इस समय वैश्विक सप्लाई चेन तेजी से प्रभावित हो रही है। बात अगर रेयर अर्थ के मामले में बात करें तो दुनिया का 90 फीसदी हिस्सा चीन से ही आता है। इसी से बचने के लिए भारत और ब्राजील ने रेयर अर्थ्स पर समझौता किया है, ताकि चीन पर निर्भरता कम हो सके। ये डील हाल ही में नई दिल्ली में हुई, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लुला दा सिल्वा से मुलाकात की। ये दोनों देशों के बीच काफी अहम कदम है, क्योंकि रेयर अर्थ्स और क्रिटिकल मिनरल्स आज की टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, रिन्यूएबल एनर्जी और रक्षा में बहुत जरूरी हैं।
डील की मुख्य बातें
दोनों नेताओं की मीटिंग में कुल 9 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं। इनमें से एक मुख्य समझौता रेयर अर्थ्स और क्रिटिकल मिनरल्स पर सहयोग का है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “रेजिलिएंट सप्लाई चेंस बनाने की दिशा में बड़ा कदम” बताया। इसका मकसद है कि चीन से आने वाली निर्भरता घटे, क्योंकि चीन अभी दुनिया का सबसे बड़ा रेयर अर्थ्स सप्लायर है।
ब्राजील के पास रेयर अर्थ्स और क्रिटिकल मिनरल्स के बहुत बड़े रिजर्व हैं। लुला ने बैठक में बताया कि उनके यहां के रिजर्व में से सिर्फ 30% ही खोजे जा सके हैं। इसके अलावा भी ढेर सारी संभावनाएं हैं – एक्सप्लोरेशन, प्रोसेसिंग और इस्तेमाल की। ब्राजील भारत की पार्टनरशिप को काफी वैल्यू देता है और इसे आगे बढ़ाने की बात कही गई। अभी कोई स्पेसिफिक क्वांटिटी या अमाउंट का जिक्र नहीं हुआ, लेकिन ये फ्रेमवर्क एग्रीमेंट है, जिससे आगे जॉइंट वर्क, इन्वेस्टमेंट और टेक्नोलॉजी शेयरिंग हो सकेगी।
व्यापार और आर्थिक लक्ष्य
दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 30 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। अभी 2024-25 में ट्रेड करीब 12 बिलियन डॉलर का था, जो कि भारत से एक्सपोर्ट 6.77 बिलियन और इंपोर्ट 5.43 बिलियन । मोदी जी ने कहा कि ये सिर्फ नंबर नहीं, बल्कि ट्रस्ट की निशानी है। ब्राजील भारत का लैटिन अमेरिका में सबसे बड़ा व्यापारिक सहयोगी है।
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व्यापार बढ़ाने के लिए मर्कोसुर के साथ भारत के व्यापार समझौते को और मजबूत करने की बात भी हुई। साथ ही, ब्राजील ने भारतीय ऑर्डिनरी पासपोर्ट वालों के लिए बिजनेस वीजा 10 साल का करने का ऐलान किया। इसके अलावा दोनों देशों के बीच ऊर्जा लेनदेन, रक्षा और सुरक्षा पर भी फोकस रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग विश्वास और स्ट्रैटेजिक हार्मनी का अच्छा उदाहरण है। आत्मनिर्भर भारत को ब्राजील के डिफेंस इंडस्ट्री से जोड़कर को-डिजाइन और को-प्रोडक्शन की संभावनाएं देखी जा रही हैं।
साथ ही टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में भी सहयोग बढ़ेगा–आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सुपरकंप्यूटर्स, सेमीकंडक्टर्स और ब्लॉकचेन जैसे क्षेत्रों में। रिन्यूएबल एनर्जी, इथेनॉल ब्लेंडिंग और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल पर भी काम चल रहा है।
ग्लोबल साउथ और अन्य मुद्दे
दोनों लीडर्स ने ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने पर जोर दिया। मोदी जी ने कहा कि जब भारत और ब्राजील साथ मिलकर काम करते हैं, तो ग्लोबल साउथ की आवाज ज्यादा कॉन्फिडेंट हो जाती है। दोनों ने क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म की निंदा की, जिसमें पहलगाम अटैक और रेड फोर्ट वाली घटना का जिक्र था। UN रिफॉर्म्स, खासकर सिक्योरिटी काउंसिल के एक्सपैंशन पर भी बात हुई। G4 (भारत, ब्राजील, जापान, जर्मनी) फ्रेमवर्क में दोनों एक-दूसरे के परमानेंट मेंबरशिप को सपोर्ट करते हैं। भारत ने 2028-29 के लिए नॉन-परमानेंट सीट पर ब्राजील के सपोर्ट का स्वागत किया।











