जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में पिछले एक महीने से छात्रों का आंदोलन चल रहा है। बात शुरू हुई कुलपति प्रोफेसर संतिश्री धूलिपुड़ी पंडित के एक पॉडकास्ट में दिए गए बयान से, जिन्हें छात्रों ने जातिवादी टिप्पणियां माना। इन बयानों के बाद से JNUSU (जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन) और छात्र लगातार उनकी इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। आंदोलन में भ्रष्टाचार के आरोप भी शामिल हो गए हैं।
प्रदर्शन कैसे बढ़ा
फरवरी के अंत में सैकड़ों छात्रों ने शिक्षा मंत्रालय की तरफ मार्च निकाला। पुलिस कार्रवाई हुई, जिसमें 50 से ज्यादा छात्रों को हिरासत में लिया गया। 14 छात्रों (जिनमें JNUSU प्रेसिडेंट अदिति मिश्रा भी शामिल थीं) को गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेजा गया, जहां उन्हें तीन दिन रखा गया। छात्रों का कहना है कि कुलपति ने पुलिस की इस कार्रवाई की निंदा नहीं की, जिससे उन्हें लगता है कि प्रशासन और पुलिस में मिलीभगत है।इसके अलावा, UGC के नियमों को लागू करने, यूनिवर्सिटी के बजट बढ़ाने और प्रशासनिक भ्रष्टाचार खत्म करने की मांग भी उठी। कई स्कूलों में लॉकडाउन और हंगर स्ट्राइक जैसी चीजें हुईं।
छात्रों ने कराया जनमत संग्रह
तनाव बढ़ने के बाद JNUSU ने 10 मार्च 2026 को पूरे कैंपस में एक रेफरेंडम (जनमत संग्रह) कराया। सवाल साफ था – क्या कुलपति जातिवादी बयानों और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के चलते पद पर बनी रहनी चाहिए? हर स्कूल में बूथ लगाए गए, पूर्व JNUTA सदस्यों ने निगरानी की। JNUSU के मुताबिक, कुल 2409 छात्रों ने वोट डाला। इसके बाद इसके नतीजे एक दिन पहले यानि कि 11 मार्च को आए। इसमें 2181 छात्र (90.54%) ने कहा कि कुलपति को हटना चाहिए या इस्तीफा देना चाहिए। 207 छात्रों (8.59%) ने उनके पद पर बने रहने का समर्थन किया। वहीं 21 वोट (0.87%) अमान्य पाए गए। छात्र संघ का कहना है कि ये नतीजे छात्रों की स्पष्ट राय दिखाते हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक तरीके से मांग रखने का माध्यम बताया।
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कुलपति की होगी जनसुनवाई
JNUSU ने ऐलान किया है कि अगले हफ्ते JNU कैंपस में कुलपति की जन सुनवाई होगी। इसमें रिटायर्ड जज, वकील, अकादमिक्स और सामाजिक कार्यकर्ताओं को बुलाया जा रहा है। छात्र एक आरोप-पत्र (चार्जशीट) पेश करेंगे, जिसमें कुलपति पर लगे भ्रष्टाचार और अन्य आरोपों का जिक्र होगा।











