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केरल में ‘सीक्रेट डील’? गांधी परिवार और विजयन पर बड़ा सवाल

केरल की राजनीति में राहुल गांधी, सोनिया गांधी और मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के बीच कथित गुप्त समझौते पर विश्लेषण। वायनाड, रायबरेली, 2019-2024 लोकसभा नतीजों और 2021 विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के आधार पर उठते राजनीतिक सवालों की पड़ताल।

Written byअभय कुमारअभय कुमार — edited by Shivam Dixit
Feb 15, 2026, 07:50 pm IST
in भारत, विश्लेषण

केरल की राजनीति शुरुआती दिनों से नई राजनीति के लिए जानी जाती हैं. विश्व में पहली लोकतान्त्रिक कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार केरल में ही बनी थी. केरल देश के उन प्रदेशों में शामिल हैं जहाँ अनेक राजनीतिक दल हैं मगर दलों का आपसी गठबंधन भी दिलचस्प और नई राजनीति दिखने वाला हैं.

80 के दशक में केरल में दो गठबंधनों कांग्रेस पार्टी नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट और माकपा नीत लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट अपनी राजनीतिक एकता और गठबंधन राजनीति के लिए पुरे देश में एक उद्धरण बनकर सामने आया हैं. इतना ही नहीं बल्कि 1982 से 2021 तक केरल में चुनाव और चुनाव दोनों गठबंधनों में सत्ता की अदल बदल भी देश की राजनीति के लिए जनता की प्रयोग की तरह हैं.

गांधी परिवार और पी. विजयन के बीच कथित गुप्त समझौता

वर्तमान में केरल की राजनीति में एक गुप्त समझौता राज्य और देश की राजनीति को प्रभावित कर रहा हैं. यह समझौता सोनिया गांधी परिवार और केरल के मुख्‍यमंत्री पी विजयन के बीच हैं. इस गुप्त समझौते के तहत जहाँ कांग्रेस पार्टी विधानसभा का चुनाव कमजोरी से लड़कर केरल में पी. विजयन की सरकार को बने रहने में मदद करेगी. इसके एवज में पी. विजयन वायनाड से कमजोरी से चुनाव लड़कर गाँधी परिवार के पाले में इस सीट को बने रहने में मदद करेगी और साथ ही कांग्रेस पार्टी को लोकसभा चुनाव में अधिकतम सीट जितने में मदद करेगी. लोकसभा का चुनाव कमजोरी से लड़कर कांग्रेस पार्टी को केरल से अधिकतम लोकसभा की सीट जितने में मदद करेंगे. के

रल में कांग्रेस पार्टी 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव में किसी प्रदेश के अपेक्षा राज्य से सबसे ज्यादा लोकसभा सीटें जीती हैं. कांग्रेस पार्टी केरल की कुल 20 लोकसभा सीटों में से 2019 में 15 लोकसभा सीटें और 2024 में 14 लोकसभा सीटें जीती हैं. राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा के चुनाव में रायबरेली और वायनाड की दो सीटों से लोकसभा चुनाव जीता था. राजनीतिक जानकारों का मानना था कि राहुल गांधी वायनाड की सीट पर सांसदी बनाये रखेंगे और रायबरेली की लोकसभा सीट अपनी बहन प्रियंका गांधी के लिए खाली करेंगे क्योंकि रायबरेली की लोकसभा की सीट लंबे समय से गांधी परिवार का गढ़ रहा हैं.

1980 में भी इंदिरा गाँधी तत्कालीन आंध्र प्रदेश के मेडक और उत्तर प्रदेश की रायबरेली लोकसभा सीटों से चुनाव जीता था और रायबरेली सीट खाली करके अपने परिवार के अन्य सदस्य अरुण नेहरू को चुनाव लड़वाया था. इतना ही नहीं बल्कि 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश में महज एक सीट रायबरेली ही जीत सकी थी. अतएव उपचुनाव में गांधी परिवार के लिए वायनाड सीट के मुकाबले रायबरेली सीट से चुनाव लड़ना ज्यादा मुफीद था. लेकिन इसके उलट राहुल गांधी ने वायनाड की सीट खाली कर रायबरेली सीट से अपना लोकसभा की सदस्यता बनाये रखा.

गांधी परिवार का ऐसा फैसला पी विजयन और गांधी परिवारों में गुप्त समझौते के तहत हुआ था जिसमें गांधी परिवार को वायनाड की लोकसभा की सीट ज्यादा मुफीद लगा.

विधानसभा चुनाव और सत्ता अदल-बदल की परंपरा में बदलाव

विधानसभा चुनाव में केरल में माकपा के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट और कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के बीच सरकार अदल बदल की चार दशक की परंपरा 2016 तक जारी रही मगर 2021 में जब कांग्रेस पार्टी नीत यूनाइटेड यूडीएफ की सत्ता में वापसी की बारी थी तब कांग्रेस पार्टी के सीटों की संख्या 2016 की सीटों की संख्या के अपेक्षा कम हो गई. 2021 के केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी यह सन्देश देने में नाकाम रही कि वो चुनाव जीतने के लिए चुनाव लड़ रही है. बल्कि कांग्रेस पार्टी की क्रियाकलापों से यह महसूस हो रहा था की कांग्रेस पार्टी केवल प्रक्रिया का हिस्सा बन रही थी. कांग्रेस पार्टी की सहयोगी और यूडीएफ गठबंधन की सहयोगी दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने भी गठबंधन में अपने पाले की 25 सीटों पर एलडीएफ को ज्यादा कड़ी टक्कर दी थी.

