इस साल चार राज्यों पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और एक केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव आहूत हैं। इन सभी प्रदेशों में कुल 824 विधानसभा की सीट हैं, जिनमें सर्वाधिक 294 विधानसभा की सीट पश्चिम बंगाल में है। पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस चौथी बार जीत दर्ज़ करने की कोशिश कर रही है। वहीं मजबूत विपक्षी दल के रूप में उभरी भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल में दशकों से कमल खिलाने के लिए सबसे उपयुक्त मौका देख रही है।
भाजपा पश्चिम बंगाल चुनाव को बंगाली संस्कृति से जोड़ रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि पश्चिम बंगाल आज ऐसे कगार पर पहुंच गया है कि अगर घुसपैठ नहीं रुकी तो बंगाल और उसकी संस्कृति का अस्तित्व ही संकट में पड़ जाएगा। इतना ही नहीं बल्कि, केंद्रीय गृह मंत्री ने यह भी दावा किया की भय, भ्रष्टाचार, कुशासन और घुसपैठ से त्रस्त पश्चिम बंगाल की जनता ममता सरकार को उखाड़ कर फेंक देगी, क्योंकि ममता सरकार ने मां, माटी, मानुष का नारा तो दिया लेकिन आज उनके कार्यकाल में कोई भी सुरक्षित नहीं है।
भाजपा ने अपने सांसदों, विधायकों को जमीन पर उतारा
भाजपा अपने सांसदों, विधायकों और कार्यकर्ताओं को जमीनी स्तर पर चुनावी तैयारी तेज करने के साथ ही जनसंवाद पर जोर देने के लिए प्रेरित कर रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह ने अपने बंगाल योजना को अमलीजामा पहनाते हुए अपने पार्टी के सांसदों और विधायकों को हफ्ते में कम से कम 4 दिन अपने क्षेत्र में बिताने के साथ ही प्रत्येक दिन कम से कम पांच नुक्कड़ सभा करने की सलाह दिया है। भाजपा ने कोलकाता के आसपास की 28 सीटों में से 22 सीटों पर जीत हासिल करने का लक्ष्य रखा है। ये ऐसे इलाके हैं जहां ममता बनर्जी की पार्टी की मजबूत पकड़ है और अब तक इन इलाकों में भाजपा जीत नहीं दर्ज़ कर सकी है। साल 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा इन इलाकों में एक भी विधानसभा सीट जीतने में कामयाब नहीं हुई थी। भाजपा का ध्यान मतुआ मतदाताओं पर भी है क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस ने एसआईआर को लेकर मतुआ समुदाय में गलतफहमियां फैलाई है। अपने हाल के बंगाल दौरे में गृह मंत्री अमित शाह ने आरएसएस की बंगाल इकाई से संपर्क कर तालमेल बढ़ाने का भी संकेत दिया है।
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पश्चिम बंगाल चुनाव के प्रति संजीदा है भाजपा
भाजपा पश्चिम बंगाल चुनाव के प्रति अधिक संजीदा और सावधान हैं क्योंकि पार्टी का मानना है कि भारत को बड़ी जनसांख्यिकीय चुनौती से बचाने के लिए पश्चिम बंगाल की चुनावी लड़ाई को जीतना जरूरी है। हाल ही में भाजपा के संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर के साथ बातचीत में कहा कि पश्चिम बंगाल में कोई राजनीतिक लड़ाई नहीं है, बल्कि एक सभ्यतागत लड़ाई है।
