47 परिवारों के 141 सदस्यों की घर वापसी, यज्ञ में वैदिक रीति से अपनाया सनातन धर्म
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47 परिवारों के 141 सदस्यों की घर वापसी, यज्ञ में वैदिक रीति से अपनाया सनातन धर्म

ये सभी परिवार पूर्व वर्षों में पादरियों और मिशनरियों के प्रभाव में आकर ईसाई मजहब अपना चुके थे।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
Feb 12, 2026, 01:57 pm IST
in ओडिशा

भुवनेश्वर। ओडिशा के संबलपुर जिले के बामरा प्रखंड अंतर्गत सोलबागा गांव में स्थित वेदमाता महिला सेवा आश्रम परिसर में आयोजित पंचकुंडीय धर्मरक्षा यज्ञ के दौरान 47 परिवारों के कुल 141 सदस्यों ने घर वापसी कार्यक्रम के तहत पुनः हिंदू धर्म स्वीकार किया। यह कार्यक्रम विश्व हिंदू परिषद (VHP) के धर्म प्रसार विभाग द्वारा आयोजित किया गया था। वैदिक मंत्रोच्चार, हवन और पारंपरिक अनुष्ठानों के बीच प्रतिभागियों ने अपने ‘मूल धर्म’ में वापसी की।

आयोजकों के अनुसार, ये सभी परिवार पूर्व वर्षों में पादरियों और मिशनरियों के प्रभाव में आकर ईसाई मजहब अपना चुके थे। कार्यक्रम के दौरान इन लोगों ने बताया कि वीएचपी कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार संपर्क, संवाद और जागरूकता अभियान चलाए जाने के बाद उन्होंने पुनः हिंदू धर्म में लौटने का निर्णय लिया। कार्यक्रम की शुरुआत एक भव्य कलश यात्रा से हुई, जो केसईबहाल स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से प्रारंभ होकर यज्ञ स्थल तक पहुंची। इस यात्रा में स्थानीय ग्रामीणों, विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्यों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पूरे मार्ग में धार्मिक जयघोष और वैदिक मंत्रों की गूंज सुनाई दी।

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यज्ञ समारोह के दौरान लौटने वाले परिवारों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। उनके चरण पखारे गए, उन्हें फूलमालाएं और हवन में आहुति दिलाई गई। अनेक संत-महात्मा और धार्मिक नेताओं की उपस्थिति में यह अनुष्ठान संपन्न हुआ। कार्यक्रम को मार्गदर्शन वीएचपी के धर्म प्रसार विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारी अच्युतानंद कर ने दिया।

इस अवसर पर वीएचपी की केंद्रीय मार्गदर्शक मंडली के सदस्य स्वामी जीवनमुक्तानंद पुरी, पश्चिम ओडिशा प्रांत अध्यक्ष राजकुमार बड़पांडा, संगठन मंत्री सत्यनारायण सेनापति, शेषदेव बाबा और बाबा शिवानंद सहित कई प्रमुख धार्मिक हस्तियां उपस्थित रहीं। सभी ने लौटने वाले परिवारों का चंदन और नारियल भेंट कर स्वागत किया तथा सभा को संबोधित किया। घर वापसी कार्यक्रम में शामिल कुछ प्रतिभागियों ने अपने अनुभव भी साझा किए। जयंती जयपुरिया नामक महिला, जिन्होंने पूर्व में ईसाई धर्म स्वीकार किया था, ने आरोप लगाया कि उनके परिवार को झूठे आश्वासनों के आधार पर प्रभावित किया गया। उन्होंने बताया कि उनके पिता लंबे समय से बीमार थे और इलाज कराने के बावजूद स्वास्थ्य में सुधार नहीं हो रहा था। इसी दौरान एक नन उनके घर आई और ईसाई धर्म अपनाने तथा यीशु की शरण में जाने पर बीमारी ठीक होने का आश्वासन दिया।

