केंद्र सरकार ने देश में फर्जी विश्वविद्यालयों पर कार्रवाई तेज कर दी है। इसको लेकर यूजीसी ने लिस्ट जारी की है, जिसमें पता चला है कि ये फर्जी संस्थान अब सिर्फ 8 राज्यों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि 12 राज्यों में फैल चुके हैं। दो साल पहले जहां इनकी संख्या करीब 20 थी, अब ये 32 तक पहुंच गई है। ये शिक्षा माफिया द्वारा चलाए जा रहे हैं, जो छात्रों की मजबूरी का फायदा उठाकर फर्जी डिग्रियां बेचते हैं और हजारों युवाओं का भविष्य बर्बाद कर देते हैं।
फर्जी विश्वविद्यालयों का बढ़ता नेटवर्क
पहले ये संस्थान मुख्य रूप से कुछ ही राज्यों में थे, लेकिन अब नए-नए इलाकों में घुस चुके हैं। चार नए राज्य जहां ये पहुंचे हैं- हरियाणा, राजस्थान, झारखंड और अरुणाचल प्रदेश। कुल 12 राज्य प्रभावित हैं: दिल्ली, उत्तर प्रदेश, केरल, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा, राजस्थान, झारखंड और अरुणाचल प्रदेश।
दिल्ली में सबसे ज्यादा मामले हैं- यहां अकेले 12 फर्जी विश्वविद्यालय चल रहे हैं। कुछ तो यूजीसी के दफ्तर से कुछ ही किलोमीटर दूर हैं, लेकिन कोई रोक-टोक नहीं। ये संस्थान गांव-गांव तक पहुंच चुके हैं और विदेशी यूनिवर्सिटी का नाम लेकर भी ठगी करते हैं। मिसाल के तौर पर, श्रीलंका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने महाराष्ट्र में एक फर्जी संस्थान की शिकायत की थी, जिसके बाद यूजीसी ने अलर्ट जारी किया।
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कुछ प्रमुख फर्जी संस्थानों के नाम
दिल्ली में चल रहे कई नाम इसमें शामिल हैं, जिनमें ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एंड फिजिकल हेल्थ साइंसेज, कमर्शियल यूनिवर्सिटी लिमिटेड, यूनाइटेड नेशन्स यूनिवर्सिटी, वोकेशनल यूनिवर्सिटी, एडीआर-सेंट्रिक, ज्यूरिडिकल यूनिवर्सिटी, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड इंजीनियरिंग, विश्वकर्मा ओपन यूनिवर्सिटी फॉर सेल्फ एम्प्लॉयमेंट, अध्यात्मिक विश्वविद्यालय, वर्ल्ड पीस ऑफ यूनाइटेड नेशनल यूनिवर्सिटी है।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश के 4 विश्वविद्यालय भी इसमें शामिल हैं, जिनके नाम गांधी हिंदी विद्यापीठ (प्रयागराज), महामाया टेक्निकल विश्वविद्यालय (नोएडा), नेताजी सुभाष चंद्र बोस ओपन यूनिवर्सिटी (अलीगढ़), भारतीय शिक्षा परिषद (लखनऊ) हैं। साथ ही केरल, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में 2-2 संस्थान हैं। पश्चिम बंगाल में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन और इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन एंड रिसर्च जैसे नाम शामिल हैं। हरियाणा में मैजिक एंड आर्ट यूनिवर्सिटी (फरीदाबाद), झारखंड में दक्ष यूनिवर्सिटी (रांची) जैसे नए नाम सामने आए हैं।
यूजीसी की कार्रवाई
यूजीसी ने इन सभी की लिस्ट अपनी वेबसाइट पर डाल दी है और राज्यों के उच्च शिक्षा विभागों को पत्र लिखकर उचित कार्रवाई करने को कहा है। हाल ही में बेंगलुरु के ग्लोबल ह्यूमन पीस यूनिवर्सिटी जैसे मामले में स्पेशल अलर्ट भी जारी किया गया। लेकिन कई लोग कहते हैं कि यूजीसी ज्यादातर सिर्फ लिस्ट जारी करता है, उसके बाद निगरानी कमजोर पड़ जाती है।
यूजीसी ने साफ कहा है कि ऐसे संस्थानों से डिग्री लेना बेकार है- न आगे पढ़ाई में काम आएगी, न नौकरी में। छात्रों और पैरेंट्स को सलाह दी गई है कि एडमिशन लेने से पहले यूजीसी की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर फर्जी यूनिवर्सिटी की लिस्ट जरूर चेक करें।












