यूरोप में लगातार एक बड़ा वर्ग यह बहस कर रहा है कि लगातार वहाँ का इस्लामीकरण हो रहा है और एक नहीं कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें यह स्पष्ट दिख रहा है कि जिहादी ताकतों के आगे सरकार आत्मसमर्पण कर रही है। और जब बात अवैध शरणार्थी या फिर शरणार्थियों की हो और उनके द्वारा की जा रही हिंसा की हो तो प्रशासन और भी अधिक डर-डर कर कदम रखता है।
ऐसा क्यों है, इसके कई कारण हो सकते हैं, और लोगों के अनुसार सरकार का अपना वोटबैंक सुनिश्चित करना इसका सबसे बड़ा कारण हो सकता है। परंतु यहाँ पर प्रश्न यह भी उठता है कि क्या किसी भी देश की ऐसी सरकार द्वारा अपने नागरिकों के खिलाफ कदम उठाया जा सकता है, जो उस देश के ही निवासी हैं और कर देते हैं और वह भी ऐसे लोगों के लिए जो न ही कर देते हैं और न ही उस देश के नागरिक हैं और न ही उस भूमि से सांस्कृतिक या किसी अन्य प्रकार से जुड़े हुए हैं।
सवालों के घेरे में स्कॉटलैंड पुलिस
ऐसे ही तमाम प्रश्न स्कॉटलैंड की पुलिस की हालिया कार्यवाही से उठते हैं। दरअसल स्कॉटलैंड की पुलिस ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसकी आलोचना हो रही है। पुलिस ने शरणार्थियों वाले होटल्स में हुई हिंसा और अपराधों के आँकड़े केवल इसलिए जाहिर करने से मना कर दिया है, क्योंकि उसे डर था कि इन आंकड़ों से हिंसा भड़क सकती है और समुदायों के बीच तनाव उत्पन्न हो सकता है। scottishdailyexpress.co.uk के अनुसार पुलिस ने स्कॉटिश डेली एक्सप्रेस द्वारा बहुत ही उचित अनुरोध को ताल दिया है और वह अनुरोध था कि स्कॉटलैंड में शरणार्थी होटल्स में अपराधों के सही आंकड़ों को बताया जाए। इसके अनुसार पुलिस के अधिकारियों को इस बात की चिंता है कि यदि इन आंकड़ों को जारी किया गया तो होटल्स के बाहर गुस्साए लोगों की भीड़ इकट्ठा हो जाएगी। और उसी प्रकार के विरोध प्रदर्शन होंगे, जैसे कि स्कॉटलैंड में पिछले वर्ष हुए थे।
कई यूरोपीय देशों में शरणार्थियों के खिलाफ हो रहा विरोध
केवल स्कॉटलैंड में ही नहीं, यूरोप के कई देशों में शरणार्थियों को लेकर आंदोलन हो रहे हैं। अफगानिस्तान, पाकिस्तान, एवं अफ्रीका के कई अशांत मुस्लिम देशों के लाखों लोग यूरोप में शरण लेने के लिए आ रहे हैं और शरण लेने के बाद उनकी अपराधों में संलिप्तता लोगों को चिंता में डालती है। स्कॉटिश डेली एक्सप्रेस के अनुसार, उन्होंने पाँच माइग्रेंट होटल्स में अपराधों के आँकड़े मांगे थे, जिनमें पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही और गिरफ्तारियाँ भी शामिल थीं। इसके अनुसार वे होटल्स हैं एर्स्किन में मुथु ग्लासगो रिवर होटल; ग्लासगो में मैक्लेज़ गेस्ट हाउस; पैस्ले में द वॉटरमिल होटल; ईस्ट किलब्राइड में द ब्रूस होटल; और फाल्किर्क में क्लैडन होटल।
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शरणार्थी अपराधों पर क्यों पर्दा डाल रही पुलिस
पुलिस को ऐसा लगता है कि यदि हिंसा के ये आँकड़े जाहिर कर दिए गए तो इन स्थानों के प्रयोग के संबंध में समुदायों के बीच तनाव बढ़ेगा और विशेषकर जो शरणार्थी हैं, उनके प्रवासन के मामलों को लेकर और भी हिंसा होगी। और लोगों को नुकसान पहुंचेगा। हालांकि, पुलिस का यह भी कहना है कि अपराधों के आंकड़ों में शरणार्थियों का विरोध कर रहे लोगों की संख्या अधिक हो सकती है। पुलिस का कहना है कि जो लोग इन स्थानों पर रह रहे हैं, वे हिंसा में लिप्त नहीं हो सकते हैं, जबकि इन स्थानों पर होने वाले अपराध और घटनाएं आंदोलन करने वाली घटनाओं से जुड़ी हुई हो सकती हैं। और ऐसा भी हो सकता है कि गलत संदर्भ बना दिए जाएं।
हालांकि जो प्रदर्शन हुए थे, वे शरणार्थियों के पक्ष और विरोध दोनों में ही हुए थे। शरणार्थियों के विरोध में फाल्किर्क में प्रदर्शन तब आरंभ हुए थे जब क्लैडन होटल में निवास कर चुके अफगानिस्तान मूल के शरणार्थी सादिक निकज़ाद को जून 2025 में एक 15 साल की स्थानीय लड़की के बलात्कार के आरोप में जेल भेज दिया गया था। इसी प्रकार दिसंबर में, एक और निवासी मुहम्मद शेखी, 22, दो यौन हमलों के आरोप में कोर्ट में पेश हुए।
यूरोप में अवैध शरणार्थियों द्वारा अपराध बढ़े
ऐसा नहीं है कि स्कॉटलैंड में ही शरणार्थियों द्वारा अपराध बढ़ रहे हैं। दरअसल, जिन-जिन देशों ने अशांत मुस्लिम देशों के नागरिकों को शरण देने की योजना बनाई है और वे इन्हें अपने यहाँ तमाम सुविधाओं के साथ बसा रहे हैं, उन देशों में महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों में लगातार ही वृद्धि होती जा रही है। एक तो ऐसे लोग होते हैं, जो शरण लेने के लिए देश में आवेदन करते हैं, मगर एक भारी संख्या उन लोगों की भी होती है जो तमाम तरह के गैरकानूनी माध्यमों का प्रयोग करते हैं और देश में अवैध रूप से घुसकर शरण मांगते हैं।
यूरोपीय महिलाओं के साथ अत्याचार पर चुप्पी
दोनों ही प्रकार के लोगों द्वारा यूरोप के कई देशों में महिलाओं के साथ जघन्य अपराध किये जा रहे हैं। हाल ही में ब्रिटेन में बलात्कार का एक मामला सामने आया था, जिसमें शरण चाहने वाले दो अफगानिस्तानी लोगों ने एक छोटी बच्ची के साथ बलात्कार किया था। लोगों ने ब्रिटेन में ऐसी घटनाओं को देखते हुए माइटरेंट रेप एपेड़ेमिक कहा है।
सोशल मीडिया और मीडिया ऐसे अपराधों से भरा हुआ है, परंतु यदि किसी भी देश की पुलिस आँकड़े सार्वजनिक करने से बचेगी तो प्रश्न उठेंगे ही कि आखिर यह क्यों हो रहा है? परंतु दुर्भाग्य की बात यही है कि इस क्यों का उत्तर वास्तव में किसी के पास है ही नहीं।












