AI इम्पैक्ट सम्मेलन 2026: तकनीक, मानवता और वैश्विक भविष्य की नई दिशा
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AI इम्पैक्ट सम्मेलन 2026: तकनीक, मानवता और वैश्विक भविष्य की नई दिशा

वैश्विक AI विमर्श अचानक नहीं उभरा, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में यह क्रमिक रूप से विकसित हुआ है।  ब्लेचले पार्क AI सेफ्टी समिट (2023) -जहां AI से जुड़े अस्तित्वगत और विनाशकारी सतहों पर मुख्य फोकस था। सियोल AI समिट (2024) -जिसने विमर्श को आगे बढ़ते हुए नवाचार और समावेशिता को केंद्र में रखा।

Written byदीपक द्विवेदीदीपक द्विवेदी — edited by Mahak Singh
Feb 14, 2026, 01:19 pm IST
inभारत
प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आज मानव इतिहास के उस मोड़ पर खड़ी है जहाँ यह केवल तकनीक नहीं, बल्कि सभ्यता को दिशा देने वाली शक्ति बन चुकी है। औद्योगिक क्रांति ने जहाँ मशीनों के ज़रिये उत्पादन बढ़ाया था, वहीं AI सोचने, सीखने और निर्णय लेने की मानवीय क्षमता को नए स्तर पर ले जा रही है। स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, उद्योग, शासन और सुरक्षा—हर क्षेत्र में AI का प्रभाव स्पष्ट है। ऐसे समय में सबसे बड़ा प्रश्न यह नहीं है कि AI आएगी या नहीं, बल्कि यह है कि AI किसके लिए, किन मूल्यों के साथ और किस दिशा में विकसित होगी।

इसी संदर्भ में एआई  इम्पैक्ट सम्मलेन  2026 का आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है, जिसे भारत 16 से 20 फरवरी 2026 तक आयोजित करेगा। यह ऐतिहासिक इसलिए है क्योंकि पहली बार कोई वैश्विक दक्षिण (Global South) देश वैश्विक AI शासन से जुड़े इतने बड़े मंच की मेज़बानी कर रहा है।

वैश्विक AI शिखर सम्मेलनों का विकास: सुरक्षा से विकास तक

वैश्विक AI विमर्श अचानक नहीं उभरा, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में यह क्रमिक रूप से विकसित हुआ है।  ब्लेचले पार्क AI सेफ्टी समिट (2023) -जहां AI से जुड़े अस्तित्वगत और विनाशकारी सतहों पर मुख्य फोकस था। सियोल AI समिट (2024) -जिसने विमर्श को आगे बढ़ते हुए नवाचार और समावेशिता को केंद्र में रखा। पेरिस AI एक्शन समिट (2025) जहाँ AI के कार्यान्वयन, निवेश और आर्थिक अवसरों पर ज़ोर दिया गया। यह यात्रा दर्शाती है कि वैश्विक सोच अब केवल डर और नियंत्रण से आगे बढ़कर व्यावहारिक उपयोग और विकास की ओर अग्रसर हो चुकी है।

एआई इम्पैक्ट सम्मलेन 2026: पैमाना और वैश्विक महत्व

केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार यह अब तक का सबसे बड़ा AI सम्मेलन होगा। इसमें 100से अधिक  देश ,15–20 राष्ट्राध्यक्ष/सरकार प्रमुख ,50 से अधिक मंत्री एवं 40 से अधिक वैश्विक व भारतीय कंपनियों के CEO भाग लेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उद्घाटन सत्र, रात्रिभोज और CEO गोलमेज बैठक को संबोधित करेंगे। इससे यह सम्मेलन केवल तकनीकी नहीं, बल्कि वैश्विक नीति और नेतृत्व का मंच भी बन जाता है।

