उत्तर प्रदेश : प्रयागराज जनपद न्यायालय ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानद गिरी के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों के मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। एडीजे पोक्सो एक्ट ने पुलिस को निर्देश दिया है कि आरोपों के आधार पर मुकदमा दर्ज कर विधिवत विवेचना की जाए। कोर्ट के आदेश के बाद अब झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज की जाएगी।
शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी ने अदालत में अर्जी दाखिल कर आरोप लगाया था कि संबंधित आश्रम में नाबालिग बच्चों के साथ यौन शोषण हुआ। उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में साक्ष्य (सीडी) भी अदालत को सौंपे गए हैं। गत13 फरवरी को आरोप लगाने वाले दोनों नाबालिगों के बयान अदालत में वीडियोग्राफी के साथ दर्ज किए गए। कोर्ट ने पुलिस रिपोर्ट को भी संज्ञान में लिया और सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था। अब अदालत ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी कर दिया है। कोर्ट के आदेश के बाद अब झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज की जाएगी।
बता दें कि आशुतोष महाराज की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर नहीं दर्ज की थी। उसके बाद उनकी तरफ से 8 फरवरी को जनपद न्यायालय में वाद दायर किया गया। अपनी शिकायत में आशुतोष महाराज ने लिखा कि उनकी ट्रस्ट की ओर से माघ मेला में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मुक्ति के लिए माता शाकुंभरी देवी का महायज्ञ किया जा रहा था। इस दौरान उनके शिविर में दो नाबालिग शिष्य आए। उन दोनों ने उनका शिष्य बनने की इच्छा जाहिर की। यह भी बताया कि वो लोग वर्तमान समय जहां पर हैं, वहां
असुरक्षित हैं। दोनों बच्चों ने उनको बताया कि अविमुक्तेश्वरानंद और उनके सहयोगियों ने उनके साथ कई बार दुष्कर्म किया। यह सब पिछले एक साल से चल रहा है।
नाबालिग बच्चों के साथ महाकुंभ 2025 के दौरान भी मेला क्षेत्र में दुष्कर्म किया गया। आरोप है कि अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य यह कहकर बच्चों पर दबाव बनाते थे कि यह गुरु सेवा है। दोनों बच्चे मौका पाकर वहां से भाग निकले और आशुतोष महाराज के शिविर पहुंच गए। आशुतोष महाराज की ओर से गत 24 जनवरी को प्रयागराज झूंसी थाने में तहरीर दी गई थी । गत 25 जनवरी को पुलिस कमिश्नर और पुलिस अधीक्षक माघ मेला को ई-मेल के माध्यम से तहरीर भेजी गई। उसके बाद गत 27 जनवरी को डाक के माध्यम से पुलिस अधीक्षक माघ मेला को तहरीर भेजी गई थी। उसके बाद न्यायालय में अर्जी दाखिल की गई थी।

















