लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष हैं राहुल गांधी, जिन्हें इस बात से समस्या है कि ईरान पर अमेरिका ने हमला किया और भारत ने इसका खंडन नहीं किया या इस पर कुछ नहीं बोला। विपक्ष इस मामले में अपनी सियासत चमकाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर भी सियासत करने नहीं चूक रहा है। इसी क्रम में राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है, क्योंकि भारतीय महासागर में एक ईरानी युद्धपोत डूब गया। उनका कहना है कि अब संघर्ष हमारे ही आंगन तक पहुंच गया है। हालांकि, उनके इस बयान को लेकर उनकी खासी आलोचना भी हो रही है।
क्या था राहुल गांधी का बयान
राहुल गांधी ने X पर पोस्ट करके इस घटना पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि दुनिया अब एक अस्थिर दौर में दाखिल हो चुकी है, और आगे तूफानी हालात आने वाले हैं। उन्होंने लिखा, “भारत के तेल आयात का 40% से ज्यादा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता है। एलपीजी और एलएनजी की स्थिति तो और भी खराब है। संघर्ष हमारे आंगन तक पहुंच गया है, भारतीय महासागर में एक ईरानी युद्धपोत डूबा दिया गया। फिर भी प्रधानमंत्री ने कुछ नहीं कहा। ऐसे वक्त में देश को मजबूत और स्थिर नेतृत्व की जरूरत है। लेकिन हमारे पास एक समझौतावादी प्रधानमंत्री है, जिसने हमारी सामरिक स्वतंत्रता को समर्पण कर दिया है।”
The world has entered a volatile phase. Stormy seas lie ahead.
India’s oil supplies are under threat, with more than 40% of our imports transiting the Strait of Hormuz. The situation is even worse for LPG and LNG.
The conflict has reached our backyard, with an Iranian warship…
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) March 5, 2026
राहुल गांधी के इस झूठ पर सोशल मीडिया पर लोग उन्हें जमकर खरी खोटी सुना रहे हैं। इसी क्रम में अभय प्रताप सिंह नाम के यूजर ने राहुल गांधी को झूठ फैलाने को लेकर सच का आईना दिखाया कि ईरानी जंगी जहाज़ भारत के पानी में नहीं डूबा, वह इंटरनेशनल पानी में डूबा। विपक्ष के नेता होने के नाते कम से कम बेवजह पैनिक पैदा करने से पहले भारत के पानी और इंटरनेशनल पानी के बीच का फ़र्क समझना चाहिए।

वहीं भारतीयों की इन हमलों में मौतों पर कांग्रेस की चुप्पी पर निशाना साधते हुए तुषार गुप्ता नाम के यूजर ने कमेंट किया कि राहुल गांधी को ईरानी हमलों में मारे गए तीन भारतीयों के लिए भी कुछ कहना चाहिए। क्या उन्हें भारतीयों से ज़्यादा ईरानियों की परवाह है?

क्या है पूरा मामला
मामला कुछ यूं है कि इस हफ्ते की शुरुआत में अमेरिकी नौसेना की एक पनडुब्बी ने ईरानी फ्रिगेट IRIS Dena को मार्क-48 टॉरपीडो से निशाना बनाया। यह हमला हिंद महासागर में श्रीलंका के तट से करीब 40 नॉटिकल मील दूर हुआ। जहाज पूरी तरह डूब गया, और इसमें दर्जनों नाविकों की मौत हो गई—कुछ रिपोर्ट्स में 83 से ज्यादा शव मिलने और 32 घायलों को बचाए जाने की बात है। श्रीलंका की नौसेना ने डिस्ट्रेस कॉल मिलने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया।
ईरान ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे “समुद्र में अत्याचार” बताया और कहा कि अमेरिका को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। ईरानी अधिकारियों ने याद दिलाया कि यह जहाज हाल ही में भारत में हुए मिलन नौसेना अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद वापस लौट रहा था। मिलन एक्सरसाइज भारत की मेजबानी में हुआ था, जिसमें कई देशों की नौसेनाएं शामिल हुई थीं।

















