नॉर्थ ईस्ट कॉन्फ़्रेंस 2026 नई दिल्ली में संपन्न; संस्कृति, विकास और राष्ट्रीय एकात्मता पर हुआ व्यापक विमर्श
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नॉर्थ ईस्ट कॉन्फ़्रेंस 2026 नई दिल्ली में संपन्न; संस्कृति, विकास और राष्ट्रीय एकात्मता पर हुआ व्यापक विमर्श

उद्घाटन सत्र में असम से संबंधित प्रतिष्ठित प्रशासक एवं भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के पूर्व सचिव मदन प्रसाद बेजबरुआ (सेवानिवृत्त आईएएस) ने पूर्वोत्तर की विशिष्ट संवेदनशीलता और देश के शेष भाग के साथ उसके क्रमिक समन्वय और संपर्क पर प्रकाश डाला।

Written byPanchjanyaPanchjanya — edited by Mahak Singh
Mar 5, 2026, 05:52 pm IST
in दिल्ली

नई दिल्ली, 5 मार्च 2026: नॉर्थ ईस्ट संस्था, दिल्ली द्वारा आयोजित नॉर्थ ईस्ट कॉन्फ़्रेंस–2026 का सफल समापन नई दिल्ली के ऐतिहासिक कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में हुआ। इस सम्मेलन में प्रख्यात चिंतक, नीति विशेषज्ञ, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और सांस्कृतिक हस्तियाँ एकत्रित हुए तथा पूर्वोत्तर भारत के विविध आयामों पर गहन विचार-विमर्श किया। दिनभर चले इस सम्मेलन में पूर्वोत्तर क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपरागत व्यवस्थाएँ, विकास यात्रा, नीति दृष्टिकोण, सामाजिक समरसता और भविष्य की संभावनाओं पर विभिन्न विषयगत सत्र आयोजित किए गए। प्रतिभागियों ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व के साथ-साथ हाल के वर्षों में हुए परिवर्तनकारी विकास पर सार्थक चर्चा की।

सांस्कृतिक गौरव, संवेदनशीलता और राष्ट्रीय योगदान

उद्घाटन सत्र में असम से संबंधित प्रतिष्ठित प्रशासक एवं भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के पूर्व सचिव मदन प्रसाद बेजबरुआ (सेवानिवृत्त आईएएस) ने पूर्वोत्तर की विशिष्ट संवेदनशीलता और देश के शेष भाग के साथ उसके क्रमिक समन्वय और संपर्क पर प्रकाश डाला। एडवोकेट बिक्रम बनर्जी, भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल, ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के पारंपरिक एवं प्रथागत कानूनों की विशिष्टता और स्वदेशी पहचान तथा सामाजिक संतुलन बनाए रखने में उनकी महत्ता को रेखांकित किया। नरेंद्र ठाकुर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह-प्रचार प्रमुख, ने पूर्वोत्तर के गौरवशाली सभ्यतागत इतिहास पर प्रकाश डालते हुए उसकी सांस्कृतिक निरंतरता को महाभारत काल से लेकर वर्तमान समय तक जोड़ा। वहीं समुद्रगुप्त कश्यप, नागालैंड विश्वविद्यालय के कुलाधिपति तथा असम के प्रख्यात पत्रकार-विद्वान, ने पूर्वोत्तर के स्वतंत्रता सेनानियों के महान योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके बलिदानों ने राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन को सशक्त बनाया।

संस्कृति, खेल, इतिहास और विकास

एक अन्य सत्र में डेलिना खोंगडुप, राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की सदस्य (मेघालय), ने मेघालय की उन विशिष्ट विभूतियों के बारे में बताया जिन्होंने क्षेत्र की सांस्कृतिक समृद्धि को नई ऊँचाइयाँ दीं। प्रेमानंद शर्मा, मणिपुर के प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता, ने भारत की खेल उपलब्धियों में पूर्वोत्तर के योगदान और यहाँ के खिलाड़ियों को मिली वैश्विक पहचान का उल्लेख किया। डॉ. ओइनाम भगत, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, ने पूर्वोत्तर के इतिहास को विकृत करने वाली औपनिवेशिक विरासत की समीक्षा करते हुए उसे सुधारने की आवश्यकता पर बल दिया। अरुण शर्मा, नॉर्थ ईस्ट सेंटर फॉर टेक्नोलॉजी एप्लिकेशन एंड रीच (NECTAR) के महानिदेशक, ने क्षेत्र के हालिया विकास और प्रगति की विस्तृत जानकारी देते हुए अवसंरचना विस्तार, बेहतर संपर्क व्यवस्था और नीतिगत पहलों से उत्पन्न नई संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

इतिहास, विकास और राष्ट्रीय महत्व

समापन सत्र में वरिष्ठ पत्रकार एवं पद्म भूषण से सम्मानित राम बहादुर राय, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के अध्यक्ष, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने पूर्वोत्तर भारत के वर्तमान स्वरूप को आकार देने वाली ऐतिहासिक प्रक्रियाओं पर महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत किया और क्षेत्र के विकास पर बढ़ते राष्ट्रीय ध्यान को रेखांकित किया। डॉ. पूनम गुनिंद्रा, मणिपुर यूनिवर्सिटी ऑफ़ कल्चर की कुलपति, ने सड़क, रेल और वायु संपर्क के विस्तार के माध्यम से पूर्वोत्तर को देश और विश्व के साथ और अधिक सुदृढ़ रूप से जोड़ने की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला। डॉ. सुनील मोहंती, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नॉर्थ ईस्ट प्रचार प्रमुख, ने आर्थिक प्रगति के लिए सामाजिक समरसता को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए भारत के समग्र विकास में “ईशान्य भारत” के रणनीतिक और सभ्यतागत महत्व को रेखांकित किया।

पूर्वोत्तर के उत्कृष्ट योगदान

सम्मेलन के दौरान एक विशेष सम्मान समारोह में पूर्वोत्तर के विभिन्न राज्यों के उन व्यक्तियों को सम्मानित किया गया जिन्होंने कला, कृषि, शिक्षा, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। नॉर्थ ईस्ट इंडिया अचीवर्स 2026 सम्मान से अरुणाचल प्रदेश की ताना यामी को सतत कृषि और आजीविका के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए, असम की अनन्या तालुकदार को गुवाहाटी में वंचित समुदायों के बीच सत्रिया नृत्य के प्रसार और प्रशिक्षण के लिए, मणिपुर के लैमपोकपाम लक्षपति सिंह को प्रदर्शन कलाओं में उल्लेखनीय योगदान के लिए, मिजोरम के लालत्लांजाउवा को स्वदेशी मिजो (Zo Hnam Sakhua) सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए, नागालैंड के योसे चाया अंगामी को स्वदेशी अंगामी नागा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रचार के लिए तथा त्रिपुरा के धम्मपिया को शिक्षा और सामुदायिक विकास में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। सम्मेलन का समापन राष्ट्रीय एकात्मता को सुदृढ़ करने, सांस्कृतिक गौरव को बढ़ाने, नीति संवाद को आगे बढ़ाने और सतत विकास पहलों को मजबूत करने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ, ताकि पूर्वोत्तर क्षेत्र का समग्र और संतुलित विकास सुनिश्चित किया जा सके। विचार-विमर्श से यह स्पष्ट हुआ कि पूर्वोत्तर आज भारत की सांस्कृतिक समृद्धि, रणनीतिक महत्व और विकास यात्रा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभर रहा है।

Topics: North East India development and cultureNorth East India cultural heritageNorth East India cultural contributionNorth East India social harmonyNorth East India education and artsNortheast India Conference 2026Cultural of Northeast India
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