कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने कांग्रेस पार्टी की सच्चाई एक बार फिर सामने रखी है। इस बार उन्होंने जो कहा है, वह केवल एक बयान नहीं बल्कि अपनी ही पार्टी के नेतृत्व के खिलाफ एक खुली चुनौती जैसा भी है। अपने यूट्यूब चैनल ‘मणि टॉक’ पर जारी एक वीडियो में अय्यर ने कांग्रेस की वर्तमान कार्यप्रणाली पर कड़े प्रहार किए हैं।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो पार्टी अपने भीतर की अलग राय या असहमति को बर्दाश्त नहीं कर सकती, वह देश पर शासन करने के योग्य नहीं है।
असहमति ही कांग्रेस की असली ताकत
अय्यर ने अपने 23 मिनट के वीडियो, जिसका शीर्षक ‘क्या आज की कांग्रेस में असहमति के लिए कोई जगह नहीं है?’, में तर्क दिया कि कांग्रेस का अस्तित्व हमेशा से वैचारिक विविधता पर टिका रहा है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस आज तक इसलिए जीवित है क्योंकि यहां अलग-अलग राय मौजूद रही है। दुर्भाग्य से, आज का नेतृत्व इस बुनियादी सबक को भूल गया है।”
राजीव गांधी और नेहरू के दौर का हवाला
अय्यर ने 1989 के एक ऐतिहासिक क्षण को याद करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को उद्धृत किया। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी ने संसद में स्पष्ट किया था कि “केवल एक धर्मनिरपेक्ष भारत ही जीवित रह सकता है।”
अय्यर ने सीधे तौर पर राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्या आज का आलाकमान संसद के रिकॉर्ड में दर्ज उन शब्दों को दोहराने की हिम्मत रखता है? उन्होंने इंदिरा गांधी द्वारा लगाई गई इमरजेंसी (आपातकाल) का उदाहरण देते हुए चेतावनी दी कि जब भी कांग्रेस ने असहमति को कुचलने की कोशिश की, उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने याद दिलाया कि इमरजेंसी के बाद इंदिरा गांधी खुद रायबरेली से चुनाव हार गई थीं।
बाबरी ढांचा और बोफोर्स का जिक्र
अय्यर ने वीडियो में अरुण नेहरू, वीपी सिंह और आरिफ मोहम्मद खान जैसे नेताओं का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कैसे राजीव गांधी ने अरुण नेहरू को कैबिनेट से बाहर किया था जब उन्हें पता चला कि वे बाबरी मस्जिद के ताले खुलवाने के जिम्मेदार थे। अय्यर का कहना है कि कांग्रेस ने हमेशा बगावत और असहमति का सामना किया है और उसी से शक्ति प्राप्त की है, लेकिन आज माहौल अलग है।
पार्टी से बढ़ती दूरियां
मणिशंकर अय्यर और कांग्रेस के बीच तल्खी पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ रही है। हाल ही में केरल में एक सेमिनार के दौरान उन्होंने वामपंथी नेता पिनाराई विजयन की प्रशंसा की थी, जिससे पार्टी के स्थानीय नेता और आलाकमान काफी नाराज थे। उन्हें कांग्रेस कार्यसमिति से बाहर रखे जाने पर भी उनका दर्द इस वीडियो में साफ झलका।
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