'RSS-BJP ने बदलते समय के हिसाब से खुद को ढाला, हमने नहीं’: सरेंडर के बाद पूर्व माओवादी नेता का बड़ा खुलासा
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‘RSS-BJP ने बदलते समय के हिसाब से खुद को ढाला, हमने नहीं’: सरेंडर के बाद पूर्व माओवादी नेता का बड़ा खुलासा

मल्लोजुला वेणुगोपाल राव ने कहा कि माओवादी आंदोलन बदलते समय और राजनीति के हिसाब से खुद को नहीं ढाल पाया, जबकि आरएसएस-बीजेपी ने बदलते राजनीतिक परिदृश्य, जनता के मिजाज और चुनौतियों को समझते हुए एक नई कार्य योजना पर काम शुरू किया।

Written byसुनीता मिश्रासुनीता मिश्रा — edited by कुलदीप सिंह
Feb 22, 2026, 09:26 am IST
inछत्तीसगढ़
Naxal mallojula Venugopal rao

पूर्व माओवादी नेता और एक समय के मोस्ट वांटेट नक्सली मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ सोनू ने करीब चार दशक बाद हथियार छोड़ मुख्यधारा में लौटने के बाद यह स्वीकार किया कि उनकी पार्टी हर मोर्चे पर खुद को बदलने में नाकाम रही। वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा (BJP) ने बदलते समय में बेहतर निर्णय लिए। उन्होंने तकनीकी प्रगति और राजनीतिक परिदृश्य के अनुरूप अपनी रणनीतियों, विचारधारा और संगठनात्मक संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव किए।

माओवादी हर मोर्चे पर खुद को बदलने में नाकाम रहे

पूर्व माओवादी (CPI) नेता ने द इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में कहा कि माओवादी आंदोलन बदलते समय और राजनीति के हिसाब से खुद को नहीं ढाल पाया, जबकि आरएसएस-बीजेपी ने बदलते राजनीतिक परिदृश्य, जनता के मिजाज और चुनौतियों को समझते हुए एक नई कार्य योजना पर काम शुरू किया। उन्होंने जमीनी स्तर पर संवाद और संगठन में जरूरी बदलाव पर जोर दिया।

आरएसएस-बीजेपी ने परिस्थितियों के अनुसार ​खुद ढाला

70 वर्षीय सोनू, जिन्होंने पिछले साल आत्मसमर्पण किया था, उनका कहना है कि आरएसएस और बीजेपी कभी ब्राह्मणों और बनियों की पार्टी थी, लेकिन अब यह सिर्फ उन्हीं तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने पीएम मोदी के नेतृत्व में देश में कानून व्यवस्था और औद्योगिक विकास में आए बदलाव को ऐतिहासिक बताया और कहा वे सब तक पहुंच रहे हैं। इससे हमें पता चलता है कि आगे बढ़ने के लिए आपको मौजूदा स्थिति के अनुसार खुद को बदलना होगा।

इसे भी पढ़ें: ट्रंप की मनमानी: सुप्रीम कोर्ट को धता बता सभी देशों पर लगाए गए 10% टैरिफ को बढ़ाकर कर दिया 15%

हथियार डाल देने चाहिए, जनता के बीच काम करना होगा

दशकों बाद जंगल से बाहर आने के बाद सोनू उर्फ भूपति ने विद्रोह में सक्रिय लोगों से अपनी अपील दोहराते हुए कहा, “हालात बदल गए हैं। आज की स्थिति में सशस्त्र संघर्ष जारी नहीं रह सकता। उन्हें अस्थायी रूप से हथियार डाल देने चाहिए और जनता के बीच जाकर काम करना चाहिए। आंदोलनों को बदलती वास्तविकताओं के अनुरूप ढलना होगा। हम रूढ़ियों में फंसे नहीं रह सकते।”

हालात बदलते रहे, लेकिन हम नहीं बदल पाए

2010 के बाद दुनिया भर में माओवादी आंदोलनों में कमी आई है। इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह कमी बहुत पहले ही शुरू हो गई थी। उनके शब्दों में, “चीनी क्रांति के बाद, कोई भी क्रांति कहीं भी पूरी तरह सफल नहीं हुई है। हम इसलिए नाकाम होते रहे, क्योंकि हालात बदलते रहे और हम खुद को नहीं बदल पाए, जबकि हमें परिस्थिति के अनुसार स्वयं को ढालने की आवश्यकता थी।”