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उन्होंने कहा, “हमने उनके शब्दों पर विश्वास किया, लेकिन बाद में समझ में आया कि वे आश्वासन सही नहीं थे। पिता की तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ। कनवर्ट के बाद हमें नियमित प्रार्थनाओं में शामिल होना पड़ता था, लेकिन जो वादे किए गए थे, वे पूरे नहीं हुए।” जयंती ने कहा कि बाद में उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ और उन्होंने पुनः हिंदू धर्म में लौटने का निर्णय लिया। इसी तरह रहस्या मंजरी पटेल ने भी अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके भतीजे की गंभीर बीमारी के दौरान कुछ पादरी उनके परिवार के संपर्क में आए। उन्होंने कथित तौर पर मूर्ति पूजा छोड़कर यीशु मसीह से प्रार्थना करने की सलाह दी और बच्चे के स्वस्थ होने का आश्वासन दिया। उस समय हमारी मानसिक स्थिति ऐसी थी कि हमने उनकी बात मान ली। लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद बच्चे की मृत्यु हो गई। तब हमें उनकी बातों की सच्चाई समझ में आई । रहस्या मंजरी ने कहा कि घर वापसी के बाद उन्हें आत्मिक संतोष की अनुभूति हो रही है।

सभा को संबोधित करते हुए विहिप के वरिष्ठ पदाधिकारी अच्युतानंद कर ने आरोप लगाया कि कुछ ईसाई मिशनरी संगठन विभिन्न प्रकार के प्रलोभन और तरीकों के माध्यम से लोगों को उनकी सांस्कृतिक जड़ों से दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को भारतीय परंपराओं और पहचान से अलग किया जा रहा है। जो लोग विभिन्न कारणों से अपनी जड़ों से कट गए हैं, उन्हें वापस लाना केवल धार्मिक कार्य नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रयास है। पश्चिम ओडिशा प्रांत अध्यक्ष राजकुमार बड़पंडा ने कहा कि यह कार्यक्रम उन लोगों की सहायता के लिए आयोजित किया गया था, जिन्होंने “भूलवश, दबाव या परिस्थितियोंवश” अन्य धर्म अपनाया था। उन्होंने कहा कि आज साझा किए गए व्यक्तिगत अनुभवों से स्पष्ट है कि किस प्रकार कुछ पादरी कनवर्जन के लिए प्रयास करते हैं। समाज के सामने इन तथ्यों को लाना आवश्यक है, ताकि लोग जागरूक और सतर्क रहें। उन्होंने लोगों से सनातन धर्म के मूल्यों को समझने और किसी भी प्रकार के प्रलोभन से बचने का आह्वान किया।

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स्वामी जीवनमुक्तानंद पुरी ने कहा कि सभी प्रतिभागियों ने स्वेच्छा और आत्मबोध के साथ अपने मूल धर्म में वापसी की है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम गरिमापूर्ण और भव्य रहा है। समाज की सक्रिय भागीदारी इसका प्रमाण है। विदेशों में चर्चों में जाने वालों की संख्या घट रही है, जबकि यहां भोले-भाले और जरूरतमंद लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। ऐसी प्रवृत्तियों पर रोक लगनी चाहिए। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कथित अवैध कनवर्जन के मुद्दे पर भी चिंता व्यक्त की और ओडिशा में लागू कनवर्जन संबंधी कानूनों के सख्त पालन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का कनवर्जव यदि दबाव, प्रलोभन या मिथ्या प्रस्तुति के आधार पर किया जाता है, तो उसे रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। साथ ही धार्मिक स्वतंत्रता के कानूनों को कडाई से लागू करने की मांग की गई।

इस आयोजन में प्रांतीय धर्म प्रसार प्रमुख दिलीप कुमार मेहर, भारतीय जन सेवा संस्था के प्रांतीय कोषाध्यक्ष दौलतराम अग्रवाल, मातृ शक्ति जिला प्रमुख सुविधानी पटेल, तुला बाबा, डॉ. कुमार विक्रम पंडित, अलेख कुमार पति, सरोज दास, घासीराम साहू सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और स्वयंसेवक उपस्थित रहे। संपूर्ण व्यवस्थाओं का दायित्व सर्व व्यवस्था प्रमुख सुबोध पटेल ने संभाला, जबकि साजन खंडेलवाल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। आयोजकों ने इसे क्षेत्र में सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक जागरूकता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे जनजागरण कार्यक्रम जारी रहेंगे। साथ ही प्रशासन से आग्रह किया गया कि धार्मिक स्वतंत्रता और कनवर्जन से जुड़े कानून को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, ताकि किसी भी प्रकार के दबाव या प्रलोभन के आधार पर होने वाले कनवर्जन को रोका जा सके।

Topics: sanatana dharmaChristian missionariesOdishaghar waapsi
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