महाराष्ट्र सरकार ने कन्वर्जन पर रोक लगाने वाले विधेयक ‘धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2026’ के मसौदे को मंजूरी दे दी है। इसके तहत जबरन, धोखे से या लालच देकर कराए जाने वाले कन्वर्जन पर पूरी तरह से लगाम लगाई जा सकेगी। खासतौर पर लव जिहाद के मामलों में। इस प्रस्तावित कानून में गैरकानूनी या जबरन धर्म बदलने पर सात साल तक की सजा और पांच लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। स्वेच्छा से कन्वर्जन से पहले किसी सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। धर्म बदलने के इच्छुक व्यक्ति को 60 दिन पहले लिखित सूचना देनी होगी।
कोई भी हिंदू लड़कियों से जबरन शादी नहीं कर पाएगा
महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने बताया कि लव जिहाद या एंटी कन्वर्जन बिल के खिलाफ कैबिनेट मीटिंग में गुरुवार (5 मार्च) को ड्राफ्ट को मंजूरी दी गई। जल्द ही इसके बारे में एक सरकारी प्रस्ताव जारी किया जाएगा। इस विधेयक को विधानसभा के वर्तमान बजट सत्र में ही प्रस्तुत किया जाएगा। बिल के कानून बनने के बाद कोई भी हिंदू लड़कियों से जबरन शादी नहीं कर पाएगा और उनका धर्म भी नहीं बदल पाएगा।
उन्होंने कहा कि ड्राफ्ट को संवैधानिक नियमों, सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस और दूसरे राज्यों में ऐसे मौजूदा कानूनों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
60 दिन पहले संबंधित प्राधिकरण को देनी होगी लिखित सूचना
अधिकारियों के मुताबिक इस बिल में कई महत्वपूर्ण प्रावधान हैं। इसके अनुसार जो भी व्यक्ति किसी दूसरे धर्म में परिवर्तन करना चाहता है, उसे कम से कम 60 दिन पहले संबंधित प्राधिकरण को लिखित सूचना देनी होगी। उस प्राधिकरण से अनुमति भी लेनी होगी। कन्वर्जन को 25 दिनों के अंदर सक्षम प्राधिकारी के पास पंजीकृत कराना होगा, नहीं तो इसे रद्द माना जाएगा। बिल में गैरकानूनी तरीके से कन्वर्जन कराने के दोषी पाए जाने वाले संगठनों पर बैन लगाने और सजा देने का प्रावधान है। दोषी पाए जाने वाले लोगों को सात साल तक की जेल और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना देना होगा। प्रस्तावित कानून के तहत यह अपराध गैरजमानती है, जिससे पुलिस को जबरन कन्वर्जन कराने वाले आरोपी पर केस दर्ज करने का अधिकार मिलेगा।
धोखाधड़ी से कन्वर्जन कराने वाले मामलों पर सख्ती जरूरी
दरअसल, फरवरी 2025 में महाराष्ट्र सरकार ने एक सरकारी प्रस्ताव जारी करके कन्वर्जन विरोधी कानून लाने के बारे में कहा था। डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) की अगुवाई में सात सदस्यों वाली एक कमेटी बनाई गई थी। कमेटी को कन्वर्जन से जुड़े कानूनी नियमों की जांच करने, दूसरे राज्यों में मौजूदा कानूनों की स्टडी करने और महाराष्ट्र के लिए एक सही कानूनी ढांचा सुझाने का काम सौंपा गया था। कमेटी के नतीजों और दूसरे राज्यों में लागू कानूनों की तुलना वाली स्टडी ने प्रस्तावित कानून के लिए ड्राफ्ट तैयार किया। यह मसौदा 26 फरवरी को सरकार के सामने पेश किया गया था और अब इसे राज्य कैबिनेट ने स्वीकृति दी है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पहले भी कह चुके हैं कि सरकार दूसरे धर्मों में शादी के खिलाफ नहीं है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा है कि जबरदस्ती, पहचान छिपाने, लालच देकर या धोखाधड़ी से धर्म बदलने वाले मामलों में कानूनी तौर पर सख्ती से निपटने की जरूरत है।

