अक्टूबर, 2025 में 60 माओवादी कैडरों के साथ किया था सरेंडर

मल्लोजुला वेणुगोपाल राव को सोनू, अभय और भूपति जैसे कई नामों से जाना जाता है। उन्होंने 15 अक्टूबर, 2025 को गढ़चिरौली में 60 माओवादी कैडरों और नए हथियारों के साथ महाराष्‍ट्र के मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने आत्मसमपर्ण किया था। यह राज्य में माओवादियों के सबसे बड़े सरेंडर में से एक था। इसके बाद कई और लोगों ने भी सरेंडर किया। वेणुगोपाल राव का कहना है कि उन्होंने सरेंडर करने से पहले किसी वरिष्ठ नेता से कोई बातचीत नहीं की।

कोई भी जल, जंगल, जमीन के लिए पार्टी में शामिल नहीं होता

उन्होंने बातचीत के दौरान आगे कहा, “मैंने गढ़चिरौली में सरेंडर किया, क्योंकि मैं यहां बहुत लंबे समय से हूं।” जल, जंगल, जमीन के अक्सर इस्तेमाल होने वाले नारे पर मुस्कुराते हुए वह कहते हैं, “कोई भी जल, जंगल, जमीन के लिए पार्टी में शामिल नहीं होता। भारत की आबादी के सिर्फ 8.4 प्रतिशत आदिवासी हैं, जो लगभग 10 करोड़ हैं। बाकी आबादी का क्या? मुद्दा शोषण का है। हम सभी दबे-कुचले लोगों के लिए बदलाव चाहते हैं।”

नक्सल संगठन के भविष्य पर भूपति ने कहा?

नक्सल संगठन के भविष्य पर भूपति ने कहा कि बहुत कम कैडर बचे हैं। जब पूछा गया कि क्या यह मार्च 2026 तक खत्म हो जाएगा? इस पर भूपति ने कहा, “कई राज्य अब खाली हैं। परिवार अब अपने बच्चों को वापस लाने के लिए उनसे संपर्क कर रहे हैं, लेकिन विचारधारा से जुड़े कैडर को मनाना मुश्किल है। कुछ लोग रुकने के लिए पक्के इरादे वाले हैं। हम सभी (सरेंडर करने वाले कैडर) से कह रहे हैं कि वे अनुशासित और ईमानदार जीवन जिएंं। पार्टी में हमने जो भी अच्छा सीखा है, उसे भूलना नहीं चाहिए।”

राजनीति में आने को लेकर क्या बोले?

अपने भविष्य के बारे में भूपति ने कहा, “पहले की तरह मैं लोगों के बीच जाऊंगा। संविधान हमें अधिकार देता है और हम उसी के हिसाब से काम करेंगे।” क्या आप राजनीति में आएंगे? इस पर(हंसते हुए) वह कहते हैं, “मैंने कभी राजनीति नहीं छोड़ी।”

पत्नी के साथ पहले जैसा ही रिश्ता

अपनी पत्नी तारक्का के साथ सरेंडर करने के बाद की जिंदगी के बारे में बात करते हुए भूपति ने बताया, “उनका रिश्ता वैसा ही है और उन्हें कोई मानसिक दबाव महसूस नहीं होता। मैं पहले से इस बदलाव के लिए तैयार था और यह पक्का किया कि दूसरे भी मेंटली तैयार रहें।” उन्होंने बाहर की जिंदगी को उम्मीद से ज्यादा आसान बताया।

माइनिंग कंपनी के ऑफर पर क्या कहा?

एक माइनिंग कंपनी ने आपको काम ऑफर किया था, इस आरोप के बारे में बात करते हुए सोनू ने कहा, “जब मैं बाहर आया और सरेंडर किया, तो उन्होंने मुझे एक माइनिंग कंपनी का ब्रांड एंबेसडर बना दिया। मैंने आज तक उन्हें देखा भी नहीं है।” वहां काम कर रहे सरेंडर करने वाले कैडर के बारे में वह कहते हैं, “वहां करीब 4 हजार लोग काम करते हैं। क्या वे सब नक्सली हैं? हमने कॉर्पोरेटाइजेशन का विरोध किया था, लेकिन हम सिस्टम के अंदर काम कर सकते हैं?”

Topics: बीजेपीआरएसएसनक्सलवादnaxalismNaxal Surrenderनक्सल सरेंडरनक्सली मल्लोजुला वेणुगोपाल रावBJPNaxalite Mallojula Venugopal RaoRSS
सुनीता मिश्रा
सुनीता मिश्रा
हरियाणा की कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री। इग्नू दिल्ली से राजनीतिक विज्ञान में मास्टर डिग्री। पत्रकारिता में 10 वर्षों का अनुभव। [Read more]
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