राजस्थान सरकार अब आबादी वाली जमीन पर बने सभी मंदिरों को पट्टा देने की तैयारी कर रही है। साथ ही गांवों में मीट की दुकानों के लिए नए नियम सख्त करने का ऐलान किया गया है। ये बातें पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने विधानसभा में पंचायती राज विभाग की अनुदान मांगों पर बहस के जवाब में कहीं। उन्होंने कहा कि जो भगवान हमें सब कुछ देता है, वो खुद ही बिना पट्टे के बैठा है।
मंदिरों को पट्टा देने का फैसला
मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि जो भगवान हमें सब कुछ देता है, वो खुद बिना पट्टे के बैठा है। इसलिए हमारा फर्ज बनता है कि हम मंदिरों को पट्टा दें। उन्होंने बताया कि राज्य में आबादी क्षेत्र में बने कई मंदिरों की जमीन पर अभी तक पट्टा नहीं है। ऐसे में जब कभी जमीन अवाप्ति होती है तो मुआवजा नहीं मिल पाता और मंदिर को कई परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। अब सरकार एक अभियान चलाकर इन मंदिरों को पट्टा जारी करेगी, ताकि मंदिर की मूर्ति और जगह की मालिकाना हक मजबूत हो जाए।
मीट दुकानों के लिए नए नियम
शहरों की तरह अब गांवों में भी मीट की दुकानें चलाने के लिए सख्त नियम लागू होंगे। मंत्री ने कहा कि बिना लाइसेंस के कोई मीट की दुकान नहीं चला सकेगा। दुकान को कमर्शियल दर्जा लेना होगा और फूड लाइसेंस भी जरूरी होगा। जानवर काटने से पहले वेटरनरी डॉक्टर से स्वास्थ्य प्रमाण पत्र लेना पड़ेगा, जिसमें जानवर की फोटो भी होगी। इससे एक ही सर्टिफिकेट से कई जानवर काटने की मनाही होगी।
सबसे अहम बात, मीट की दुकान खोलने के लिए अब ग्राम पंचायत से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना अनिवार्य होगा। दिलावर ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रामीण इलाकों में नियमों के खिलाफ कोई मीट दुकान न लगने पाए। उन्होंने कहा कि आगे और नियम बनाए जाएंगे ताकि व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रित रहे।
क्लर्क भर्ती परीक्षा की एसओजी जांच
मंत्री ने पंचायती राज विभाग से जुड़े कुछ और मुद्दों पर भी बात की। उन्होंने 2013 की क्लर्क भर्ती परीक्षा में हुए फर्जीवाड़े की जांच एसओजी से करवाने की बात कही। कई अफसर जांच में सहयोग नहीं कर रहे, उनके खिलाफ चार्जशीट और कार्रवाई होगी। साथ ही अफसरों को महीने में कम से कम चार दिन गांव में रात्रि विश्राम करना होगा, नहीं तो सरकारी गाड़ी छीन ली जाएगी। गायों के लिए भी बड़ी योजना है।
गौशालाएं भी बनेंगी
457 पंचायत समिति क्षेत्रों में 400 करोड़ रुपये खर्च करके गो आश्रय स्थल बनाए जाएंगे। हर जगह 20 हेक्टेयर में आश्रय बनेगा, जिसमें पानी के कुंड-तलाब, वृक्षारोपण और चारागाह का विकास होगा। गोबर से खाद बनाने का प्लांट भी लगेगा।











