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होम रक्षा

उत्तर पूर्व में भारत की वायु शक्ति का विस्तार

पीएम मोदी ने असम में मोरान बाईपास ELF राष्ट्र को समर्पित कर पूर्वोत्तर को अष्टलक्ष्मी का प्रतीक बनाया। यह सुविधा सामरिक शक्ति बढ़ाती है, बाढ़ राहत में मदद करती है और सिलीगुड़ी कॉरिडोर की रक्षा मजबूत करती है।

Written byलेफ्टिनेंट जनरल एम के दास,पीवीएसएम, बार टू एसएम, वीएसएम ( सेवानिवृत)लेफ्टिनेंट जनरल एम के दास,पीवीएसएम, बार टू एसएम, वीएसएम ( सेवानिवृत) — edited by कुलदीप सिंह
Feb 16, 2026, 10:23 am IST
in रक्षा, विश्लेषण
North East ELF

प्रतीकात्मक तस्वीर

हमारे विरोधियों के लिए एक शक्तिशाली संदेश में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयम 14 फरवरी को असम के डिब्रूगढ़ में मोरान बाईपास पर भारतीय वायुसेना के हवाई जहाज से लैंडिंग की। राष्ट्रीय राजमार्ग 127 के प्रबलित खंड पर भारतीय वायुसेना के सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस विमान में नवनिर्मित आपातकालीन लैंडिंग सुविधा से उतरने के बाद, पीएम मोदी ने 4.2 किलोमीटर लंबे ईएलएफ को राष्ट्र को समर्पित किया। इस कार्यक्रम में शानदार हवाई प्रदर्शन द्वारा लैंडिंग, टचडाउन और टेकऑफ भी देखा गया, जिसमें राफेल और सुखोई लड़ाकू विमान शामिल थे। वहाँ पर उपस्थित एक उत्साही भीड़ ने भारत की बढ़ती सामरिक शक्ति का प्रत्यक्ष अनुभव किया।

क्या है ELF

ईएलएफ एक वैकल्पिक रनवे है जिसे भारतीय वायुसेना द्वारा वांछित विनिर्देशों के अनुसार सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग में इंजीनियर किया गया है। एनएच 127 पर ईएलएफ भारत के पूर्वोत्तर में पहला है, हालांकि शेष भारत में ऐसी 14 सुविधाएं मौजूद हैं, जो सभी मोदी सरकार के पिछले पांच वर्षों में निर्मित हुई हैं।  यह ईएलएफ एलएसी से सिर्फ 300 किमी की दूरी पर स्थित है और इस प्रकार इस तरह की सुविधा का रणनीतिक संदेश चीन तक पहुँच गया होगा। यह बांग्लादेश में नई शक्ति संरचना के लिए भी एक सूक्ष्म संदेश है, जहां अंतरिम मोहम्मद यूनुस सरकार के दौरान सिलीगुड़ी कॉरिडोर के लिए खतरा उभरा था।

भारतीय सशस्त्र सेनाएं हमारे विरोधियों से खतरे का मुकाबला करने के लिए क्षमता विकास में विश्वास करते हैं और वे देश विशिष्ट नहीं होती हैं। भारत की वायु शक्ति और लंबी दूरी की मिसाइलें तत्काल सीमाओं के पार  मारक क्षमता रखती हैं। इसलिए पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर सिर्फ इतना कहा कि सामरिक दृष्टि से और प्राकृतिक आपदाओं के समय इस ईएलएफ का बहुत महत्व है। इस तरह की सुविधा चबुआ और तेजपुर में स्थित भारतीय वायुसेना के एयरबेस  के समीप अतिरिक्त विकल्प प्रदान करती है। चूंकि भारत का पूर्वोत्तर बाढ़ प्रवाहित रहता है, इसलिए नई सुविधा का उपयोग दूर-दराज के क्षेत्रों में आपदा राहत प्रदान करने में भी किया जा सकता है।