वायनाड से चुनाव और दक्षिण भारत में गांधी परिवार की रणनीति

गांधी परिवार और पी. विजयन परिवारों के गुप्त समझौते की शुरुआत 2019 में सामने आई जब राहुल गांधी ने अमेठी लोकसभा सीट के अलावा केरल की वायनाड को अपनी दूसरी लोकसभा सीट के तौर पर चुना था. इससे पूर्व गांधी परिवार का कोई भी सदस्य केरल से लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा था. इंदिरा गांधी 1978 में कर्नाटक के चिकमंगलूर से लोकसभा उपचुनाव लकर गाँधी परिवार की पहली सदस्य थी जो दक्षिण के राज्यों से चुनाव लड़ी थी. इसके अलावा गांधी परिवार का कोई भी सदस्य 2024 तक दक्षिणी राज्य से किसी भी सीट से दोबारा चुनाव नहीं लड़ा था. 1980 में इंदिरा गांधी ने चिकमंगलूर के बजाय तत्कालीन आंध्र प्रदेश के मेडक से चुनाव लड़ी थी. सोनिया गांधी ने 1999 में अमेठी लोकसभा सीट के अलावा कर्नाटक के बेल्लारी से भी चुनाव लड़ा था। हालांकि, बेल्लारी में सोनिया गांधी के चुनावी चुनाव लड़ने के बाद कांग्रेस पार्टी 2004, 2009, 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में इस सीट से चुनाव हार गई थी. परिवार के इस तरह के चुनावी इतिहास के बावजूद राहुल गांधी का वायनाड लोकसभा सीट से दुबारा चुनाव लड़ना और उसके बाद उनकी बहन प्रियंका वढेरा का फिर उपचुनाव लड़ना इस तथ्य को पुख्ता करता हैं की दोनों परिवारों में गुप्त समझौता हैं.

मोहम्मद रियास की जीत और बेपोर विधानसभा सीट का विश्लेषण

गांधी परिवार को इस प्रकार के सहयोग के एवज में पी विजयन और उनके परिवार को राज्य स्तर पर कई तरह का सहयोग मिल रहा हैं. केरल के मुख्‍यमंत्री पी. विजयन के दामाद मोहम्मद रियास ने 2021 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए कोझिकोड जिला की बेपोर विधानसभा सीट को चुना. 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी इस विधानसभा सीट पर आगे थी लेकिन 2021 के विधानसभा चुनाव में मोहम्मद रियास ने इस सीट पर जीत दर्ज़ किया था. बेपोर विधानसभा सीट पर 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी क्रमशः 10,423 और 19,561 वोटों के अंतर से आगे थी, लेकिन 2021 के विधानसभा चुनावों में माकपा के मोहम्मद रियास 28,747 मतो के अंतर से चुनाव जीतते हैं जो चौंकाने वाला था.

सीटवार विश्लेषण और राजनीतिक निष्कर्ष

केरल में होने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में सीटवार विश्लेषण करने पर दोनों परिवारों के बीच आपसी सांठगांठ के पुख्ता सबूत मिलते हैं. प्रदेश की कुल 140 विधानसभा सीटों में 60 सीट ऐसे हैं जिनपर 2019 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी नीत यूडीएफ आगे रही थी और उन सीटों पर 2021 के विधानसभा चुनावों में माकपा नीत एलडीएफ ने जीत दर्ज़ किया था. इस तरह के विषम नतीजे भारतीय राजनीति में बहुत कम ही देखने को मिलता हैं क्योंकि इतने कम समय में राज्य की 43 प्रतिशत सीटों का जनमत बदलना चौकानेवाला हैं. निष्कर्ष के तौर पर ऐसा कहा जा सकता हैं की इस गुप्त समझौते के तहत जहाँ सोनिया गांधी अपने परिवार के लिए लोकसभा में जाने के लिए एक सुरक्षित सीट ढूंढ रही हैं, वहीं दूसरी ओर केरल के मुख्यमंत्री का एकमात्र राजनीतिक लक्ष्य अपने दामाद मोहम्मद रियास को मुख्यमंत्री की कुर्सी का उत्तराधिकारी बनाना हैं.

Topics: Kerala politics secret dealRahul Gandhi Wayanad seatPinarayi Vijayan Congress understandingUDF vs LDF analysisKerala assembly 2021 resultsLok Sabha 2019 2024 Kerala seatsWayanad Raebareli political strategy
अभय कुमार
अभय कुमार
अभय कुमार, सीएसडीएस (CSDS ), इप्सोस (IPSOS) सहित कई रिसर्च और मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। भारतीय राजनीति सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय मामलो से जुड़े मुद्दों पर खास दिलचस्पी है और इसके लिए लिखते रहते हैं। [Read more]
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