देश में डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ रहे हैं। अब छोटी खरीदारी से लेकर बड़े व्यापारिक लेन-देन तक, हर जगह डिजिटल ट्रांजेक्शन आम हो गए हैं। इससे सुविधा तो बढ़ी है, लेकिन साइबर अपराधियों के लिए नए रास्ते भी खुले हैं। वे फर्जी बैंक खाते, सिम कार्ड और तकनीकी चालाकियों का इस्तेमाल करके आम लोगों की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं। ऐसे बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने बैंकों में म्यूल अकाउंट हंटर (MuleHunter.ai) नामक एआई आधारित टूल लागू करने का निर्णय लिया है।
हाल ही में दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सभी सार्वजनिक, निजी और सहकारी बैंकों से अपील की कि वे इसे जल्द अपनाएं। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल वित्तीय सुरक्षा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा बन चुकी है। उन्होंने यह भी बताया कि दुनिया में हो रहे हर दूसरे डिजिटल ट्रांजेक्शन का हिस्सा भारत में भी है, इसलिए बैंकिंग सिस्टम को और अधिक सुरक्षित बनाना अत्यंत जरूरी है।
म्यूल अकाउंट हंटर क्या है और कैसे काम करता है- म्यूल अकाउंट हंटर एक एआई आधारित सॉफ्टवेयर है, जिसे रिजर्व बैंक इनोवेशन हब और केंद्र सरकार के सहयोग से विकसित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे बैंक खातों की पहचान करना है, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जाता है। यह टूल मशीन लर्निंग तकनीक पर आधारित है और बैंक खातों के ट्रांजेक्शन पैटर्न का लगातार विश्लेषण करता है। जैसे ही किसी खाते में संदिग्ध गतिविधि देखी जाती है, यह तुरंत अलर्ट जारी कर देता है, ताकि बैंक समय रहते कार्रवाई कर सके। विशेषज्ञों का दावा है कि इस टूल की मदद से हर महीने लगभग 20 हजार संदिग्ध या फर्जी खातों की पहचान की जा रही है।
म्यूल अकाउंट क्या होते हैं- म्यूल अकाउंट वे बैंक खाते होते हैं जिनका उपयोग साइबर अपराधी पैसों को ट्रांसफर करने के लिए करते हैं। अक्सर ये खाते फर्जी दस्तावेज़ों से बनाए जाते हैं या लोग अनजाने में इन्हें अपराधियों को इस्तेमाल करने के लिए दे देते हैं। अपराधी सीधे अपने खाते में पैसे नहीं मंगवाते, बल्कि कई खातों के जरिए रकम घुमाते हैं, ताकि ट्रैकिंग मुश्किल हो जाए। कभी-कभी लोग ज्यादा कमाई या घर बैठे काम करने का झांसा देकर अपना खाता और एटीएम कार्ड अपराधियों को दे देते हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि साइबर फ्रॉड में चोरी हुए हजारों करोड़ रुपये में से बड़ी रकम को फ्रीज किया जा चुका है। लाखों सिम कार्ड रद्द किए गए, हजारों मोबाइल आईएमईआई नंबर ब्लॉक किए गए और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि दिसंबर 2026 तक सभी बैंकों और वित्तीय संस्थानों को I4C से जोड़ दिया जाए, ताकि साइबर अपराध पर तेज और संगठित कार्रवाई हो सके।