सम्मेलन के केंद्र में प्रमुख विषय

एआई इम्पैक्ट सम्मलेन 2026 में चर्चा केवल सिद्धांतों तक सीमित नहीं रहेगी। इसके केंद्र में होंगे AI और रोजगार विषय होगा जिसमे भविष्य की नौकरियाँ और कौशल परिवर्तन पर विचार विमर्श होगा। AI का अनुप्रयोग उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और सुशासन में संभव हो। इसके तहत ₹10,370 करोड़ के IndiaAI Mission के अंतर्गत स्वदेशी भाषा मॉडल, फाउंडेशन  मोडेल और लघु भाषा मोडेल  लॉन्च किए जाएंगे। इसके साथ 500 से अधिक  AI स्टार्टअप्स और लगभग 500 सत्र इसे AI पर केंद्रित सबसे व्यापक वैश्विक मंच बना सकते हैं।

भारत का विशिष्ट दृष्टिकोण: लोग -ग्रह – प्रगति ( 3 P मॉडल People – Planet – Progress)

भारत में  AI का   दृष्टिकोण तीन मूल सूत्रों पर आधारित है।   लोग (People): AI सभी के लिए सुलभ, समावेशी और भाषाई-सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील हो। पृथ्वी (Planet) : AI संसाधन-कुशल, पर्यावरण-अनुकूल और सतत विकास के अनुरूप हो। प्रगति (Progress): AI के लाभ समान रूप से वितरित हों, केवल कुछ देशों या कंपनियों तक सीमित न रहें।

भारत में AI क्रांति: नीति, नवाचार और वैश्विक नेतृत्व

भारत इस समय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में तेज परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। यह बदलाव सरकार की दूरदर्शी नीतियों और इंडियाAI मिशन जैसी पहलों का परिणाम है। यह पूरी प्रक्रिया 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य से जुड़ी है, जिसका उद्देश्य भारत को एक वैश्विक AI पावरहाउस बनाना है। AI अवसंरचना को मज़बूत करने के लिए सरकार 18,693 ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट वाला अत्याधुनिक कंप्यूटिंग केंद्र स्थापित कर रही है। ओपन ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट मार्केटप्लेस से स्टार्टअप, शोधकर्ता और छात्र किफायती हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग का लाभ उठा रहे हैं। अगले 3–5 वर्षों में स्वदेशी ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही इंडिया एआई डाटासेट प्लेटफार्म  और स्वास्थ्य, कृषि व शिक्षा के लिए AI उत्कृष्टता केंद्र (बजट 2025 में ₹500 करोड़) अनुसंधान को गति दे रहे हैं। AI कौशल के क्षेत्र में भी भारत अग्रणी है। पाँच राष्ट्रीय AI कौशल केंद्र, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत AI शिक्षा और स्टेनफोर्ड  AI Index 2024 के अनुसार 2016 से 263% AI प्रतिभा वृद्धि भारत की मज़बूत मानव पूंजी को दर्शाती है। देश में 520+ टेक इनक्यूबेटर हैं, जिससे भारत तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। भारतजेन, सर्वम-1, AI कोष, डिजिटल इंडिया भाषिणी और चित्रलेखा जैसी स्वदेशी पहलें भारत को AI का निर्माता राष्ट्र बना रही हैं। आधार, UPI और डिजीलॉकर जैसी DPI के साथ AI का एकीकरण शासन को अधिक प्रभावी बना रहा है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में IndiaAI मिशन के लिए ₹1,000 करोड़ का प्रावधान किया है, जबकि मिशन का पाँच वर्षीय कुल परिव्यय ₹10,371.92 करोड़ है। इसके साथ AI डेटा सेंटरों को 2047 तक टैक्स हॉलिडे, सेमीकंडक्टर मिशन 2.0, 15,000 स्कूल AI लैब और 10,000 टेक फेलोशिप जैसी घोषणाएँ की गई हैं।

