आजकल आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस तेजी से अपने पांव पसार रहा है। न्यायिक मामलों में भी अब एआई का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त हो गया है। ऐसे ही एक मामले में शीर्ष अदालत ने निचली अदालत के द्वारा फैसले में एआई का इस्तेमाल करने के मामले को न्यायिक शुचिता पर हमला करार दिया है। दरअसल, निचली अदालत ने एआई के जरिए बने फर्जी और अस्तित्वहीन फैसलों पर भरोसा करके अपना फैसला दिया था। ये मामला आंध्र प्रदेश की एक ट्रायल कोर्ट से जुड़ा है।
क्या है पूरा मामला
मामला आंध्र प्रदेश का है, जहां एक जमीन के विवाद को लेकर निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने पिछले साल अगस्त में एक आदेश दिया, जिसमें संपत्ति की स्थिति जांचने के लिए अधिवक्ता-आयुक्त नियुक्त किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताई, लेकिन कोर्ट ने अगस्त 2023 (या 2024, संदर्भ के अनुसार) में आपत्तियां खारिज कर दीं। इसमें कोर्ट ने कुछ पुराने फैसलों का हवाला दिया, जो बाद में पता चला कि असल में मौजूद ही नहीं थे।
याचिकाकर्ता जब इन फैसलों को ढूंढने लगे, तो कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। उन्होंने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में चुनौती दी। हाई कोर्ट ने जांच की और पाया कि ये फैसले AI टूल से जेनरेट किए गए थे – यानी काल्पनिक, फर्जी या सिंथेटिक। एक जज ने स्वीकार भी किया कि उन्होंने पहली बार AI का इस्तेमाल केस लॉ रिसर्च के लिए किया था, लेकिन कोई गलत इरादा नहीं था। हाई कोर्ट ने जनवरी में इस गलती को “गुड फेथ” में हुई भूल माना और निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए याचिका खारिज कर दी।
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सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला
इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। 27 फरवरी 2026 को जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई की और काफी सख्त टिप्पणियां कीं।कोर्ट ने कहा – “हम निचली अदालत द्वारा AI से बने गैर-मौजूद, फर्जी या कृत्रिम फैसलों पर भरोसा करने का संज्ञान लेते हैं। हम इसके परिणामों और जवाबदेही की जांच करना चाहते हैं, क्योंकि यह न्यायिक प्रक्रिया की शुचिता पर सीधा असर डालता है।”
बेंच ने स्पष्ट किया कि ऐसे फर्जी फैसलों के आधार पर फैसला देना कोई साधारण गलती नहीं है। यह कदाचार है और इसके कानूनी परिणाम भुगतने पड़ेंगे। कोर्ट ने कहा, “यह कोई निर्णय में त्रुटि नहीं, बल्कि कदाचार होगा।”
क्या आदेश दिए गए
सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को संस्थागत चिंता का विषय बताया। इसी को ध्यान में रखते हुए शीर्ष अदालत ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और भारतीय विधिज्ञ परिषद (BCI) को नोटिस जारी कर दिया है। कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान को भी मामले में सहायता के लिए एमिकस क्यूरी के तौर पर नियुक्त किया। मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च को रखी गई है। तब तक निचली अदालत को अधिवक्ता-आयुक्त की रिपोर्ट के आधार पर कोई आगे की कार्यवाही नहीं करने का निर्देश दिया गया है।











