ब्रिटेन में वैसे तो इन दिनों काफी गजब हो रहा है, परंतु एक ऐसा मामला चर्चा में है, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर काफी बहस हो रही है। यह मामला दरअसल कहने के लिए तो पशु स्वास्थ्य से जुड़ा है, मगर यह भी सभी को पता है कि यह मामला या निर्णय पशु स्वास्थ्य का नहीं है, बल्कि मुस्लिम समुदाय का विश्वास और भी अधिक पाने के लिए है।
कुत्तों की चिंता पर सवाल
लोग प्रश्न कर रहे हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ है इन कुत्तों के साथ कि वे इस सीमा तक अस्वस्थ हो गए कि उनकी प्रजातियाँ ही प्रतिबंधित कर दी गईं? यूनाइटेड किंगडम की वामपंथी सरकार ने यह अजीबोगरीब निर्णय लिया है। मीडिया के अनुसार अब ब्रिटेन में बीगल, डचशुंड, मास्टिफ, ग्रेट डेन्स, बॉक्सर और सेंट बर्नार्ड शीघ्र ही अतीत का हिस्सा बन सकते हैं। कुल मिलाकर, सरकार कम से कम 67 कुत्तों की नस्लों पर बैन लगाने पर विचार कर रही है, और इसका कारण पशु स्वास्थ्य को बताया जा रहा है।
ग्रूमिंग पीड़ित लड़कियों पर चुप्पी और कुत्तों से प्यार क्यों?
परंतु लोगों के गले से यह बात उतर नहीं रही है कि जो कीर स्टार्मर सरकार अभी तक ग्रूमिंग गैंग्स की पीड़ित लड़कियों के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित नहीं हुई, तो क्या वह कुत्तों के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित होगी? जिस सरकार ने अपनी बेटियों के लिए कदम नहीं उठाए, वह पशु कल्याण के लिए ऐसा कदम उठाएगी? ऐसा लोगों के गले से नीचे नहीं उतर रहा है। दरअसल, हाल ही में ब्रिटेन के ग्रामीण क्षेत्रों को लेकर एक रिपोर्ट आई थी और हमने उस रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं को लिखा भी था। उस रिपोर्ट में यह चिंता जताई गई थी कि ब्रिटेन में ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अपने कुत्तों के साथ रहते हैं, इसलिए मुस्लिम समुदाय के लोग वहाँ पर जा नहीं पाते हैं। चूंकि इस्लाम में कुत्तों को लेकर बहुत अलग प्रकार के विचार हैं और कुत्तों को कुछ विशेष प्रयोजनों के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकता है। कुत्ता पालना बहुत अच्छा समझा नहीं जाता है।
सोशल मीडिया पर गहराता सवाल
इसलिए लोगों का सोशल मीडिया पर यह कहना है कि कुत्तों की 67 नस्लों पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय आखिर किसके लिए है? और डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार कुत्तों को लेकर किये गए इस निर्णय का विरोध करने वालों ने चेतावनी जारी की है कि गर पार्लियामेंट की नई ब्रीडिंग गाइडलाइंस ज़रूरी हो गईं, तो ब्रिटेन में 67 कुत्तों की नस्लों पर प्रतिबंध लग सकता है।” ऐसा इसलिए है क्योंकि “जानवरों की भलाई के लिए बने ऑल-पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप (APPG) ने एक नया टूल लॉन्च किया है, जिससे यह पता लगाया जा सकेगा कि कोई कुत्ता स्वस्थ है या नहीं?”
इसे भी पढ़ें: ट्रंप की हत्या की साजिश रचने वाला आसिफ मर्चेंट कौन है? पाकिस्तानी मूल का IRGC से जुड़ा ऑपरेटिव
अब लोग प्रश्न कर रहे हैं कि इस समय जब इतने मामले देश के सामने हैं, उस समय कुत्तों के स्वास्थ्य का निर्धारण करने वाला टूल क्यों बनाया जा रहा है और यह इतना महत्वपूर्ण कैसे हो गया कि ब्रिटिश संसद में एक समूह ही इस मामले को लेकर समर्पित कर दिया गया?
क्या सच में बीमार हैं कुत्ते या मुस्लिम तुष्टिकरण
लोगों ने सोशल मीडिया पर प्रश्न किया कि क्या ब्रिटेन में वास्तव में कुत्ते महामारी का शिकार हो रहे हैं या फिर वे इस सीमा तक अस्वस्थ हैं कि वे अपने मालिकों की सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं? यदि ऐसा कुछ नहीं है तो फिर अचानक से ही संसद में यह मामला इतना महत्वपूर्ण क्यों और किसलिए हो गया कि इस पर निर्णय लेने के लिए एक समूह ही बना दिया गया? कई मापदंड ऐसे बना दिए गए हैं, जिनमें स्वस्थ कुत्तों को भी बीमार बताया जा सकता है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि यह सब केवल इसलिए हो रहा है, कि जिससे यूके में मुस्लिम नागरिकों को खुश रखा जा सके।
एक दस बिन्दु वाली चेकलिस्ट बनाई गई है। और यदि इनका पालन हुआ तो छोटे कुत्ते भी प्रतिबंधित हो जाएंगे। ऐसा नहीं है कि अभी कुत्तों की कुछ नस्लें प्रतिबंधित नहीं हैं, परंतु उन पर प्रतिबंध इसीलिए है क्योंकि उन्हें लोगों के लिए खतरनाक माना जाता है। मगर यदि ये नियम माने गए तो वे भी कुत्ते प्रतिबंधित हो जाएंगे जो किसी को नुकसान पहुंचा ही नहीं सकते हैं। लोग कह रहे हैं कि ऐसा हो ही नहीं सकता है कि यह निर्णय कुत्तों के स्वास्थ्य को लेकर किया गया है। बल्कि उनका कहना है कि यह निर्णय इसीलिए लिया जा रहा है कि जिससे कीर स्टार्मर अपने मुस्लिम वोटबैंक को खुश रख सके।
ब्रिटेन के ग्रामीण क्षेत्रों से हटाए जाएंगे कुत्ते
देश के ग्रामीण क्षेत्रों से भी कुत्तों को हटाने की योजना है। जो रिपोर्ट पेश की गई है, उसमें इन नस्लों पर प्रतिबंध को लेकर यह कहा गया है कि चूंकि कुछ अध्ययन यह बताते हैं कि इन नस्लों के कुत्तों को कभी कभी दर्द हो सकता है, असुविधा और जन्म से ही समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए इन्हें दर्द और पीड़ा से बचाने के लिए इनके पैदा होने पर ही रोक लगा दी जाए। लोगों का कहना है कि कुत्तों के लिए जो यह योजना लाई जा रही है, वह किसी भी हाल में कनाडा की इच्छा मृत्यु से कम नहीं है। हालांकि सोशल मीडिया पर इस प्रतिबंध का विरोध करने वालों का यही कहना है कि यह निर्णय केवल और केवल मुस्लिम वोटबैंक को खुश करने के लिए लिया गया है।











