पाकिस्तान भारत के खिलाफ प्रॉक्सी वॉर (छद्म युद्ध) चलाने में कामयाब हो रहा है, क्योंकि दुनिया भर में इस पर ध्यान देने और कार्रवाई करने की कमी है। अमेरिका की एक स्वतंत्र जर्नल यूरेशिया रिव्यू में पूर्व भारतीय सेना अधिकारी निलेश कुंवर के द्वारा लिखे गए लेख में इसको लेकर दावा किया गया है।
पाकिस्तान आतंकियों के साथ मिलकर कर रहा छद्म युद्ध
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान लंबे समय से आतंकी ग्रुप्स के साथ मिलकर पड़ोसी देशों के खिलाफ प्रॉक्सी वॉर चला रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय की उदासीनता की वजह से वो जिम्मेदारी से बचता आ रहा है। इसलिए भारत को लगातार पाकिस्तान के इन कनेक्शनों को दुनिया के सामने लाना चाहिए और आतंकवाद से निपटने की अपनी ताकत को और मजबूत करना चाहिए। सिर्फ सैन्य जवाब के अलावा गैर-सैन्य तरीकों से भी पाकिस्तान पर इतना दबाव डालना चाहिए कि उसके लिए ये महंगा पड़ जाए।
संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध समिति “कागजी शेर”
इसमें संयुक्त राष्ट्र के 1267 प्रतिबंध समिति की एनालिटिकल सपोर्ट एंड सैंक्शंस मॉनिटरिंग टीम को “कागजी शेर” बताया गया है। ये टीम अपनी रिपोर्ट्स में सिर्फ सदस्य देशों की दी गई जानकारी पर भरोसा करती है, खुद कोई जांच नहीं करती और कोई सख्त निर्देश भी नहीं देती। इसकी 37वीं रिपोर्ट में पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद (JeM) को कई घटनाओं से जोड़ा गया है, लेकिन सिर्फ एक सदस्य देश (यानी भारत) की जानकारी के तौर पर, बिना खुद पुष्टि के।
रिपोर्ट में तीन मुख्य बातें उठाई गई हैं
- 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुआ हमला
- 9 नवंबर 2025 को लाल किले पर सुसाइड कार बम ब्लास्ट
- JeM द्वारा जमात-उल-मुमिनात नाम की महिलाओं की अलग विंग बनाना, जिसका मकसद ग्लोबल जिहाद लड़ना है
ये सब JeM से जुड़े बताए गए हैं। रिपोर्ट कहती है कि पाकिस्तान ने JeM को “डिफंक्ट” (खत्म) घोषित किया था, लेकिन ये झूठ है। JeM चीफ मसूद अजहर पाकिस्तान में मौजूद है। पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने खुद कहा था कि “वो बहुत बीमार हैं, घर से निकल भी नहीं सकते।” लेकिन पाकिस्तान आर्मी के DG ISPR ने उनकी मौजूदगी से इनकार किया, जिसे रिपोर्ट में हंसी का पात्र बताया गया है।
भारत अपनाए ‘नेम एंड शेम’ की नीति
रिपोर्ट सुझाव देती है कि भारत को पाकिस्तान के आतंकवाद को विदेश नीति के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने को लगातार उजागर करना चाहिए। ‘नेम एंड शेम’ नीति अपनानी चाहिए और मजबूत सबूतों के साथ दुनिया को दिखाना चाहिए। UN की ये रिपोर्ट भले ही कमजोर हो और कोई दांत न रखती हो, लेकिन ये कूटनीतिक ताकत के लिए इस्तेमाल की जा सकती है। दुनिया की बेपरवाही पाकिस्तान को ऐसे काम करने की छूट दे रही है, जबकि भारत को अकेले ही मजबूत होकर इसका मुकाबला करना पड़ रहा है।