जनसंघ के जमाने से भाजपा श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जन्मभूमि बंगाल को जीतना लक्ष्य रहा है। लंबे और जीवंत संघर्ष के बाद भाजपा पहली बार 2019 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में अपनी मजबूत उपस्थिति से सबको स्तब्ध कर दिया था। 2014 में पार्टी को तब उसे 17% वोट प्राप्त हुए थे, लेकिन सिर्फ दो सीटें ही मिल पाई थी। इसके बाद 2016 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को 10% वोट तो मिले, लेकिन सिर्फ तीन सीटें ही जीत सकी थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 41% मत मिला और 18 लोकसभा की सीट जीतने में कामयाब हुई थी। 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को 38% वोट प्राप्त हुए और 77 सीटें जीतने में कामयाब हुई थी। पार्टी के लिए यह एक बड़ी सफलता थी, क्योंकि सिर्फ 5 साल में भाजपा की सीट तीन से बढ़कर सीधे 77 हो गई। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को लगभग 39% वोट प्राप्त हुए और 12 सीटें मिली थी।
भाजपा की नजर 2026 विधानसभा चुनाव पर
अब भाजपा की नजर 2026 के विधानसभा चुनाव पर टिकी है और पार्टी जनसरोकार के मुद्दों को लेकर आगे बढ़ रही है। घुसपैठ और अवैध प्रवास आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रमुख मुद्दे होंगे। भाजपा जनसांख्यिकीय परिवर्तन के कारण जनसंख्या बदलाव को भी बड़ा मुद्दा बनाएगी जो घुसपैठ से जुड़ा हुआ है। बंगाल राज्य के सीमावर्ती जिलों में तेजी से मुस्लिम आबादी बढ़ रही है और यहां हिंदुओं की संख्या लगातार कम हो रही है। इस के साथ ही भाजपा बंगाल की सुरक्षा यानी देश की सुरक्षा जैसे नारों को भी मुद्दा बनाने की तैयारी में है। बंगाल देश में अवैध घुसपैठ का प्रवेशद्वार के तौर पर देखा जाता है। वहीं असम की भाजपा सरकार ने अपने दृढ इक्षाशक्ति से अवैध घुसपैठ को पूर्णतः समाप्त कर दिया है। वहीं देश में सबसे ज्यादा घुसपैठ पश्चिम बंगाल के रास्ते से होती है और फिर घुसपैठिए देश अन्य राज्यों में सुनियोजित तरीके से फ़ैल जाते हैं, जिससे देश के पूरे देश की सुरक्षा को भी खतरे उत्पन्न होता है। लेकिन, ममता बनर्जी सीमा पर बाड़ लगाने जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार को सहयोग नहीं देती है। भाजपा इस मुद्दे को गंभीरता से उठाने की तैयारी कर रही है।
ममता बनर्जी के मुस्लिम तुष्टिकरण को उजागर कर रही भाजपा
भाजपा ममता बनर्जी के मुस्लिम तुष्टिकरण के मुद्दे को भी जनता के समक्ष गहराई से पेश करने की तैयारी में है। भाजपा का आरोप पूर्णतः सही है क्योंकि ममता बनर्जी की पूरी राजनीति मुस्लिम वोट बैंक से शुरू होती है और उसी पर टिकी है। ममता बनर्जी अपने बयानों और क्रियाकलापों से इन आरोपों को सच भी साबित करती है। भाजपा महिला सुरक्षा का मुद्दा भी उठाएगी, क्योंकि संदेश खाली की घटना, आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप मर्डर केस सहित अन्य घटनाओं को ममता सरकार की नाकामी बता रही है। यह मुद्दा ग्रामीण और शहरी इलाकों को समान रूप से प्रभावित करती है। भाजपा इन मुद्दों के अलावे भ्रष्टाचार, शिक्षक भर्ती घोटाला, क्लर्क भर्ती घोटाला, कोयला तस्करी घोटाला पर घेरेगी। भाजपा के पास ममता बनर्जी के खिलाफ बेरोजगारी, विकास और कल्याण, योजनाओं की नाकामी जैसे मुद्दों को भी उठाएगी। राज्य में उद्योगों की कमी, सड़कें, शिक्षा और आवास जैसे मूल मुद्दे भी प्रभावी है।
केंद्रीय योजनाओं को पश्चिम बंगाल में लागू नहीं होने दिया
