प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को समय पर बेहतर इलाज दिलाने के उद्देश्य से PM रोड एक्सीडेंट विक्टिम्स हॉस्पिटलाइजेशन एंड एश्योर्ड ट्रीटमेंट (RAHAT) योजना की शुरुआत की है। इस योजना का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी सड़क हादसे के पीड़ित को इलाज के अभाव में अपनी जान न गंवानी पड़े। अक्सर देखा गया है कि दुर्घटना के बाद समय पर अस्पताल न पहुंच पाने या पैसों की कमी के कारण घायल व्यक्ति को सही इलाज नहीं मिल पाता, जिससे स्थिति गंभीर हो जाती है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह बेहद उपयोगी और मानवीय योजना शुरू की है।
पीएम राहत योजना के तहत क्या सुविधाएं मिलेंगी- इस योजना के अंतर्गत किसी भी सड़क दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को ₹1.5 लाख तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। यानी इलाज के लिए मरीज या उसके परिवार को अस्पताल में कोई पैसा जमा नहीं करना होगा। इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाएगी। यह सुविधा दुर्घटना के बाद 7 दिनों तक मान्य होगी, ताकि शुरुआती और जरूरी इलाज बिना किसी रुकावट के किया जा सके। योजना में यह भी तय किया गया है कि यदि मरीज की हालत गंभीर नहीं है और जान को तुरंत खतरा नहीं है, तो उसे 24 घंटे तक अस्पताल में स्टेबिलाइजेशन ट्रीटमेंट दिया जाएगा। वहीं, अगर मरीज की हालत गंभीर है और उसकी जान को खतरा है, तो यह समय सीमा बढ़ाकर 48 घंटे कर दी गई है। इसका उद्देश्य यह है कि डॉक्टर मरीज की हालत को स्थिर कर सकें और आगे के इलाज की तैयारी कर सकें।
एनरोलमेंट या दस्तावेज की जरूरत नहीं- इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए किसी भी तरह का रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस या इनकम प्रूफ की जरूरत नहीं है। यानी देश का कोई भी नागरिक, चाहे वह किसी भी वर्ग या आय समूह से हो, सड़क दुर्घटना का शिकार होने पर इस योजना का लाभ उठा सकता है। यह सुविधा सीधे अस्पताल में उपलब्ध होगी, जिससे समय की बचत होगी और इलाज में देरी नहीं होगी।
सिर्फ पैनल अस्पतालों में सुविधा- पीएम राहत योजना के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा केवल सरकार द्वारा पैनल में शामिल अस्पतालों में ही मिलेगी। इन अस्पतालों को सरकार की ओर से तय मानकों के अनुसार चुना गया है, ताकि मरीजों को बेहतर और सुरक्षित इलाज मिल सके। इलाज के बाद अस्पताल सरकार को डिजिटल माध्यम से क्लेम भेजेंगे, जिसके आधार पर उन्हें भुगतान किया जाएगा। यह योजना मुख्य रूप से आपातकालीन और शुरुआती इलाज के लिए बनाई गई है। अगर किसी मरीज को लंबे समय तक इलाज या रिहैबिलिटेशन की जरूरत पड़ती है, तो उसके लिए अलग से अधिक फंडिंग की आवश्यकता हो सकती है। हालांकि, यह योजना शुरुआती समय में मरीज की जान बचाने और उसे स्थिर करने में बेहद कारगर साबित होगी।

















