पंजाब

पंजाब : जानलेवा बनी पंजाब की सडक़ें, हर दूसरे दिन जा रही एक जान

Ministry of Road Transport and Highways की रिपोर्ट में खुलासा—पंजाब में पिछले 5 साल में गड्ढों के कारण 539 हादसे और 414 मौतें। 2024 में ही 131 लोगों ने गंवाई जान, 65% बढ़ीं मौतें।

Published by
राकेश सैन

पंजाब में आधारभूत ढांचा विकास की कमी के चलते अब इसका खामियाजा लोगों को अपनी जानें गंवा कर भुगतना पड़ रहा है। राज्य में सडक़ों के गड्ढे जानलेवा साबित हो रहे हैं। इस वजह से होने वाले हादसों में हर दो दिन में एक व्यक्ति की जान जा रही है। पिछले पांच साल में इस वजह से हाने वाली मौतों में 65 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

सदन में पेश केंद्रीय सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। बीते 5 साल में राज्य में 539 सडक़ हादसे हुए हैं जिसमें 414 लोगों की मौत हुई है। वर्ष 2024 के दौरान ही राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग व शहरी सडक़ों पर गड्ढों के कारण 150 हादसे हुए जिसमें 131 लोगों की मौत हो गई। इसी तरह वर्ष 2023 में 89 हादसों में 68 लोगों को जान गंवानी पड़ी है।

मानसून के बाद ज्यादा खराब होते हैं हालात

प्रदेश में विभिन्न राष्ट्रीय व राज्य राजमार्गों पर गड्ढे गंभीर हादसों का खतरा पैदा कर रहे हैं। मानसून के बाद हादसों का खतरा और भी बढ़ जाता है क्योंकि सडक़ों पर गड्ढे बढ़ जाते हैं और इनकी रिपेयर में समय लगता है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022 में गड्ढों से विभिन्न राजमार्ग पर 84 हादसे हुए जिसमें 60 लोगों की मौत हुई। इसी तरह वर्ष 2021 में 114 हादसों में 77 और वर्ष 2020 में 102 हादसों में 78 लोगों की जान चली गई।

घायल भी हो रहे लोग

पिछले पांच साल में हादसों के कारण 185 गंभीर व 65 लोग मामूली घायल हुए हैं। 2024 में 47 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए जबकि 12 को मामूली चोटें आई। 2023 में 26 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए जबकि सात को मामूली चोट आई।

दुर्घटनाओं के भी यह भी कारण

वाहन चालकों द्वारा ट्रैफिक नियमों की अनदेखी, तेज रफ्तार, ओवरलोडिंग और व्यावसायिक वाहनों की निगरानी कमजोर होना भी सडक़ हादसों का प्रमुख कारण है। रिपोर्ट के अनुसार तेज रफ्तार की लापरवाही के कारण वर्ष 2020 में जहां 3,898 लोगों की मौत हुई थी। वहीं 2024 में यह संख्या बढक़र 4,759 तक पहुंच गई। इसी तरह सडक़ हादसे भी 2020 के 5,203 के मुकाबले 2024 में बढक़र 6,063 तक पहुंच गए हैं। इसी तरह ओवरलोडिंग के चलते भी पांच साल में 2,725 लोगों की जान गई है।

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