भुवनेश्वर। लाल आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई तेज करते हुए ओडिशा पुलिस ने बलांगीर जिले के माओवादी प्रभावित गंधमर्दन क्षेत्र में व्यापक जनजागरूकता और खुफिया सूचना एकत्रीकरण अभियान शुरू किया है। ‘ माओवादी पकडें , इनाम पाएं’ नामक इस पहल के तहत पुलिस ने माओवादियों से आत्मसमर्पण की अपील की है, वहीं आम नागरिकों को ठोस जानकारी देने पर नकद प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की है।
इस अभियान के अंतर्गत खपराखोल, हरिशंकर और नंदुपाला सहित आंतरिक गांवों और वन सीमावर्ती इलाकों में बड़े पैमाने पर पोस्टर लगाए गए हैं। पुलिस स्थानीय लोगों से माओवादी गतिविधियों, ठिकानों और आवाजाही की सूचना साझा करने में सहयोग की अपील कर रही है, ताकि माओवादियों को मुख्यधारा में लाया जा सके।
पोस्टरों में 15 वांछित माओवादी कैडरों के नाम और उनके खिलाफ इनाम घोषित
अधिकारियों के अनुसार माओवादी गतिविधियों, आश्रय स्थलों या उनके मूवमेंट से जुड़ी विश्वसनीय और उपयोगी सूचना देने वाले व्यक्तियों को आकर्षक नकद पुरस्कार दिया जाएगा। पोस्टरों में पुलिस के संपर्क नंबर भी प्रमुखता से अंकित हैं तथा यह आश्वासन दिया गया है कि सूचना देने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। पोस्टरों में 15 वांछित माओवादी कैडरों के नाम और उनके खिलाफ घोषित इनाम राशि भी दर्शाई गई है।
इनमें सबसे अधिक 65 लाख रुपये का इनाम ‘सुदर्शन उर्फ विकास’ पर घोषित है, जो नुआपाड़ा-बलांगीर-बरगढ़ गंधमर्दन बेल्ट में सक्रिय स्पेशल जोनल कमेटी का सदस्य बताया गया है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि अभियान केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि पुनर्वास पर भी जोर दिया जा रहा है। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को सरकार की सरेंडर और पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, आवास सुविधा और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। उग्रवादियों से हिंसा छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने की अपील की गई है।
काफी घट चुकी है माओवादियों की संख्या
अधिकारियों का कहना है कि यह पहल क्षेत्र में माओवादी विरोधी रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। पहले जहां माओवादी संगठन पोस्टरों के जरिए ग्रामीणों और सुरक्षा बलों को डराने का प्रयास करते थे, अब कानून-व्यवस्था एजेंसियां उसी माध्यम से लोगों का विश्वास मजबूत कर उनके नेटवर्क को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। सुरक्षा एजेंसियों के आकलन के अनुसार क्षेत्र में माओवादियों की संख्या काफी घट चुकी है और अब केवल चार-पांच सदस्यों के छोटे समूह सक्रिय हैं, जिनकी कुल संख्या लगभग 14-15 बताई जा रही है। पुलिस का लक्ष्य आने वाले महीनों में निगरानी और जनभागीदारी बढ़ाकर इनके प्रभाव को पूरी तरह समाप्त करना है। पुलिस ने स्थानीय निवासियों से सहयोग की अपील करते हुए भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वालों की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित की जाएगी, ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित की जा सके।

