भारत में AI की चुनौतियाँ: तर्कसंगत विश्लेषण और समाधान

भारत की AI महत्वाकांक्षाएँ बड़ी हैं, पर उनके सामने कई व्यावहारिक चुनौतियाँ भी खड़ी हैं। हार्डवेयर निर्भरता -भारत में उन्नत ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट और AI चिप्स का घरेलू उत्पादन सीमित है। अधिकांश उच्च-स्तरीय कंप्यूटिंग आयात पर निर्भर है, जिससे लागत बढ़ती है और रणनीतिक जोखिम भी। इसका समाधान सेमीकॉन इंडिया, फैबलेस चिप डिज़ाइन स्टार्टअप और सार्वजनिक–निजी R&D को तेज़ करना।
ऊर्जा संकट – AI डेटा सेंटर अत्यधिक बिजली और पानी की खपत करते हैं। इससे कार्बन फुटप्रिंट बढ़ता है। इसका समाधान नवीकरणीय ऊर्जा, स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) जैसे परमाणु विकल्प और ऊर्जा-कुशल AI एल्गोरिदम में है।

रोजगार संकट का जोखिम- ऑटोमेशन से पारंपरिक नौकरियों (विशेषकर विनिर्माण व सेवाओं) पर दबाव बढ़ सकता है। इसके लिए पुनः-कौशल, उन्नत-कौशल और मानव–एआई सहयोग को बढ़ावा, भविष्य के कौशल   आधारित नौकरियाँ लानी होगी।

नैतिकता व डेटा जोखिम- पूर्वाग्रह, डीपफेक और गोपनीयता उल्लंघन की आशंका। इसके लिए  उत्तरदायी AI मानक, पारदर्शी मॉडल और डेटा संरक्षण कानून बनाने होंगे।

एआई इम्पैक्ट समिट 2026: भारत के लिए गौरव, नेतृत्व और वैश्विक अवसर

एआई इम्पैक्ट समिट 2026 भारत के लिए केवल एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नहीं, बल्कि रणनीतिक, आर्थिक और वैचारिक नेतृत्व का ऐतिहासिक अवसर है। यह शिखर सम्मेलन भारत को वैश्विक एआई शासन में नीति-निर्माता और दिशा-निर्देशक की भूमिका में स्थापित कर सकता है। इस मंच के माध्यम से भारत अपने लोग–पृथ्वी–प्रगति  आधारित मानव-केंद्रित एआई मॉडल को वैश्विक मानक के रूप में प्रस्तुत करेगा। इसका आशय है कि एआई केवल लाभ या शक्ति का साधन न होकर, मानव कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और समावेशी विकास का माध्यम बने। इससे एआई की नैतिकता, सुरक्षा, समावेशन और विकासोन्मुख उपयोग से जुड़े वैश्विक नियमों और ढाँचों के निर्माण में भारत की भूमिका सशक्त होगी।

100 से अधिक देशों, मंत्रियों और वैश्विक उद्योग प्रमुखों की भागीदारी से भारत में एआई स्टार्टअप, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर और कंप्यूटिंग अवसंरचना में बड़े पैमाने पर निवेश आने की संभावना है। इंडिया एआई मिशन के अंतर्गत स्वदेशी भाषा मॉडल, फाउंडेशन मॉडल और लघु भाषा मॉडल भारत को एआई का उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता और निर्यातक राष्ट्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ाएंगे। एआई इम्पैक्ट समिट 2026 भारत को केवल तकनीकी शक्ति नहीं, बल्कि ज्ञान, नीति और मानवता-केंद्रित विकास का मार्गदर्शक बना सकता है। सही नीतियों और दूरदृष्टि के साथ भारत एआई युग का विश्वगुरु बनकर उभर सकता है, जहाँ तकनीक का उद्देश्य गति नहीं, बल्कि मानव कल्याण और वैश्विक प्रगति हो।

Topics: IndiaAI MissionAI Startup EcosystemAI Ethics and Data SecurityIndia's Global LeadershipArtificial IntelligenceaiDeveloped India 2047AI and employmentAI Impact Conference 2026Global AI Governance
दीपक द्विवेदी
दीपक द्विवेदी
सिविल सेवा विशेषज्ञ , इतिहास संकलन समिति, जनजाति कल्याण केंद्र। इतिहास , भारतीय ज्ञान परम्परा एवं विभिन्न विमर्श पर वैचारिक लेखन और उद्बोधन। [Read more]
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