अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मनमानियों के चलते दुनियाभर के देशों पर लगाए गए टैरिफ की भरपाई करने का वक्त आ गया है। अमेरिकी सरकार अब उन टैरिफ को रोल बैक करने की प्रक्रिया में जुटी है, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने अवैध और असंवैधानिक करार दिया था। ये टैरिफ दुनिया भर के कई देशों पर लगाए गए थे और अब इनकी वजह से जमा हुए पैसे वापस करने की योजना बन रही है। कुल मिलाकर करीब 166 अरब डॉलर का रिफंड होना है, जिसमें भारत जैसे देशों के आयातक भी शामिल हैं।
ट्रंप की मनमानी, अमेरिका पर भारी
डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति काल में अमेरिका ने कई देशों से आने वाले सामान पर भारी टैरिफ लगा दिए थे। ये टैरिफ काफी मनमाने ढंग से लगाए गए थे और अमेरिकी आर्थिक नीति का बड़ा हिस्सा माने जाते थे। लेकिन पिछले महीने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इन टैरिफ को असंवैधानिक घोषित कर दिया। कोर्ट का कहना था कि ये तरीका गलत था और कानून के खिलाफ था। इस फैसले के बाद अब इन टैरिफ से जमा हुए पैसे वापस करने का रास्ता साफ हो गया है।
रिफंड की प्रक्रिया कैसे चलेगी
अमेरिकी सीमा शुल्क और बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) के बड़े अधिकारी ब्रैंडन लार्ड ने कोर्ट में बताया कि 45 दिनों के अंदर एक पूरी सिस्टम तैयार कर ली जाएगी, जिससे रिफंड आसानी से दिया जा सके। सरकारी वकीलों ने संघीय व्यापार न्यायालय में बैठक की, जहां तय हुआ कि कुल 330,000 से ज्यादा आयातकों को ये 166 अरब डॉलर वापस मिलेंगे। आयातकों को बस एक साधारण घोषणा पत्र भरना होगा, जिसमें उन्होंने जो टैरिफ पेमेंट किया था उसका विवरण देना होगा। इसके बाद ब्याज समेत पूरा पैसा वापस कर दिया जाएगा। अच्छी बात ये है कि इसके लिए अलग से मुकदमा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरकार हर आयातक को वित्त विभाग के जरिए एकमुश्त भुगतान करेगी।
क्या है चुनौती
हालांकि अभी तक सिर्फ 21,423 आयातकों ने इलेक्ट्रॉनिक रिफंड सिस्टम के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है, जबकि कुल प्रभावित आयातक 330,000 से ज्यादा हैं। सीमा शुल्क एजेंसी अपनी मौजूदा आंतरिक प्रक्रिया का इस्तेमाल करके लाखों लोगों को कवर करने की कोशिश कर रही है। न्यायाधीश ने बुधवार को एक बैठक भी बुलाई थी, जहां इस पूरे मामले पर विस्तार से बात हुई और व्यापक आदेश पर चर्चा की गई।
ये कदम दुनिया भर के व्यापारियों के लिए राहत की बात है, क्योंकि ट्रंप के द्वारा लगाए टैरिफ काफी महंगे साबित हुए थे। भारत के कई कारोबारियों को भी इससे फायदा होगा, क्योंकि भारतीय सामान पर लगे अतिरिक्त शुल्क वापस मिल सकेंगे। प्रक्रिया को सरल रखने की कोशिश की जा रही है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ ले सकें।
