भारतीय वायुसेना की ताकत

परंपरागत रूप से, भारतीय वायुसेना को चीनी PLAF (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स) पर बढ़त हासिल थी क्योंकि भारतीय हवाई अड्डे मैदानी इलाकों में स्थित हैं जबकि चीनी अड्डे तिब्बती पठार के ऊंचे पहाड़ों में स्थित हैं। भारतीय लड़ाकू विमान अधिक ईंधन ले जाने में सक्षम हैं और इस प्रकार उनकी लंबे समय तक उड़ने की क्षमता है। अपने ऊंचे क्षेत्र से उड़ान के कारण चीनी जेट कम ईंधन ले जाने के लिए मजबूर होते हैं और इस प्रकार भारत के खिलाफ उनकी सहनशक्ति सीमित है। इसलिए हाल के वर्षों में चीन ने एलएसी के पास स्थित अपने एयरबेस को अपग्रेड किया है ताकि उनके जेट्स अधिक समय तक उड़ सकें और भारत के  हवाई क्षेत्र पर हावी हो सके। पीएलएएएफ से उभरते खतरे से निपटने के लिए भारत ने भी पूर्व और पूर्वोत्तर में अपने एयरबेस को अपग्रेड किया गया है।

फ्रांस से 114 राफेल जेट खरीदने की भारत की योजना को उपरोक्त नजर से देखा जाना चाहिए। रूस से 288 एस-400 मिसाइलों की प्रस्तावित खरीद के साथ, भारत ने अपनी हवाई आक्रमण क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ वायु रक्षा कवर को भी बढ़ावा देने की योजना बनाई है। लंबी अवधि में, भारत ‘सुदर्शन चक्र’ परियोजना के तहत एक स्वदेशी वायु रक्षा कवर विकसित कर रहा है। जैसा कि हाल के संघर्षों से देखा गया है, वायु शक्ति तेजी से एक प्रमुख युद्ध जीतने वाला कारक बनती जा रही है। मानव रहित हवाई वाहनों (यूएवी) और ड्रोन की घातकता के साथ, हम युद्ध क्षेत्र में हवाई लड़ाई के युग में हैं। वायु शक्ति ज्ञात विरोधियों के खिलाफ एक उपयुक्त निवारक भी है।

भारत को और अधिक ईएलएफ की आवश्यकता

भारतीय वायुसेना को भारत के पूर्वी और पूर्वोत्तर क्षेत्र में और अधिक ईएलएफ की आवश्यकता हो सकती है। इस तरह की और सुविधाओं के निर्माण की योजना है। इसके अलावा, भारत धुबरी (असम), किशनगंज (बिहार) और चोपड़ा (पश्चिम बंगाल) में तीन नए गैरीसन स्थापित करके सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा को बढ़ा रहा है। भारत टिन मिले हाट और रंगापानी के बीच लगभग 40 किलोमीटर को कवर करने वाला एक भूमिगत रेल नेटवर्क बनाने की भी योजना बना रहा है। अपने सैन्य करियर के दौरान इन सभी क्षेत्रों को देखने के बाद, मुझे विश्वास है कि निकट भविष्य में सिलीगुड़ी कॉरिडोर की भेद्यता काफी कम होने जा रही है। मोरन बाईपास ईएलएफ सिलीगुड़ी कॉरिडोर को और मजबूत करता है।

असम की अपनी यात्रा के दौरान, पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार भारत के पूर्वोत्तर को अष्टलक्ष्मी के रूप में देखती है- समृद्धि और शक्ति का प्रतीक। यह एक तथ्य है कि इस क्षेत्र ने प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तिगत संरक्षण में स्थायी शांति, स्थिरता और विकास को काफी हद तक हासिल किया है। रणनीतिक दृष्टिकोण से, भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र को मोरन बाईपास पर ईएलएफ के माध्यम से एक बड़ा सुरक्षा कवच मिला है। इस तरह के उपायों के माध्यम से, भारत की वायु शक्ति देश के पूर्वोत्तर में सामरिक शक्ति का विस्तार का प्रतीक है। साथ ही  क्षेत्रीय/वैश्विक स्तर पर भारत एक शुद्ध सुरक्षा प्रदाता (net security provider) बनने की रणनीतिक क्षमता को भी गति देता है।

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