भाजपा केंद्र की योजनाओं को राज्य में लागू न करने के मुद्दे पर भी जनता से ममता बनर्जी के खिलाफ जनमत मांगेगी। भाजपा का बिहार विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद बुलंद हौसले के साथ ही पश्चिम बंगाल में होने जा रहे पश्चिम बंगाल चुनाव में जीत की पटकथा लिखने की तैयारी में है। वर्ष 2025 में बिहार चुनाव में प्रचंड जीत के बाद 14 नवंबर को प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार चुनाव में जीत के बाद बंगाल के संदर्भ में कहा था कि गंगा जी बिहार से बहते हुए ही बंगाल तक पहुंचती हैं। दूसरे शब्दों में मोदी यह कहना चाह रहे थे की बिहार ने बंगाल में भाजपा की विजय का रास्ता भी साफ कर दिया है।

एसआईआर का विरोध कर रहीं ममता
ममता बनर्जी लगातार एसआईआर के विरोध में है। वहीं भाजपा का आरोप है कि ममता घुसपैठियों को बचाने के लिए ऐसा कर रही हैं। कई रिपोर्टों में यह सामने आ चुका है कि इन घुसपैठियों में ज्यादातर बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिम है जो अब बंगाल में वोटर बन चुके हैं। यह मुद्दा मुस्लिम वोट बैंक से जुड़ा है जो ममता बनर्जी की असली ताकत है। 2021 में मुस्लिम बहुल जिलों में तृणमूल कांग्रेस ने लगभग सभी सीटों पर जीत दर्ज किया था। ममता बनर्जी मुस्लिम वोट बैंक को बचाए रखने के लिए सरकारी योजनाओं के जरिये हमेशा प्रयासरत रहती है।
ममता बनर्जी का मुस्लिम तुष्टिकरण
इमामों और मुज्जनों के भत्ता देने का निर्णय हो या अल्पसंख्यक समुदायों को विशेष योजनाओं का लाभ ममता बनर्जी के मुस्लिम तुष्टिकरण के कुछ उदाहरण है। ममता बनर्जी पर आरोप है कि उन्होंने एक समुदाय विशेष को खुश करने के लिए जनवरी 2024 में राम मंदिर में होने वाले प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का निमंत्रण ठुकरा दिया था। इसके अलावा ममता बनर्जी मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति पर चलते हुए कहा था कि वह पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के लिए अनुमति नहीं देंगी। 2023 में हावड़ा में रामनवमी जुलूस पर मुस्लिम इलाके में हमला किया गया था। उस समय ममता बनर्जी ने कहा था कि अभी रमजान का महीना चल रहा है और इस महीने में मुसलमान कोई गलत काम नहीं करते है। ममता सरकार ने बंगाल में कुल 179 जातियों को ओबीसी आरक्षण का दर्जा दिया था, जिनमें से 118 जातियां मुस्लिम समुदाय की थी। इसके अलावा ममता दीदी को जय श्री राम के नारे से भी दिक्कत है। पश्चिम बंगाल की पुलिस ने 2020 में कोलकाता में 44वें अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले में हनुमान चालीसा बांटने पर प्रतिबंध लगा दिया था। 2017 में ममता ने कहा था कि हर रोहिंग्या मुस्लिम आतंकी नहीं है और उन्हें वापस नहीं भेजना चाहिए। इसके अलावा 2017 में ममता सरकार ने पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के अगले दिन मुहर्रम होने का होने के कारण मूर्ति विसर्जन पर यह रोक लगाने का फैसला किया था।
ममता दीदी बांग्लादेश से होने वाले अवैध घुसपैठ को रोकने में सीमा सुरक्षा बल की मदद नहीं करती है। दरअसल, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बीच लगभग 2200 किमी की सीमा है, जिसमें से करीब 450 कि.मी. इलाके इस कारण बाड़ नहीं लग पा रही है, क्योंकि ममता सरकार इसके लिए सीमा सुरक्षा बल को जमीन नहीं दे रही है।

















