्रेंट क्रूड ऑयल $72.48 प्रति बैरल था, जो अब $100 से ऊपर चला गया है – सोमवार को $119.50 तक पहुंचा और बुधवार को फिर $100 पार किया।

















